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-विधान परिषद नियम पुनरीक्षण समिति की बैठक, विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की गहन समीक्षा
-सभापति हरिओम पाण्डेय ने की बैठक की अध्यक्षता, अधिकारियों ने तीन साल का लेखा-जोखा किया प्रस्तुत
-विधायकों के 283 पत्रों में 280 का निस्तारण, विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि से 1059 कार्य पूरे
-तीन वर्षों में 1059 विकास कार्य पूरे, अधिकांश जनप्रतिनिधियों के पत्रों का हुआ निस्तारण

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की नियम पुनरीक्षण समिति की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को विकास भवन स्थित दुर्गावती देवी सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विधान परिषद के सभापति हरिओम पाण्डेय ने की, जिसमें गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर और गाजियाबाद जनपद से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और विकासात्मक बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक से पहले विकास भवन परिसर में सभापति श्री हरिओम पाण्डेय का आगमन होने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद आयोजित बैठक में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़, नगरायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक कुमार मिश्र सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान अधिकारियों ने सभापति हरिओम पाण्डेय तथा समिति के सदस्यों मोहित बेनिवाल और ऋषिपाल सिंह का पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह और पटका भेंट कर स्वागत किया।

बैठक में जनपद से संबंधित विभिन्न प्रशासनिक और विकास कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति के समक्ष पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों और उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया गया। इसमें विशेष रूप से विधान परिषद और विधान सभा के सदस्यों से प्राप्त पत्रों के निस्तारण, विकास निधि से कराए गए कार्यों, ‘एक जिला एक उत्पादÓ योजना की प्रगति, विधान परिषद की विभिन्न समितियों की बैठकों के अनुपालन, प्रश्नों के उत्तर, नियमों के तहत प्राप्त सूचनाओं और शिकायतों के निस्तारण की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने समिति को अवगत कराया कि पिछले तीन वर्षों में विभिन्न विभागों को विधान परिषद और विधान सभा के सदस्यों से कुल 283 पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 280 का मौके पर ही गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कर दिया गया है, जबकि तीन मामले अभी लंबित हैं। इसी अवधि में विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के अंतर्गत 1059 विकास कार्य पूरे कराए गए हैं।

बैठक में यह भी बताया गया कि ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा किया गया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान विधान परिषद की विभिन्न समितियों की कुल 18 बैठकें जनपद में आयोजित हुईं, जिनमें समिति द्वारा पूछे गए 111 प्रश्नों के उत्तर समय पर उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा विधान परिषद के विभिन्न नियमों के अंतर्गत प्राप्त 23 सूचनाओं के जवाब भी समय से भेजे गए। अधिकारियों ने बताया कि इस अवधि में विधान परिषद से 23 याचिकाएं प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 22 का समय पर निस्तारण कर दिया गया है, जबकि एक मामले पर कार्यवाही जारी है। विशेषाधिकार हनन का कोई भी प्रकरण लंबित नहीं है। इसके अतिरिक्त जनप्रतिनिधियों से प्राप्त 242 शिकायतों में से 240 का समाधान कर दिया गया है, जबकि दो शिकायतें अभी प्रक्रिया में हैं। बैठक के दौरान सभापति हरिओम पाण्डेय ने जनपद के विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि गाजियाबाद प्रशासन द्वारा कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। विशेष रूप से नगर निगम द्वारा स्वच्छता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं और अन्य विभागों को भी नगर निगम की तर्ज पर अपने कार्यों में सुधार करना चाहिए। समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर अपने सुझाव दिए। एक सदस्य ने कहा कि विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों को शासन को भेजने से पहले उनकी गहन जांच कर ली जानी चाहिए, ताकि उनके अस्वीकृत होने की संभावना कम हो सके और योजनाओं को समय पर स्वीकृति मिल सके।

सभापति ने शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर और प्रशंसनीय कार्य हो रहे हैं, जो आने वाले समय में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा और विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रयासों से जनपद की प्रगति और तेज होगी। बैठक के अंत में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समिति द्वारा दिए गए सुझावों और निर्देशों का पूरी गंभीरता के साथ पालन किया जाएगा और प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

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