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Ajinkya Rahane Retirement: अजिंक्य रहाणे बेहतरीन बैलेंस और फुटवर्क के मालिक थे. जिन्हें विदेशी पिचों पर बल्लेबाजी की कला आती थी. ऑफ स्टंप की गेंदों से निपटने में उनका कोई सानी न था. बैकफुट में तो उन्हें महारत ही हासिल थी. रहाणे का करियर वक्त से पहले ही खत्म हो गया. रहाणे जैसे बल्लेबाजों को टीम से बाहर करने का ही नतीजा है कि भारतीय टेस्ट टीम विदेश तो छोड़िए अपने ही घर में उनसे सीरीज हारने लगी, जिनकी बॉलिंग भी दोयम दर्जे की ही है.
अजिंक्य रहाणे का करियर वक्त से पहले ही खत्म हो गया.
तकनीकी मजबूत, दिमागी सुपर मजबूत
1988 में महाराष्ट्र के (अहिल्याबाई नगर) अहमदनगर में मधुकर रहाणे के घर पैदा हुए अजिंक्य ने बचपन में ही ठान लिया था कि उन्हें देश के लिए क्रिकेट खेलना है. मुंबई की ‘क्रिकेट फैक्ट्री’ से निकले रहाणे न तो विराट कोहली की तरह आक्रामक थे और न ही रोहित शर्मा की तरह विरोधी टीम पर दबाव बनाते थे, लेकिन उन्हें सबसे बुरे हालात में भी अपनी मजबूत तकनीक और शांत स्वभाव से मैदान मारना आता था. वह धोनी जैसे शांत थे और उनके पास द्रविड़ वाला धैर्य भी था. रहाणे जितने क्लासिकल बल्लेबाज थे, उतने ही खतरनाक हिटर और उससे भी खतरनाक लीडर!
अजिंक्य रहाणे का संन्यास.
धोनी की तरह शांत-द्रविड़ वाला धैर्य
क्रिकेट गेंद-बल्ले से ज्यादा दिमागी लड़ाई का खेल है. अच्छे से अच्छा बल्लेबाज अगर दबाव नहीं झेल पाएगा तो बिखर जाएगा, लेकिन रहाणे इसी टेंपरामेंट के मास्टर थे. अब जरा याद कीजिए 2020-21 में किया गया भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा. चार मैच की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का पहला मुकाबला. मेलबर्न में पिंक बॉल से खेले गए उस डे-नाइट टेस्ट में टीम इंडिया सिर्फ 36 रन पर सिमट गई थी. उसे इंडियन क्रिकेट हिस्ट्री का ब्लैक-डे कहा गया. इस शर्मनाक हार के बाद विराट कोहली टीम को मंझधार में छोड़कर भारत लौट गए क्योंकि वह पिता बनने वाले थे. टीम का मनोबल रसातल पर था. ऐसे में अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी संभाली फिर जो हुआ वो इतिहास है. भारत ने एक लगभग हारा हुआ मैच ड्रॉ करवाया और दो मैच जीतते हुए 2-1 से ट्रॉफी जीती. ये जीत अजिंक्य रहाणे के चमकते करियर में ध्रुव तारा का काम करेगी.
Ajinkya Rahane retirement: अपने शुरुआती रणजी सीजन में ही उन्होंने लगभग एक हजार रन बनाए.
भावनाओं पर काबू रखने वाला योद्धा
काम, क्रोध, ईर्ष्या से क्या कभी कोई इंसान बच पाया है. क्रिकेटर भी तो इंसान ही है. खिलाड़ियों में तो ये सारे अवगुण कूट-कूटकर भरे होते हैं, लेकिन रहाणे अपनी नब्ज पर काबू रखना जानते थे. बिलकुल धोनी की तरह. मैदान पर न तो कभी अत्यधिक जश्न मनाते नजर आए और न ही गुस्सा करते. हार-जीत दोनों ही स्थिति में उन्हें अपनी भावनाओं को कंट्रोल में रखना आता था. रहाणे की गिनती भारतीय क्रिकेट इतिहास के सर्वकालिक तकनीकी मजबूत बल्लेबाजों में होगी. विदेश में उनके रिकॉर्ड्स भारत से भी बेहतर थे. उनकी बल्लेबाजी में राहुल द्रविड़ जैसे क्लासिक टेस्ट बल्लेबाज की झलक दिखती थी. उन्हें खीर ठंडी करके खाना पसंद था. यानी अच्छी गेंदों को सम्मान देकर गेंदबाजों के हौसले पस्त करना और फिर उन्हें थकाकर कूटना!
Ajinkya Rahane retirement: एक भावुक वीडियो शेयर करते हुए रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहा.
वक्त से पहले खत्म हो गया करियर
इस बात में कोई दो राय नहीं कि अजिंक्य रहाणे जैसे बल्लेबाज में बड़ी मुश्किल से आते हैं, लेकिन मॉर्डन-डे क्रिकेट में वह फिट नहीं हो पाए. तेजी से रन बनाने का दबाव. हर गेंद पर चौके-छक्के लगाने का प्रेशर उनके करियर को प्रभावित कर गया. यही कारण था कि पहले वह टीम इंडिया की टी-20 प्लानिंग से बाहर हुए फिर वनडे फॉर्मट से. वह टेस्ट में बड़ी आसानी से 100 मैच खेल सकते थे, लेकिन अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में न बदल पाने के चलते सिलेक्टर्स ने यहां भी उनसे मुंह मोड़ लिया. अजिंक्य ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 इंटरनेशनल में क्रमश: 5077, 2962 और 375 रन बनाए.
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रे…
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