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High Court Order on Demonetisation Note: बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को आदेश द‍िया है क‍ि वह एक शख्‍स के बंद हो चुके 500 के पुराने नोट एक हफ्ते के अंदर बदलकर दें. नागपुर बेंच की जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और निवेदिता मेहता ने अपने आदेश में कहा कि पुल‍िस ने पहले नोट को नोटबंदी की तारीख तक जब्‍त रखा और उसको बदलने की समय सीमा तक ह‍िरासत में रखा ज‍िसके चलते व्‍य‍क्‍त‍ि को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

RBI देता रहा दलील... पर जज ने कर दी बोलती बंद, बोले- 500 के पुराने नोटZoom

500 रुपये के पुराने नोट बदलवाने को लेकर एक शख्‍स बॉम्‍बे हाईकोर्ट पहुंचा था

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को निर्देश दिया है कि वह एक व्यक्ति से जब्त किए गए और निर्धारित अवधि के बाद लौटाए गए 2 लाख रुपये के पुराने 500 रुपये के नोटों को एक हफ्ते के अदंर बदले.

बुधवार को हाईकोर्ट की नागपुर बेंच की जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस निवेदिता मेहता ने आदेश में कहा कि व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि नोट पुलिस द्वारा कट-ऑफ तारीख से पहले जब्त किए गए थे और नोट बदलने की समयसीमा खत्म होने तक पुलिस की हिरासत में ही रहे.

हाईकोर्ट ने पुल‍िस को द‍िए क्‍या न‍िर्देश
आरबीआई को यह निर्देश गिरीश मलानी नामक व्यक्ति की याचिका पर दिया गया. हाईकोर्ट ने कहा क‍ि याचिकाकर्ता को ऐसी स्थिति में नहीं रखा जा सकता जिसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है. मलानी ने याचिका में कहा कि वह 1 दिसंबर 2016 को 500 रुपये के 400 नोट लेकर महूर की ओर जा रहा था तभी नगरपालिका चुनाव के चलते पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने उनकी गाड़ी रोककर एहतियातन 2 लाख रुपये नकद जब्त कर महूर पुलिस स्टेशन में जमा कर दिए. इस जब्ती की सूचना आयकर विभाग को दी गई जिसने जांच के बाद पैसे को वैध माना और आगे कोई कार्रवाई जरूरी नहीं समझी. नोट 31 दिसंबर 2016 को मलानी को वापस किए गए.

क्‍या थी भारत सरकार की अध‍िसूचना
भारत सरकार ने 8 नवंबर 2016 को अधिसूचना जारी कर 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित किया था. इसके तहत नागरिकों को 30 दिसंबर 2016 तक ऐसे नोट अपने बैंक में जमा करने की अनुमति थी. जनवरी 2017 में मलानी ने आरबीआई से नोट बदलने की मांग की लेकिन उनकी मांग खारिज कर दी गई. उनका कहना था कि पैसा उनका ही था और उन्हें पुराने नोट जमा कर वैध मुद्रा में बदलवाने का मौका नहीं मिला. याचिका में दलील दी गई कि सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 30 दिसंबर 2016 या उससे पहले कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जब्त किए गए नोट कुछ शर्तों के साथ आरबीआई में जमा किए जा सकते थे. इन शर्तों का पालन करने के बावजूद आरबीआई ने मलानी के नोट स्वीकार करने और बदलने से इनकार कर दिया.

आरबीआई की क्‍या थी दलील
आरबीआई ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा नोटों के सीरियल नंबर दर्ज करने की शर्त का पालन नहीं हुआ. हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि जब गलती व्यक्ति की नहीं बल्कि अधिकारियों की हो, तो शर्तों का सख्ती से पालन जरूरी नहीं है. कोर्ट ने कहा क‍ि याचिकाकर्ता (मलानी) का उस अवधि में पैसे पर कोई नियंत्रण नहीं था इसलिए उन्हें राशि जमा करने और आरबीआई से विनिमय की अनुमति दी जा सकती है. बेंच ने मलानी को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर पुराने नोट आरबीआई में जमा करें जिसके बाद आरबीआई सात सप्ताह के भीतर जांच कर उन्हें वैध मुद्रा में बदलकर दे.

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