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होमताजा खबरentertainment‘सत्ता और तेल का खेल है’, ईरान-इजराइल तनाव पर खुशबू पाटनी की भारतीयों से अपील

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ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. फिल्मी सितारे भी ग्लोबल संकट पर खुलकर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं. अब दिशा पाटनी की बहन खुशबू पाटनी ने उन लोगों को आईना दिखाया है, जो इसे सिर्फ धर्म से जुड़कर देख रहे हैं. सोशल मीडिया पर बहस के बीच पूर्व सैन्यकर्मी खुशबू पाटनी ने देशवासियों से एकजुटता की अपील की है. उन्होंने साफ कहा कि यह कोई ‘धार्मिक युद्ध’ नहीं है, बल्कि पावर, सुरक्षा और तेल जैसे जटिल मुद्दों का खेल है. खुशबू ने लोगों से अपील की है कि वे भावनाओं में बहकर किसी दूसरे देश की राजनीति के लिए अपने ही देशवासियों से न लड़ें. उन्होंने जोर दिया कि जब तक भारत इस विवाद में सीधे शामिल नहीं है, हमें इसमें कूदने के बजाय शांति और अपने देश के हितों पर ध्यान देना चाहिए.

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'सत्ता और तेल का खेल है', ईरान-इजराइल तनाव पर खुशबू पाटनी की भारतीयों से अपीलZoom

खुशबू पाटनी, एक्ट्रेस दिशा पाटनी की बहन हैं.

नई दिल्ली: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने सोशल मीडिया पर एक नई जंग छेड़ दी है. भारतीय यूजर्स इस मुद्दे पर दो गुटों में बंट गए हैं और भारत के स्टैंड को लेकर आपस में ही भिड़ रहे हैं. इस गर्मागर्म बहस के बीच भारतीय सेना का हिस्सा रहीं खुशबू पाटनी ने देशवासियों से एक खास अपील की है. उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वे इस युद्ध को भावनाओं के चश्मे से देखना बंद करें. खुशबू का कहना है कि जब भारत इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल ही नहीं है, तो हमें सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से लड़ने या किसी भी पक्ष के लिए इमोशनल लेवल पर कूदने की कोई जरूरत नहीं है.

खुशबू पाटनी ने अपनी पोस्ट के जरिए एक बहुत कड़वा सच बयां किया है. उन्होंने साफ कहा कि लोग इसे ‘धर्म की लड़ाई’ समझकर आपस में लड़ रहे हैं, जबकि असलियत में यह धर्म का युद्ध है ही नहीं. यह पूरी लड़ाई पावर, नेशनल सिक्योरिटी और अपना दबदबा कायम करने का एक जटिल खेल है. उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय राजनीति यानी जियोपॉलिटिक्स में देशों के फैसले तेल, ग्लोबल गठबंधन और अपनी सीमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं. सोशल मीडिया पर इसे मजहबी रंग देकर पेश किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में यह सत्ता और प्रभाव की शतरंज है जिसे आम इंसान की समझ से परे रखा जाता है.

मुद्दे पर दो गुटों में बंटे लोग
खुशबू ने लोगों को आईना दिखाते हुए कहा कि ईरान हमारा देश नहीं है और किसी दूसरे देश की राजनीति के चक्कर में अपने ही देशवासियों से दुश्मनी मोल लेना सरासर नासमझी है. दरअसल, अली हुसैनी खामेनेई की मौत के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस तेज हो गई थी कि भारत ने अमेरिका के कड़े रुख का विरोध क्यों नहीं किया. हालांकि, भारत ने कंडोलेंस रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि भारत का रुख हमेशा की तरह शांति और कूटनीति का ही है. अंत में संदेश यही है कि हमें बाहरी विवादों के आधार पर अपने समाज की एकता को कमजोर नहीं करना चाहिए.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

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