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-नवयुग मार्केट से जिला मुख्यालय तक निकली यात्रा, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
-टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी उठी
-कई कर्मचारी संगठनों ने दिया समर्थन, सैकड़ों शिक्षक-कर्मचारी रहे मौजूद
-पुरानी पेंशन को बताया कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का आधार

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पुरानी पेंशन योजना की बहाली, लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर शुक्रवार को जिले में शिक्षकों और कर्मचारियों ने तिरंगा यात्रा निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। उत्तर प्रदेश अटेवा के आह्वान पर आयोजित ‘पुरानी पेंशन तिरंगा यात्रा’ नवयुग मार्केट से शुरू होकर जिला मुख्यालय तक पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। तिरंगा यात्रा के दौरान कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की। हाथों में तिरंगा लेकर निकले कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगें केवल कर्मचारियों के हित से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से भी संबंधित हैं।

यात्रा में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए मांगों के शीघ्र समाधान की अपील की। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2004 के बाद लागू नई पेंशन व्यवस्था तथा हाल में लाई गई एकीकृत पेंशन व्यवस्था से कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को निश्चित और सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाना जरूरी है। कर्मचारियों ने दावा किया कि देशभर में करीब एक करोड़ शिक्षक और कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा मिलना उनका अधिकार है। इसी मांग को लेकर संगठन द्वारा लगातार जनजागरूकता और आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों से टीईटी हटाने की मांग
तिरंगा यात्रा के दौरान वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे शिक्षकों पर दोबारा ऐसी अनिवार्यता लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उनका कहना है कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के अनुभव और सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े सरकारी संस्थानों का निजीकरण होने से आम जनता और युवाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।

कर्मचारी संगठनों ने दिया समर्थन
तिरंगा यात्रा को उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ, नर्सेस संघ, टीएससीटी उत्तर प्रदेश, विशेष बीटीसी संघ, नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन, लोक निर्माण विभाग नियमित वर्क चार्ज कर्मचारी संघ, राजकीय नर्सरी संघ, उत्तर प्रदेश ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ, दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन और बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन सहित विभिन्न संगठनों का समर्थन मिला। इस दौरान अटेवा के जिलाध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा, मंडल उपाध्यक्ष एसपी सिंह, जिला महामंत्री राम शेष वर्मा, जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार चौहान, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष अमित कुमार त्यागी, महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष आरती वर्मा, जिला महामंत्री मीनू शर्मा, जिला उपाध्यक्ष पूजा यादव,

जिला प्रवक्ता परमानंद पाठक, मीडिया प्रभारी मनोज रुहेला, डीपीए जिलाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, पीडब्ल्यूडी जिलाध्यक्ष राजेश शर्मा, जीडीए कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष श्रीचंद सारस्वत सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा अरुण मिश्रा, अमरीश अंबालिया, पारस गोस्वामी, अमिताभ पांडेय, संजय चौधरी, राजपाल यादव, गीता ढींगरा, सुभाष यादव, अनुराग यादव, हिमांशु गुप्ता, सुधा देवी, शालिनी, सीमा शर्मा, गीता, सुनीता और प्रमोद पांचाल समेत बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी यात्रा में शामिल हुए। ज्ञापन के माध्यम से संगठन प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से कर्मचारी हित और जनहित से जुड़ी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द उचित निर्णय लेने की अपील की। पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों के समाधान तक कर्मचारियों की आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठती रहेगी।

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