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Air Marshal Awadhesh Kumar Bharti Retires: ऑपरेशन सिंदूर के प्रमुख हवाई चेहरों में शामिल एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने इंडियन एयरफोर्स में 39 साल की सेवा के बाद विदाई ली. जून 1987 में फ्लाइंग ब्रांच से करियर शुरू करने वाले भारती ने Su-30 फ्लीट से लेकर एयर हेडक्वार्टर और रणनीतिक कमांड तक कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशंस थे. भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में यह अभियान चलाया था. पाकिस्तान के कई सैन्य और आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई हुई. ऑपरेशन में केंद्रीय भूमिका के लिए भारती को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया. बाद में वह डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ बने.
ऑपरेशन सिंदूर के प्रमुख हवाई चेहरों में रहे एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती 39 साल की सेवा के बाद रिटायर हो गए. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: इंडियन एयरफोर्स के लिए करीब चार दशक तक आसमान में मोर्चा संभालने वाले एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती अब वर्दी में नजर नहीं आएंगे. ऑपरेशन सिंदूर के हवाई अभियान के प्रमुख चेहरों में रहे एयर मार्शल भारती ने 39 साल की शानदार सेवा के बाद वायुसेना से विदाई ले ली है. उनके करियर का सबसे चर्चित अध्याय ऑपरेशन सिंदूर रहा. इस ऑपरेशन में इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था. मुश्किल यह थी कि ऑपरेशन सिर्फ हमला करने तक सीमित नहीं था. हमले के साथ दुश्मन की हवाई कार्रवाई से निपटना भी उतना ही जरूरी था. एयर मार्शल भारती की भूमिका इसी पूरे हवाई अभियान की योजना और संचालन से जुड़ी रही.
TOI की रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के बाद एयर मार्शल भारती का नाम देशभर में चर्चा में आया. वह उस समय डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशंस के पद पर थे. भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में यह सैन्य अभियान शुरू किया था. इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के कई एयरबेस, रडार साइट्स, एयर डिफेंस हथियारों और आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. 10 मई को वायुसेना की मिसाइल कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से सीजफायर की पहल हुई. इस पूरे घटनाक्रम ने एयर मार्शल भारती के लंबे सैन्य करियर को एक निर्णायक अध्याय दिया. ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया.
39 साल पहले शुरू हुआ था सफर
एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती जून 1987 में इंडियन एयरफोर्स की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन हुए थे. शुरुआत से ही उन्होंने लड़ाकू विमान उड़ाने में अपनी अलग पहचान बनाई. वह डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के ग्रेजुएट और फाइटर कॉम्बैट लीडर रहे. करियर के शुरुआती दौर में उन्हें ऐसे समय में Su-30 फ्लीट की कमान से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलीं, जब यह विमान इंडियन एयरफोर्स के फ्रंटलाइन बेड़े में अपनी जगह बना रहा था.
बाद में वह नंबर 30 स्क्वाड्रन के फ्लाइट कमांडर और कमांडिंग ऑफिसर रहे. उनके कार्यकाल के दौरान Su-30MKI फेज III को ऑपरेशनल बनाने का काम हुआ. यह आसान दौर नहीं था. नए हथियार सिस्टम और तकनीक को पूरी तरह युद्ध के लिए तैयार करना बड़ी चुनौती थी. भारती की कमान में स्क्वाड्रन ने इन क्षमताओं को विकसित किया और बड़े सैन्य अभ्यासों में भी अपनी ताकत दिखाई.
गगन शक्ति से लेकर विदेशी अभ्यासों तक
एयर मार्शल भारती की कमान में इंडियन एयरफोर्स ने कई बड़े अभ्यासों में हिस्सा लिया. गगन शक्ति के अलावा ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के साथ इंद्रधनुष 2006 और फ्रांसीसी वायुसेना के साथ गरुड़ 2007 जैसे अभ्यास उनके करियर के अहम पड़ाव रहे. Su-30MKI की क्षमताओं को निखारने और नए हथियार सिस्टम के इस्तेमाल में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही. उनकी कमान को देखते हुए उन्हें वायु सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया.
ऑपरेशन सिंदूर बना करियर का सबसे बड़ा अध्याय
एयर मार्शल भारती को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा पहचान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली. वह उस समय डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशंस थे. इंडियन एयरफोर्स ने इस अभियान में आक्रामक और रक्षात्मक, दोनों तरह की हवाई क्षमताओं का इस्तेमाल किया. सटीक हमले, लंबी दूरी की मारक क्षमता और एकीकृत हवाई रक्षा व्यवस्था इस अभियान के प्रमुख हिस्से रहे. ऑपरेशन ने भारत की हवाई युद्ध क्षमता को लेकर एक बड़ा संदेश दिया. इस अभियान में उनकी केंद्रीय भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल दिया गया.
ऑपरेशन के बाद डिप्टी चीफ की जिम्मेदारी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद एयर मार्शल भारती को डिप्टी चीफ ऑफ द एयर स्टाफ की जिम्मेदारी मिली. यह पद वायुसेना की रणनीतिक और ऑपरेशनल तैयारियों में बेहद अहम माना जाता है. इससे पहले भी वह एयर हेडक्वार्टर, स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड और ईस्टर्न एयर कमांड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे. उन्होंने पुणे स्थित 2 विंग की कमान भी संभाली. बाद में सेंट्रल एयर कमांड में सीनियर एयर ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं.
अब विदाई, लेकिन विरासत रहेगी
एयर मार्शल भारती 70वें एनडीए कोर्स और 139वें पायलट कोर्स के ग्रेजुएट हैं. 39 साल की सेवा के बाद उनकी विदाई इंडियन एयरफोर्स के एक लंबे और महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है. एक फाइटर पायलट से लेकर शीर्ष ऑपरेशनल जिम्मेदारियों तक का उनका सफर कई पड़ावों से गुजरा. Su-30MKI के ऑपरेशनल इस्तेमाल से लेकर ऑपरेशन सिंदूर जैसे बड़े अभियान तक उनकी भूमिका रही. रिटायरमेंट के साथ उनकी सक्रिय सैन्य सेवा जरूर खत्म हुई है, लेकिन ऑपरेशनल सोच, रणनीतिक अनुभव और युद्धक तैयारियों से जुड़ी उनकी विरासत वायुसेना के लिए लंबे समय तक अहम बनी रह सकती है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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