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-लापरवाही मिली है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई हो, लेकिन पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहनी चाहिए:  कुसुम मनोज गोयल
-गरीब मरीजों को उपचार में परेशानी न हो, अधिक से अधिक अच्छे अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की मांग

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। आयुष्मान भारत योजना के तहत गाजियाबाद के 21 अस्पतालों पर कार्रवाई किए जाने के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को पार्षद कुसुम मनोज गोयल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, जिसका लाभ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा है। ऐसे में अस्पतालों को योजना के पैनल से बाहर किए जाने की कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। पार्षद कुसुम मनोज गोयल ने कहा कि यदि किसी अस्पताल द्वारा आयुष्मान योजना के नियमों का उल्लंघन या मरीजों के उपचार में लापरवाही की गई है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संबंधित अस्पतालों की लापरवाही इतनी गंभीर थी तो उनके खिलाफ केवल पैनल से बाहर करने की कार्रवाई ही क्यों की गई।

उन्होंने कहा कि गंभीर अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार अन्य कठोर कार्रवाई भी की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई अस्पताल योजना के लाभार्थियों के साथ लापरवाही करने का साहस न करे। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि कार्रवाई के आधार, जांच प्रक्रिया और अस्पतालों को पैनल से बाहर करने के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। कुसुम मनोज गोयल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। गाजियाबाद में भी बड़ी संख्या में पात्र लोग इस योजना का लाभ लेते हैं। ऐसे में प्रमुख अस्पतालों के पैनल से बाहर होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में जाने में परेशानी हो सकती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि जिन अस्पतालों में नियमों का पालन हो रहा है, उन्हें योजना से जोडऩे की प्रक्रिया तेज की जाए। साथ ही जरूरत के अनुसार अधिक से अधिक अच्छे अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल में शामिल किया जाए, ताकि लाभार्थियों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा मिल सके। पार्षद ने आरोप लगाया कि अस्पतालों को पैनल से बाहर किए जाने की प्रक्रिया के पीछे किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि गरीबों के इलाज से जुड़ी योजना में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या मनमानी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे, इसके लिए शासन और प्रशासन को अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ व्यवस्था को और पारदर्शी बनाना चाहिए।

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