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IIT भुवनेश्वर और वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने मिलकर एक नया 2D मटेरियल खोजा है. यह 3 एटम मोटा FeCl3 मोनोलेयर मटेरियल है. इसमें i-wave अल्टरमैग्नेटिज्म जैसी खास प्रॉपर्टी पाई गई है. इस नई खोज से इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में बड़ी क्रांति आ सकती है. इसके इस्तेमाल से फ्यूचर में अल्ट्राफास्ट, कॉम्पैक्ट और कम पावर वाले गैजेट्स बनाए जा सकेंगे. यह रिसर्च नैनो लेटर्स जर्नल में पब्लिश हुई है.
IIT भुवनेश्वर के रिसर्चर्स का दावा: i-wave अल्टरमैग्नेटिज्म से बनेगी नेक्स्ट जेन टेक्नोलॉजी. (AI Photo)
नई दिल्ली: विज्ञान की दुनिया में अक्सर चमत्कार होते हैं. ये चमत्कार ही हमारे भविष्य की नींव रखते हैं. IIT भुवनेश्वर के रिसर्चर्स ने भी एक ऐसा ही चमत्कार किया है. अमेरिका की वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर उन्होंने एक नए 2D मटेरियल की भविष्यवाणी की है. यह कोई साधारण मटेरियल नहीं है. यह फ्यूचर के इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स को पूरी तरह से बदलने की ताकत रखता है. इस रिसर्च को फिजिक्स डिपार्टमेंट के फैकल्टी मनीष कुमार मोहंता ने लीड किया है. उनकी यह अहम रिसर्च नैनो लेटर्स नाम के मशहूर इंटरनेशनल जर्नल में पब्लिश हुई है. इस 2D मटेरियल का नाम FeCl3 मोनोलेयर है. इसमें एक बेहद दुर्लभ और खास i-wave अल्टरमैग्नेटिज्म देखा गया है.
आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा जादुई मटेरियल है जिससे भविष्य के डिवाइस बहुत तेज हो जाएंगे. वो जगह भी कम घेरेंगे और बैटरी की खपत भी ना के बराबर करेंगे. यह सब कैसे होगा, आइए इसे डिटेल में समझते हैं.
कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स में अल्टरमैग्नेटिज्म एक बड़ा रिसर्च टॉपिक बन चुका है. यह अपने अंदर साधारण मैग्नेट और एंटीफेरोमैग्नेट दोनों की खूबियां समेटे हुए है. साधारण मैग्नेट के उलट अल्टरमैग्नेटिक मटेरियल लगभग कोई भटकी हुई मैग्नेटिक फील्ड पैदा नहीं करते हैं.
इसका सीधा सा मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को एक-दूसरे के बेहद करीब रखा जा सकेगा. पार्ट्स पास रहने से कोई मैग्नेटिक रुकावट या इंटरफेरेंस भी नहीं होगा. इससे सर्किट बोर्ड्स बहुत छोटे और ज्यादा एफिशिएंट बन जाएंगे.
आजकल पूरी दुनिया में ऐसे कंप्यूटिंग सिस्टम की डिमांड है जो तेज हों और पावर भी कम लें. मनीष कुमार मोहंता ने कहा, ‘यह खोज अल्टरमैग्नेटिक मटेरियल्स की बढ़ती हुई फैमिली को और बड़ा करती है.’ इससे स्पीड, एफिशिएंसी और रिलायबिलिटी तीनों में सुधार देखने को मिलेगा.
भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल हाई-डेंसिटी मेमोरी और स्पिन-बेस्ड ट्रांजिस्टर्स में होगा. साथ ही यह टेराहर्ट्ज कम्युनिकेशन और क्वांटम इंफॉर्मेशन सिस्टम में भी बड़ा बदलाव ला सकती है. डाटा स्टोरेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हार्डवेयर और वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स में इसका बड़ा इम्पैक्ट देखने को मिलेगा.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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