हिंदी सिनेमा में स्टारडम अक्सर शर्तों और पैसों के साथ आता है, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी रहे जिन्होंने अपने वचन को सबसे ऊपर रखा. ऐसे ही कलाकारों में एक नाम है मनोज कुमार, जिन्होंने 1965 में आई फिल्म हिमालय की गोद में के लिए अपनी फीस से समझौता कर इंसानियत और पेशेवर ईमानदारी की मिसाल पेश की. क्या है 61 साल पुरानी फिल्म का ये किस्सा, चलिए बताते हैं…
नई दिल्ली. स्टारडम की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद अक्सर कलाकार अपने फैसलों में बदलाव कर लेते हैं, खासकर जब बात फीस और शर्तों की हो. लेकिन मनोज कुमार उन चुनिंदा सितारों में रहे, जिन्होंने सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी अपने पुराने वादे को नहीं भुलाया. जब उनका करियर बुलंदियों पर था और वे बड़ी रकम मांग सकते थे, तब उन्होंने इंसानियत और पेशेवर ईमानदारी को प्राथमिकता दी. एक निर्माता से किया गया वादा निभाने के लिए उन्होंने कम पैसों में काम करना स्वीकार किया और अपनी जुबान की कीमत को सबसे ऊपर रखा.
बॉलीवुड में इंसानियत की मिसाल और ‘भारत कुमार’ के नाम से मशहूर एक्टर मनोज कुमार का नाम आते ही जहन में देशभक्ति के जोश से भरी फिल्मों की छवि उभरती है. शहीद, गुमनाम, उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान, क्रांति और शोर जैसी कई फिल्में हैं, जिनमें वह नजर आए. लेकिन साल 1965 में आई फिल्म ‘हिमालय की गोद में’ के लिए उन्होंने अपनी स्टारडम से ऊपर अपनी दी हुई जुबान का रखा.
फिल्म ‘हिमालय की गोद में’ 1965 को रिलीज हुई थी. इसे विजय भट्ट ने निर्देशित किया था और श्री प्रकाश पिक्चर्स की ओर से शंकरभाई भट्ट ने प्रोड्यूस किया था. मुख्य भूमिकाओं में मनोज कुमार (डॉ. सुनील मेहरा), माला सिन्हा (फूलवा) और शशिकला (नीता) के रोल में थे. 2 घंटो 37 मिनट लंबी इस फिल्म ने फिल्मफेयर बेस्ट फिल्म अवॉर्ड जीता और 1960 के दशक की टॉप 20 हिट फिल्मों में शामिल रही.
Add News18 as
Preferred Source on Google
दरअसल, जब इस फिल्म की प्लानिंग शुरू हुई थी, तब मनोज कुमार उतने बड़े स्टार नहीं बने थे. 1962 में आई फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’ की सफलता के बाद मनोज कुमार ने उन्होंने प्रकाश पिक्चर्स के साथ अपने दो-फिल्मी सौदे को बनाए रखने का वादा किया था. 1965 आते-आते मनोज कुमार एक बड़े स्टार बन चुके थे और उनकी फीस 2-3 लाख रुपये तक जा सकती थी. बावजूद इसके, उन्होंने अपनी बात रखी और सिर्फ 11,000 रुपये की फीस पर फिल्म करने को तैयार हो गए.
जब सिनेमाई दुनिया में इस बात की खबर हुई तो कई बिचौलियों ने मनोज कुमार से फीस 2-3 लाख रुपये तक बढ़ाने का दबाव डाला, लेकिन उन्होंने किसी की एक न सुनी और अपनी बात पर अड़े रहे. उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि कई लोगों ने कोशिश की लेकिन मैं अपने फैसले पर अड़ा रहा. उन्होंने कहा था कि मैंने सोच लिया था कि अगर वे मुझे अतिरिक्त पैसे देना चाहते, तो भी मैं सहमत नहीं होता.
फिल्म की कहानी हिमालय की गोद में बसे एक छोटे से गांव पर आधारित है. डॉ. सुनील मेहरा (मनोज कुमार) मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर की सुविधाओं को छोड़कर दूर-दराज के हिमालयी गांव में प्रैक्टिस करने का फैसला करते हैं. उनकी मंगेतर नीता (शशिकला), जो खुद डॉक्टर हैं, उनके साथ जाती हैं. लेकिन गांव की आदिम सुविधाओं और पिछड़ेपन को देखकर वह वहां टिक नहीं पाती और लौट जाती है.
डॉ. सुनील गांव में अकेले संघर्ष करते हैं. यहां के लोग आधुनिक दवा पर भरोसा नहीं करते और जादू-टोने व शमां (झाड़-फूंक) पर विश्वास रखते हैं. एक दिन गांव के बाहर हमला होने पर स्थानीय लड़की फूलवा (माला सिन्हा) उनकी मदद करती है. धीरे-धीरे सुनील फूलवा से प्यार करने लगते हैं. फिल्म में गांव की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों, अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई, चिकित्सा सुविधाओं की कमी और मानवीय मूल्यों को खूबसूरती से दिखाया गया है. डॉ. सुनील गांव वालों के लिए अस्पताल और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की लड़ाई लड़ते हैं.
संगीत के लिहाज से भी यह फिल्म काफी समृद्ध थी. इसके गाने आज भी क्लासिक माने जाते हैं. संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने फिल्म को यादगार धुनें दीं. ‘चांद सी महबूबा हो मेरी’, ‘एक तू ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है’ जैसे गीत उस दौर में काफी लोकप्रिय हुए और आज भी रेडियो व मंचों पर सुने जाते हैं. इन गीतों को मुकेश और लता मंगेशकर जैसे दिग्गज गायकों ने अपनी आवाज दी, जिसने फिल्म के भावनात्मक पक्ष को और मजबूत बना दिया.
लगभग 1 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में 4.5 करोड़ रुपये की कमाई की. 1965 में प्रदर्शित, ‘हिमालय की गोद में’ ‘वक्त’, ‘अरज़ू’, ‘काजल’, ‘मेरे सनम’ और ‘गुमनाम’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के बीच रिलीज हुई, फिर भी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ‘सुपरहिट’ साबित हुई और इसे 1960 के दशक की 20 सबसे बड़ी कमाई वाली फिल्मों में शुमार किया गया. ‘हिमालय की गोद में’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



