केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शहर की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में फ्लैट खरीदारों को फंसाए जाने पर जांच शुरू कर दी है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को पिछले हफ्ते लगातार चार दिन सीबीआई ने दिल्ली स्थित अपने दफ्तर में बुलाकर परियोजनाओं के बारे में कड़ी पूछताछ की। जांच एजेंसी ने आवंटन और पास हुए नक्शों से जुड़ी फाइलों को अपनी जांच में शामिल कर कब्जे में ले लिया है।
सूत्रों के मुताबिक इस जांच की शुरुआत सेक्टर-128 स्थित जेपी की क्यूब परियोजना से हुई। इसके बाद कड़ी जुड़ने पर अन्य परियोजनाएं भी जांच के दायरे में आईं जिनमें फ्लैट खरीदार परेशान हैं। सोमवार को फिर से प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारियों को सीबीआई दफ्तर में बुलाया जा सकता है। सीबीआई दफ्तर में जांच-पड़ताल से प्राधिकरण के ग्रुप हाउसिंग और नियोजन विभाग में बेचैनी की स्थिति है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जांच के दायरे में आई अधिकतर परियोजनाएं पुरानी हैं। इनमें कुछ का निर्माण 8-10 साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। सीबीआई ने जांच में ज्यादातर जानकारी नियोजन विभाग के कर्मचारियों से ही जुटाई है। जांच एजेंसी ने कई सख्त सवाल कर तत्कालीन अधिकारियों व नक्शा पास करने वालों की भूमिका को घेरा है।
इसके साथ ही मौजूदा समय में परियोजनाओं की स्थिति क्या है यह भी जानकारी ली है। फंसी हुई परियोजनाओं में सीबीआई के सवाल महज निर्माण तक ही नहीं सीमित है। यह भी पूछा गया है कि अगर नक्शा पास होने के बाद परियोजना वर्षों तक बीच में फंसी रहती है। फिर उसी पर बिल्डर निर्माण करवा देता है तब मजबूती का आकलन नक्शा पास करने वाला विभाग कैसे करता है।
इसी तरह अधिकारियों से यह भी पूछा गया कि क्या नक्शा पास करने से पहले बिल्डर फ्लैट बेच सकता है। सेक्टर-128 में क्यूब परियोजना का नक्शा 2013 में पास हुआ उस समय की जानकारी भी सीबीआई ने ली है। साथ ही जेपी के इस प्लॉट को लेकर जमीन प्राधिकरण रिकॉर्ड में कब चिह्नित हुई यह सवाल किया गया। इसी तरह द बेल्विडिर, सेक्टर-79, द आर्चर्ड, सेक्टर-131, सेक्टर-143 के ब्लूसम जेस्ट व अन्य परियोजनाओं को लेकर भी सवाल पूछे जाने की बात कही जा रही है।
बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई दफ्तर में प्राधिकरण अधिकारियों के साथ बैंक अधिकारियों को भी बुलाया गया था। इनसे परियोजना के साथ बैंक से लोन दिए जाने के बारे में जानकारी ली गई। यह पूछा गया कि बैंक ने क्या यह देखा कि खरीदार ने फ्लैट कब लिया है और प्राधिकरण ने परियोजना का नक्शा कब पास किया है। बैंक लोन की धनराशि बिल्डरों को दिए जाने के समय अनुपात के साथ अन्य जानकारियां भी ली गईं।
रेरा के गठन से पहले प्राधिकरण की भूमिका पर भी जांच
सीबीआई रेरा के 2016 में गठन और 2017 में प्रभावी होने से पहले प्राधिकरण की भूमिका पर भी जांच कर रहा है। प्राधिकरण की जिम्मेदारी महज प्लॉट देने और नक्शा पास करने तक ही सीमित थी या निगरानी भी शामिल थी। प्राधिकरण ने अगर किसी बिल्डर की मनमानी पर कार्रवाई की हो तो उससे जुड़े उदाहरण भी सवालों में पूछे जाने की सूचना है।
सीबीआई की तरफ से जांच में जो भी जानकारी मांगी जाती है प्राधिकरण उपलब्ध करवाता है। वहीं जिन प्रकरण में जानकारी के लिए बुलाया जाता है संबंधित विभाग से अधिकारी-कर्मचारी जाते हैं।
-कृष्ण करुणेश, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नोएडा प्राधिकरण
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



