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मुंबई. ‘बिग बॉस 19’ की रनरअप रहीं फरहाना भट्ट ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया. खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान हुई थी. उनकी मौत पर दुनियाभर और भारत में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. भारत के कई राज्यों में शिया मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों ने शोक मनाया. फरहाना ने कहा कि वह उनके दिलों में बसते हैं. इस पर हिना खान के पति रॉकी जयसवाल ने भी उनकी आलोचना की है.

फरहाना भट्ट ने इंस्टेंट बॉलीवुड के साथ बातचीत के दौरान खामनेई की मौत पर दुख जताया. उन्होंने कहा, “वो एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता. वो हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे और अल्लाह उनकी शहादत जरूर कबूल करे. कश्मीरी जितने भी लोग हैं, बहुत ही इस चीज से झुलस चुके हैं, दिल दहल चुका है सबका.”

फरहाना भट्ट ने आगे कहा, “आप यकीन नहीं करेंगे, सेहरी के बाद मैं बिल्कुल सोई नहीं हूं. आज मैंने नमाज पढ़ी तो मैं बहुत दुखी थी क्योंकि ये नहीं होना चाहिए था. काफी लोगों के लिए वो एक मसीहा थे. निश्चित रूप से, वो हमारे दिल में जिंदा रहेंगे.” फरहाना का यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है.

फरहाना भट्ट के इस बयान पर हिना खान के पति रॉकी जयसवाल ने कहा,”देश के प्रति वफादारी पहले आती है.चाहे आप जिस देश में रहते हैं, उस प्यार करो. या फिर जिस देश को प्यार करो, उसमें रहो. एक असली तानाशाह और तानाशाही को पसंद करना आसान है, वो भी तब जब आप सैंकड़ों किलोमीटर दूर एक लोकतांत्रिकत देश में पूरी स्वतंत्रता के साथ रहते हैं. “

रॉकी जयसवाल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा,”मुझे फर्क नहीं पड़ता कि आप निजी तौर पर किसका दुख मना रहे हो. अगर आप इसे पब्लिक में आकर कहते हैं तो आलोचना के लिए भी तैयार रिए. मैंने इस तरह का प्यार और आंसू खि भी भारतीय के लिए नहीं देखा. न सैनिकों के लिए, न अटैक से पीड़ितों के लिए, न सरकार के लिए और न ही पुलिस के लिए. यहां तक कि महान एपीजे अब्दुल कलाम के लिए. आप उन लोगों को धोखा देते हैं, जो आपकी रक्षा करते हैं. उन विदेशी लोगों की मौत का दुख मनाते हैं, जो हमेशा आपके देश के खिलाफ लड़े. “

फरहाना भट्ट के वायरल वीडियो पर एक यूजर ने लिखा, “फरहाना, मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूं कि कृपया ऐसे गंभीर मामलों पर बिना पूरी सच्चाई जाने टिप्पणी न करें. कई निर्दोष लोगों को तकलीफ हुई है और उनकी आवाज दबा दी गई है. कई युवा लड़कियों के साथ भी बर्बरता हुई है. ये धर्म का मामला नहीं है, ये इंसानियत का मामला है. कृपया सिर्फ ध्यान आकर्षित करने के लिए न बोलें, खासकर जब आप उन लोगों के संपर्क में नहीं हैं जो वास्तव में ईरान में पीड़ित हैं. जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ बोलें.” एक अन्य यूजर ने लिखा, “तो फिर वो बुर्का क्यों नहीं पहनती?”

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