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When is Dhulendi in 2026: परंपरा के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को होलिका का दहन होता है और दूसरे दिन प्रतिपदा के दिन धुलंडी का पर्व मनाया जाता है। इस बार होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया भी है। ऐसे में कब मनाएं रंगवाली होली यानी धुलेंडी? चलिए जानते हैं।

 

1. तिथि, भद्रा और चंद्र ग्रहण काल का समय सहित चंद्रोदय का समय

<strong><span style="color:#b22222">कब रहेगी पूर्णिमा तिथि?</span></strong>


पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 02 मार्च 2026 को शाम 05:55 बजे से।


पूर्णिमा तिथि समाप्त- 03 मार्च 2026 को शाम 05:07 बजे तक।


 


<strong><span style="color:#0000ff">कब से कब तक रहेगी भद्रा?</span></strong>


भद्रावास: धरती लोक पर।


भद्रा प्रारंभ: 2 मार्च शाम 05:55 पर।


भद्रा पूँछ- 3 मार्च 01:25 एएम से 02:35 एएम।


भद्रा मुख- 3 मार्च 02:35 एएम से 04:30 एएम।


भद्रा समाप्त: 3 मार्च 05:28 एएम।


अर्थात: भद्रा 2 मार्च को शाम 05:55 से अगले दिन यानी 3 मार्च को सुबह 05:28 तक रहेगी। इसलिए इस दिन होलिका दहन नहीं होगा।


 


<span style="color:#8b4513"><strong>कब से कब तक रहेगा चंद्र ग्रहण?</strong></span>


दिनांक: 03 मार्च 2026, दिन मंगलवार


समय: दिल्ली टाइम अनुसार शाम 06:26 से 06:46 तक।


सूतक काल: सुबह 09:39 बजे से शाम को 06:46 तक।


 


<strong><span style="color:#800000">3 मार्च को सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय:</span></strong>


सूर्यास्त: शाम 06:22 पर।


चंद्रोदय: शाम 06:21 पर।


 

2. सूतककाल के बाद 3 मार्च की रात्रि को होगा होलिका दहन:

भद्रा मुक्त प्रदोष काल ही होलिका दहन के लिए सबसे उत्तम और मंगलकारी माना गया है। शास्त्र स्पष्ट कहते हैं- &#039;भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा&#039; (अर्थात भद्रा में श्रावणी-राखी और फाल्गुनी-होली का दहन नहीं करना चाहिए)। 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का काल शाम 06:46 तक ही रहेगा। इसलिए कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 06:46 को सूतक काल समाप्त होने के बाद ही दहन किया जाना शुभ है।


 

3. रंगोंवाली होली अर्थात धुलेंडी का पर्व 4 मार्च को:

जनमानस की सुविधा और शुद्धि के लिए, अधिकांश विद्वान 3 मार्च को सूर्यास्त के बाद दहन और 4 मार्च को होली खेलने की सलाह दे रहे हैं। यदि आप पूरी तरह 'भद्रा मुक्त' पूजा करना चाहते हैं, तो 3 मार्च 2026 की शाम ही सबसे उपयुक्त है। पंचांगों में यह अंतर मुख्य रूप से 'भद्रा' की गणना और स्थान विशेष के सूर्यास्त समय के कारण आता है। अत: 3 मार्च को होलिका दहन करें और 4 मार्च को धुलंडी का पर्व मनाएं।

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