दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे-आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने के चार दिन में 5.45 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की तुलना में मौजूदा मतदाता सूची में नाम, पता और अन्य विवरण में संशोधन कराने के लिए अधिक आवेदन आए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, 31 अगस्त से शुरू हुई दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में तीन सितंबर तक कुल 5,45,587 आवेदन मिले। इनमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए 2,25,586, मौजूदा प्रविष्टियों में संशोधन के लिए 2,67,032 और मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 51,589 दावे शामिल हैं। विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों से संबंधित 1,380 आवेदन भी प्राप्त हुए हैं।
संशोधन के लिए मिले आवेदन नए मतदाताओं के नाम जोड़ने से करीब 41 हजार अधिक हैं। निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, इस श्रेणी में मतदाता सूची में दर्ज नाम-पता या अन्य जानकारी में बदलाव के लिए आवेदन किया जाता है। शुरुआती आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में मतदाता मौजूदा रिकॉर्ड को दुरुस्त कराने की जरूरत महसूस कर रहे हैं।
जिलेवार आंकड़ों में नाम, पता और अन्य विवरण में संशोधन के लिए पूर्वी दिल्ली 33,466 आवेदनों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 33,147, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में 30,887, दक्षिणी दिल्ली में 26,650, पश्चिमी दिल्ली में 25,721 और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में 22,916 आवेदन मिले हैं।
नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के मामले में पश्चिमी दिल्ली 30,429 आवेदनों के साथ सबसे आगे है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में 26,157, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 25,669, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 22,959 और पूर्वी दिल्ली में 22,639 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
नाम हटाने के दावों में दक्षिण-पूर्व सबसे आगे : मतदाता सूची से नाम हटाने के दावों में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली 14,670 मामलों के साथ पहले स्थान पर है।
कई जगह एक-तिहाई से अधिक नाम बाहर
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान जिन विधानसभा क्षेत्रों में औसत मतदान 60 प्रतिशत से कम रहा था, उनमें से अधिकतर में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है।
आंकड़ों के मुताबिक, तुगलकाबाद में विधानसभा चुनाव में 55.80 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि एसआईआर में 47.85 प्रतिशत नाम बाहर हुए। आरके पुरम में 54.01 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 44.46 प्रतिशत, ओखला में 54.90 प्रतिशत के मुकाबले 45.32 प्रतिशत और कस्तूरबा नगर में 54.10 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 44.03 प्रतिशत नाम बाहर हुए। इसी तरह कालकाजी में 54.59 प्रतिशत मतदान और 42.80 प्रतिशत, महरौली में 53.04 प्रतिशत और 41.06 प्रतिशत, करोल बाग में 54.55 प्रतिशत और 40.42 प्रतिशत व मालवीय नगर में 53.04 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 38.65 प्रतिशत नाम बाहर हुए।
नई दिल्ली में 56.41 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि बाहर हुए नामों का प्रतिशत 41.76 रहा। जंगपुरा में 57.42 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 41.53 प्रतिशत, मॉडल टाउन में 53.40 प्रतिशत के मुकाबले 37.20 प्रतिशत, चांदनी चौक में 55.96 प्रतिशत के मुकाबले 38.99 प्रतिशत और वजीरपुर में 55.65 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 37.22 प्रतिशत नाम बाहर हुए। इसकी अगली कड़ी में ग्रेटर कैलाश में 54.50 प्रतिशत मतदान और 35.03 प्रतिशत, अंबेडकर नगर में 59.47 प्रतिशत और 39.53 प्रतिशत, संगम विहार में 60.80 प्रतिशत और 40.77 प्रतिशत, बुराड़ी में 59.48 प्रतिशत और 39.36 प्रतिशत व पटपड़गंज में 60.70 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 40.23 प्रतिशत नाम बाहर हुए।
रिठाला में 57.88 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 36.37 प्रतिशत, तिमारपुर में 55.90 प्रतिशत के मुकाबले 33.72 प्रतिशत, देवली में 59.57 प्रतिशत के मुकाबले 37.38 प्रतिशत और गांधी नगर में 61.01 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 38.54 प्रतिशत नाम बाहर हुए। हालांकि इन आंकड़ों से सीधे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कम मतदान और नाम कटने का आपस में कोई कारणात्मक संबंध है।
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