दूध की इसी पूरी सप्लाई चेन को समझने के लिए न्यूज 18 की टीम पहुंची मुरादाबाद के अलग अलग इलाकों में पहुंची. मुरादाबाद के गांधी नगर इलाके में मनोज दूध सेंटर पर दूध की पूरी सप्लाई चेन को समझने की कोशिश की. किसानों से दूध किस कीमत पर खरीदा जाता है, उसकी जांच कैसे होती है और फिर यही दूध ग्राहक तक किस कीमत पर पहुंचता है.
रिपोर्टर : मनीष जी, सबसे पहले ये बताइए कि आपकी दुकान तक दूध कैसे पहुंचता है?
मनीष : हम किसानों से दूध खरीदते हैं. किसान दूध लेकर आते हैं, यहां दूध की जांच होती है और उसके बाद ही बिक्री की जाती है.
रिपोर्टर : किसानों से लगभग कितने रुपये लीटर दूध खरीदते हैं और ग्राहक को कितने में बेचते हैं?
मनीष : करीब 63 रुपये लीटर खरीदते हैं और 60 रुपये लीटर बिक्री करते हैं.
रिपोर्टर : दूध की जांच भी होती है?
मनीष : जी हां, मशीन से जांच होती है. इसके अलावा दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए दूसरे माध्यम भी हैं.
रिपोर्टर : आपके यहां प्रतिदिन लगभग कितना दूध आता है?
मनीष : करीब 600 लीटर.
रिपोर्टर : यानी अकेले इस एक सेंटर पर रोजाना करीब 600 लीटर दूध पहुंच रहा है. अब सवाल ये कि मुरादाबाद शहर में इस तरह की कितनी डेयरियां और दूध सेंटर हैं?
मनीष : छोटी-बड़ीमिलाकर करीब एक हजार से ज्यादा डेयरियां होंगी.
रिपोर्टर : यानी शहर में दूध की एक बड़ी सप्लाई चेन है, जिसमें ग्रामीण इलाकों के पशुपालक, दूध विक्रेता और डेयरियां शामिल हैं.
लेकिन अगला सवाल इससे भी बड़ा है. इसी दूध से बनने वाले पनीर, खोया, दही और मिठाइयों की मांग कैसे पूरी होती है?
रिपोर्टर : आप पनीर और खोया भी बनाते हैं?
मनीष : जी हां, अपना ही बनाते हैं. अगर दूध नहीं है तो हम वो उत्पाद नहीं बनाते.
रिपोर्टर : यानी बाहर से तैयार माल लाकर बेचने का काम नहीं?
मनीष : नहीं.
रिपोर्टर : आपके यहां पनीर, दही और खोया कितने रुपये किलो बिकता है?
मनीष : पनीर करीब 440 रुपये किलो, दही 110 रुपये किलो और खोया करीब 480 रुपये किलो.
रिपोर्टर : त्योहारों के समय जब मांग अचानक बढ़ जाती है, तब क्या होता है?
मनीष : बिक्री जरूर बढ़ती है, लेकिन हमारे यहां त्योहार पर हमेशा ज्यादा माल उपलब्ध हो, ऐसा नहीं है.
रिपोर्टर : नकली दूध को लेकर जो शिकायतें आती हैं, क्या कभी कोई पशुपालक नकली दूध लेकर आपके पास आया?
मनीष : इतने समय से दूध खरीद रहा हूं कि देखकर ही काफी हद तक पता चल जाता है. अगर दूध सही नहीं लगता तो वापस कर देते हैं.
रिपोर्टर : यानी इस दूध कारोबारी का दावा है कि उनके यहां आने वाला दूध स्थानीय पशुपालकों से आता है, उसकी जांच की जाती है और इसी दूध से पनीर, खोया और दही तैयार किया जाता है.
अब रुख करते हैं मुरादाबाद के एक और दूध कारोबारी का, जहां दूध के साथ-साथ दही और लस्सी की भी बिक्री होती है.
रिपोर्टर : सरकार की गाइडलाइन के बाद हम ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि दूध की उपलब्धता और बाजार में इसकी मांग के बीच आखिर संतुलन कैसे बनता है.
रिपोर्टर :आपका नाम?
दुकानदार : सरफराज हुसैन.
रिपोर्टर : आपका मुख्य कारोबार क्या है?
सरफराज : दूध का पुराना काम है. हम दूध और लस्सी बेचते हैं. हमारा दूध देहात से आता है.
रिपोर्टर : दूध कितने में खरीदते हैं और कितने में बेचते हैं?
सरफराज : करीब 58 से 60 रुपये लीटर खरीदते हैं और करीब 86 रुपये लीटर बेचते हैं.
रिपोर्टर : कभी ऐसा हुआ कि पशुपालक नकली दूध लेकर आया हो?
सरफराज : नहीं हमारा पुराना कारोबार है और हमारे दूध वाले भी पुराने हैं. सही दूध आता है। बना हुआ दूध हमारे यहां चलता भी नहीं है.
रिपोर्टर : दही की प्रतिदिन कितनी बिक्री होती है?
सरफराज : करीब 60 से 70 किलो दही रोजाना बिक जाता है. हमारा मुख्य काम लस्सी का है.
रिपोर्टर : शादी-ब्याह या त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ती है तो क्या करते हैं?
सरफराज : मांग तो बढ़ती है, लेकिन हम बड़े ऑर्डर नहीं लेते. हमारा काम सीमित है.
रिपोर्टर : दूध की कमी नहीं होती?
सरफराज : नहीं देहात में घर-घर पशुपालन का काम है. दूध की कमी नहीं है. सोशल मीडिया पर नकली दूध को लेकर बातें होती हैं, लेकिन हमारे यहां ऐसी समस्या नहीं है.
रिपोर्टर: मुरादाबाद में दूध की इस पूरी सप्लाई चेन को समझने के लिए हमने अलग-अलग दूध कारोबारियों से बात की. कारोबारियों का दावा है कि उनके यहां आने वाला दूध मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों से आता है. दूध की जांच के बाद ही उसे आगे बेचा जाता है और इसी दूध से दही, पनीर, खोया और दूसरे उत्पाद तैयार किए जाते हैं.
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. सरकारी आंकड़ों में दूध उत्पादन लाखों लीटर प्रतिदिन है, वहीं त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में दूध से बने उत्पादों की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि मुरादाबाद में कुल दूध उत्पादन, शहर की खपत और दूध से बनने वाले उत्पादों की वास्तविक मांग के बीच आखिर कितना अंतर है? क्या उपलब्ध दूध से ही पूरी मांग पूरी हो रही है या बाजार में बाहर से आने वाले दूध और दूध उत्पादों की भी बड़ी भूमिका है? इन सवालों का जवाब सिर्फ दावे से नहीं, बल्कि उत्पादन, खपत, सप्लाई और खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के आधिकारिक आंकड़ों से ही साफ होगा.
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