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भारत अब केवल कागजों पर हथियार नहीं खरीद रहा है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों में जाकर सीधे मैदान में हथियारों की टेस्टिंग कर रहा है. एयरफोर्स चीफ एपी सिंह अमेरिका में हैं और खुद फाइटर जेट्स में उड़ान भरकर उनकी ताकत आंक रहे हैं. सीडीएस अन‍िल चौहान इंग्लैंड में ड‍िफेंस प्रोजेक्ट्स का मुआयना कर रहे हैं, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जर्मनी में ड‍िफेंस प्रोडक्‍शन और सामरिक साझेदारी पर फोकस कर रहे हैं. मैसेज क्‍ल‍ियर है क‍ि भारत अब कोई भी वेपन सिस्टम या फाइटर जेट आंख मूंदकर नहीं खरीदेगा. हर चीज ठोक-बजाकर और भारत की जरूरतों के ह‍िसाब से खरीदी जाएगी.

फाइटर जेट्स की डायरेक्ट टेस्टिंग

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 6-13 अप्रैल तक अमेरिका का दौरा किया. उन्होंने नेवादा स्थित नेलिस एयर फोर्स बेस में अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट Boeing F-15EX Eagle II में खुद उड़ान भरी.

भारत की जरूरत और अमेरिका से क्या चाहिए?

  1. भारतीय वायुसेना को अपने पुराने मिग और जगुआर विमानों को रिप्लेस करने के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की सख्त जरूरत है. अमेरिका इसी डील के लिए अपना F-15EX भारत को बेचना चाहता है, जिसकी टक्कर फ्रांस के राफेल से है. यह जेट 13,381 किलोग्राम का भारी पेलोड ले जाने में सक्षम है.
  2. MQ-9B स्काईगार्जियन ड्रोन: भारत अमेरिका से 31 अत्याधुनिक MQ-9B ड्रोन्स खरीद रहा है. वायुसेना प्रमुख ने इसके डेटा शेयरिंग और सर्विलांस मॉडल पर भी बात की.
  3. भविष्य की जरूरत F-35: पेंटागन में हुई वार्ताओं में अमेरिका ने भविष्य में भारत को 5th जनरेशन स्टील्थ फाइटर ‘F-35’ देने के रास्ते भी खुले रखने का संकेत दिया है.
  4. भारत की शर्त: भारत केवल जेट नहीं चाहता; वह चाहता है कि विमानों का निर्माण भारत में हो और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर हो. जेट में बैठकर एयरफोर्स चीफ ने उसकी असली कॉम्बैट पावर का खुद मुआयना किया, ताकि कोई नकली या कमजोर माल भारत को न चिपका दिया जाए.

इंग्लैंड में साइबर, स्पेस और को-प्रोडक्शन

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मार्च में ब्रिटेन के अधिकारियों से दिल्ली में बात की थी, लेकिन इस वक्‍त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान खुद ब्रिटेन के ऐतिहासिक दौरे पर हैं. यह किसी भी भारतीय CDS का पहला UK दौरा है. CDS जनरल अनिल चौहान ब्रिटेन के ‘रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज’ के साथ-साथ ब्रिटिश डिफेंस इंडस्ट्री के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं.

भारत की जरूरत और इंग्लैंड क्या दे सकता है?

इंजन और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन: ब्रिटेन की कंपनी रॉल्स-रॉयस के पास जेट इंजन और भारतीय नौसेना के जंगी जहाजों के लिए ‘इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन’ की बेहतरीन तकनीक है, जिसकी भारत को अपने स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर और फाइटर जेट्स के लिए जरूरत है.

  1. साइबर और स्पेस वॉरफेयर: भविष्य का युद्ध हथियारों से कम, तकनीक से ज्यादा लड़ा जाएगा. CDS वहां साइबर स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटेलिजेंस शेयरिंग के मॉडल्स का जायजा ले रहे हैं.
  2. ‘इंजन फॉर ग्रोथ’: भारत चाहता है कि ब्रिटेन रक्षा उपकरणों के को-प्रोडक्शन में भारत का पार्टनर बने, यानी दोनों देश मिलकर भारत में हथियार बनाएं.

जर्मनी में राजनाथ सिंह, फोकस महाबली पनडुब्बियां

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल 2026 तक जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर हैं. पिछले 7 सालों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री का यह पहला जर्मन दौरा है.

भारत की जरूरत और जर्मनी से क्या चाहिए?

प्रोजेक्ट 75I : चीन की नेवी हिंद महासागर में लगातार अपनी पैठ बढ़ा रही है. उसे काउंटर करने के लिए भारत को 6 अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियों की जरूरत है. यह डील लगभग 90,000 करोड़ रुपये की है.

भारत की शर्त: भारत की शर्त है कि पनडुब्बियों में फ्यूल सेल-आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम होना चाहिए. इससे पनडुब्बियां हफ्तों तक पानी के भीतर छिपी रह सकती हैं. यान बिना ऑक्सीजन के लिए सतह पर आए. जर्मनी की ‘थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स’ (TKMS) कंपनी ने भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के साथ हाथ मिलाया है.

‘मेक इन इंडिया’: भारत दुनिया के हर हथियार बेचने वाले देश को साफ बता चुका है कि अगर भारत का बड़ा बाजार चाहिए, तो तुम्हें अपनी फैक्ट्री भारत में लगानी होगी. राजनाथ सिंह जर्मनी में स्पष्ट कर रहे हैं कि ये पनडुब्बियां जर्मनी से बनकर नहीं आएंगी. इन्हें भारत में ही बनाना होगा और इसमें 45-60% कलपुर्जे स्वदेशी होने चाहिए.

भारत को ये सब चाह‍िए क्‍यों?

टू-फ्रंट वार का खतरा: भारत को एक ही समय में हिमालय की जमा देने वाली ठंड (LAC) और तपते रेगिस्तान (LoC) में युद्ध लड़ने के लिए तैयार रहना है. इसके लिए ऐसे हथियार चाहिए जो हर मौसम और हर इलाके में अचूक काम करें.

फाइटर जेट्स की कमी: वायुसेना को अपनी पूरी ताकत के लिए 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है, लेकिन अभी यह संख्या 30-31 के आसपास है. पुराने मिग-21 विमानों को रिटायर किया जा रहा है. ऐसे में वायुसेना को राफेल जैसे अत्याधुनिक 4.5 और 5th जनरेशन के फाइटर जेट्स की तत्काल जरूरत है.

समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों और युद्धपोतों की बढ़ती घुसपैठ को रोकने के लिए भारत को आधुनिक स्टील्थ सबमरीन, एयरक्राफ्ट कैरियर और एंटी-सबमरीन ड्रोन्स की सख्त आवश्यकता है.

हथियारों का आधुनिकीकरण: सेना को नए असॉल्ट राइफल्स, लाइट टैंक चाहिए, जो पहाड़ों पर आसानी से जा सकें, स्वार्म ड्रोन तकनीक और सटीक मार करने वाली मिसाइलों की जरूरत है.

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