Baba Soordas Kuti Mau UP: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के काझा में स्थित बाबा सूरदास की कुटी आस्था और न्याय का एक ऐसा केंद्र है, जहां की दीवारें आज भी एक महान तपस्वी के त्याग की गवाही देती हैं. दक्षिण भारत से आए एक संत की यह तपोस्थली आज 52 गांवों की अटूट श्रद्धा का मुख्य केंद्र बन चुकी है. इस मंदिर की सबसे अनोखी और हैरान करने वाली मान्यता यह है कि यहां कोई भी इंसान झूठी कसम खाने की हिम्मत नहीं करता. कहा जाता है कि बाबा ने स्वयं अपनी आंखों का त्याग कर दिया था और इस स्थान के लिए एक ऐसी मर्यादा तय की थी, जिसे तोड़ने वाले को भारी अंजाम भुगतना पड़ता है.
दक्षिण भारत से आए थे तपस्वी बाबा सूरदास
काझा के स्थानीय निवासी देवानंद ने बताया कि बाबा सूरदास मूल रूप से दक्षिण भारत के रहने वाले थे. जो भ्रमण करते हुए इस पावन भूमि पर आए और यहीं रुककर कठिन तपस्या में लीन हो गए. यह धरती आज बाबा सूरदास की तपोस्थली के रूप में पूजी जाती है. इस कुटी का गहरा संबंध ’52 गांव सिंघेल’ समाज से है. मान्यता है कि बाबा ने इसी स्थान पर जिंदा समाधि ले ली थी. बाबा के समाधि लेने के बाद उनके अनुयायियों ने उस स्थान पर एक मंदिर बनाया, जिसे आज कुटी के नाम से जाना जाता है.
क्यों नहीं खाता कोई यहां झूठी कसम?
इस मंदिर की सबसे प्रचलित और डराने वाली मान्यता न्याय से जुड़ी है. लोग बताते हैं कि जब बाबा यहां तपस्या कर रहे थे, तब किसी गलतफहमी या किसी की गलत टिप्पणी की वजह से उन्होंने अपनी तपस्या के बल पर स्वयं अपनी दोनों आंखे फोड़ ली थीं. जिंदा समाधि लेने से पहले बाबा ने इस स्थान को लेकर एक कड़ा नियम बनाया था. कहा जाता है कि यदि कोई इस मंदिर में आकर झूठी कसम खाता है, तो उसे तुरंत ही बहुत बुरा परिणाम भुगतना पड़ता है और वह व्यक्ति जीवन भर परेशान रहता है. इसी डर और सम्मान की वजह से आज तक किसी ने यहां झूठी कसम खाने की हिम्मत नहीं की है.
मन्नत पूरी होने पर आते हैं सांसद और विधायक
बाबा सूरदास की कुटी केवल आम जनता के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े राजनेताओं के लिए भी श्रद्धा का बहुत बड़ा केंद्र है. जिले का चाहे कोई भी सांसद हो, विधायक हो या गांव का प्रधान, चुनाव जीतने के बाद बाबा का आशीर्वाद लेने यहां जरूर आता है. चुनाव के समय भी प्रत्याशियों की भारी भीड़ यहां मन्नत मांगते हुए देखी जा सकती है. लोगों का मानना है कि जो भी यहां सच्चे मन से अपनी मुराद मांगता है, बाबा उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं.
52 गांवों की आस्था और विशेष पूजा के दिन
इस मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ मुख्य रूप से 52 गांवों के सिंघेल समाज के लोग करते हैं. वैसे तो यहां हर दिन भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन रविवार और मंगलवार के दिन यहां विशेष भीड़ उमड़ती है. हिंदू धर्म में इन दो दिनों को बहुत शुभ माना जाता है, इसलिए लोग अपनी विशेष मन्नतें लेकर इन्हीं दिनों में बाबा की शरण में पहुंचते हैं. बाकी दिनों में भी स्थानीय लोग यहां आकर भक्ति-भाव से पूजा करते हैं.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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