दिल्ली में रोजगार और आवास के बीच की दूरी कम करने के लिए मास्टर प्लान-2047 में आवास नीति को रोजगार केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। अब केवल नए आवासीय इलाकों के विकास के बजाय उन स्थानों के आसपास मकान उपलब्ध कराने की रणनीति अपनाई जा रही है, जहां बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर हैं। इसका उद्देश्य लंबी दूरी की रोजाना यात्रा को कम करना और कामगारों के समय व परिवहन खर्च में कमी लाना है।
मास्टर प्लान-2047 में औद्योगिक क्षेत्रों को केवल उत्पादन केंद्र न मानकर आधुनिक आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। नए औद्योगिक क्षेत्र और टाउनशिप में स्वच्छ उद्योग, व्यापार पार्क, तकनीकी पार्क, साइबर हब, ज्ञान केंद्र, अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा मीडिया-मनोरंजन जैसी गतिविधियां विकसित हो सकती हैं।
ऐसे में इन क्षेत्रों में काम करने वाली आबादी के लिए आवास की जरूरत भी बढ़ेगी। इसको देखते हुए औद्योगिक प्लॉट और औद्योगिक पार्कों में कामगारों के लिए किफायती किराये के आवास विकसित करने की अनुमति दी गई है। इनमें छोटे आवासीय परिसर से लेकर छात्रावास जैसी व्यवस्था तक शामिल हो सकती है।
कामगार आवास को मास्टर प्लान में अस्थायी या मौसमी रूप से काम करने वाले श्रमिकों के आवास के रूप में परिभाषित किया गया है। यह रोजगार स्थल के भीतर या बाहर हो सकता है और अलग आवासीय इकाइयों के साथ छात्रावास के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। यह सुविधा केवल औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी। सार्वजनिक भूमि पर औद्योगिक क्षेत्रों और शैक्षणिक केंद्रों जैसे बड़े रोजगार स्थलों के आसपास किफायती किराये के आवास विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
दिल्ली देहात के किसानों के साथ धोखा: राजीव
दिल्ली देहात मोर्चा के संस्थापक और जय किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव यादव ने मास्टर प्लान-2047 को दिल्ली देहात के 105 गांवों के किसानों के साथ धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि छह साल की देरी के बाद अधिसूचित मास्टर प्लान में किसानों की जरूरतों और मांगों को पर्याप्त जगह नहीं मिली है। यादव के मुताबिक लैंड पूलिंग और हरित पट्टी वाले 105 गांवों में फिरनी के बाहर ग्रामीणों के लिए आवास, रोजगार और स्मार्ट गांव विकसित करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने लाल डोरा विस्तार, आबादी की समस्या के स्थायी समाधान और भूमि अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। यादव ने टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत लैंड पूलिंग को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उन्होंने मांग की कि लैंड पूलिंग स्वैच्छिक रखी जाए और अनिवार्य प्रावधान हटाया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो मोर्चा सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ेगा।
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