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प्रधानमंत्री मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना मऊ जिले में रानीपुर के पड़री ग्राम सभा में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. लगभग 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से बन रही पानी की टंकी सालों से अधूरी पड़ी है. जिससे भीषण गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. कागजों पर मिशन पूरा होने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है की पाइपलाइन से लेकर टंकी तक का काम अधर में लटक गया है. बिजली संकट और गिरते जलस्तर के बीच ग्रामीण अब दूसरों के घरों से पानी ढोने को मजबूर हैं. अब आईए जानते हैं इसको लेकर स्थानिय ग्रामीण क्या कुछ कर रहे हैं.

मऊः प्रधानमंत्री मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना मऊ जिले में रानीपुर के पड़री ग्राम सभा में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. लगभग 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से बन रही पानी की टंकी सालों से अधूरी पड़ी है. जिससे भीषण गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. कागजों पर मिशन पूरा होने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है की पाइपलाइन से लेकर टंकी तक का काम अधर में लटक गया है. बिजली संकट और गिरते जलस्तर के बीच ग्रामीण अब दूसरों के घरों से पानी ढोने को मजबूर हैं. अब आईए जानते हैं इसको लेकर स्थानिय ग्रामीण क्या कुछ कर रहे हैं.

अधूरा पड़ा जल जीवन मिशन

ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने और हर-हर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के दावे के साथ शुरू किया गया जल जीवन मिशन मऊ जनपद में गंभीर सवालों के घेरे में है. जिले के रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के पड़री ग्राम सभा में इस योजना की जमीनी हकीकत सरकारी दावो से बिल्कुल अलग है. यहां लगभग 3 करोड़.52 लाख की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कार्य तो शुरू हुआ. लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह आज भी अधूरी पड़ी है. गर्मी के इस मौसम में जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है तब ग्रामीण खाली बर्तनों के साथ सरकारी सिस्टम को कोश रहे हैं.

एक साल से कार्य बंद पड़ा है

लोकल 18 से बात करते हुए योगेश सिंह ने बताया कि लगभग 1 साल से पानी की टंकी का कार्य यहां पर बंद है. जब पड़री ग्राम सभा में पानी का टंकी लगना शुरू हुआ तो लोगों को आस जगी कि अब प्रत्येक घर को शुद्ध जल मिलेगा. लोगों को बीमारियों से मुक्ति मिलेगी और बिना किसी परेशानी के लोगों के घरों तक पानी पहुंचेगा. लेकिन यह सब कागजों में सीमट के रह गया. कागजों में तो लगभग 3 करोड़.52 लाख का यह पानी का टंकी बन कर तैयार है लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है सिर्फ इस स्थान पर चारों तरफ से बाउंड्री मार कर और एक छोटा सा भवन बनकर तथा बोरिंग करके पानी के टंकी का ढांचा तैयार कर छोड़ दिया गया. अब भीषण गर्मी में छोटी मशीन पानी नहीं दे रही हैं ऐसे में ग्रामीणों को पानी की संकट से झुज रहे हैं यदि यह पानी की टंकी बन जाए तो ग्रामीणों को सही समय पर पानी मिलने लगेगा.

बूंद बूंद के लिए तरस रहे पानी के लिए ग्रामीण

तरुण सिंह ने बताया कि पानी की टंकी ना होने से गांव में लाइट ना रहने से समय से पानी नहीं मिलता. लोगों को एक दूसरों के घरों से पानी लेने का सहारा लेना पड़ता है जब यह पानी की टंकी का नींव पड़ा तो आस जगी की अब ग्रामीणों की पानी की संकट से मुक्ति मिलेगी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं पड़री ग्राम सभा में पानी की टंकी से पानी की सप्लाई होनी थी लेकिन पूरे गांव में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. ठेकेदार और अधिकारियों से कहने के बाद सिर्फ आश्वासन मिल रहा है लेकिन सालों से यह काम अधूरा छोड़ दिया गया है. वर्तमान में भीषण गर्मी चल रही है और लोग बूंद – बूंद पानी के लिए तारस रहें यदि आप पानी की टंकी बनाकर सप्लाई चालू हो जाए ग्रामीणों की समस्या समाप्त हो जाएगी.

शुद्ध जल न मिलने से बीमारी फैलने की रहती डर

अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पानी की टंकी ना लगने से लोगों को शुद्ध जल नहीं मिल रहा है. कई बीमारियां फैल रही है यदि यह पानी की टंकी चालू हो जाए और लोगों के घरों तक इसकी सप्लाई हो जाए तो लोगों को शुद्ध जल मिलने लगेगा. तथा गर्मी के मौसम में जो पानी का लेवल नीचे चला जाता है और लोगों को पानी नहीं मिल पाता इसकी समस्या भी समाप्त हो जाएगी और लोगों को शुद्ध जल मिलने लगेगा. अब देखना यह है कि यह पानी की टंकी कब चालू होती है हालांकि वर्षों से इस काम को अधूरा छोड़कर ठेकेदार यहां से गायब हो गए हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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