Image Slider

What is Kokila Vrat: कोकिला व्रत सनातन परंपरा में माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए रखे जाने वाले प्रमुख व्रतों में से एक है। यह व्रत मुख्य रूप से दक्षिण भारत और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से यह व्रत आषाढ़ मास की पूर्णिमा को रखा जाता है। ‘कोकिला’ का अर्थ होता है कोयल। इस दिन माता पार्वती के ‘कोकिला’ स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन, मनोवांछित वर की प्राप्ति तथा परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।ALSO READ: विजया पार्वती व्रत के दिन क्या करते हैं क्या है इसका महत्व और कथा
 

  • कोकिला व्रत क्यों किया जाता है?
  • कोकिला व्रत 2026 शुभ के मुहूर्त
  • पौराणिक व्रत कथा
  • कोकिला व्रत की मुख्य पूजा विधि
  • व्रत का महत्व

 

कोकिला व्रत क्या होता है, क्यों किया जाता है, इसकी पौराणिक कथा, पूजा विधि, नियम, महत्व और धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानें…

 

कोकिला व्रत क्यों किया जाता है?

कोकिला व्रत का नाम ‘कोकिला’ (कोयल) से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने एक समय कोयल का रूप धारण कर भगवान शिव की आराधना की थी। इसी घटना की स्मृति में यह व्रत किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत उत्तम पति की प्राप्ति, अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने के लिए किया जाता है। कुंवारी कन्याएं मनचाहा और योग्य वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत रखती हैं। और विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने के लिए यह व्रत रखती हैं।

 

 

कोकिला व्रत 2026 शुभ के मुहूर्त

कोकिला व्रत मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को

 

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 28 जुलाई, 2026 को 06:18 पी एम बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त- 29 जुलाई, 2026 को 08:05 पी एम बजे

कोकिला व्रत प्रदोष पूजा मुहूर्त- 07:15 पी एम से 09:20 पी एम

पूजा की कुल अवधि- 02 घण्टे 05 मिनट्स

 

पौराणिक व्रत कथा

कोकिला व्रत की कथा भगवान शिव और माता सती के प्रसंग से जुड़ी हुई है:

 

दक्ष प्रजापति का यज्ञ

 

माता सती का योगाग्नि में आत्मदाह

बिना बुलाए यज्ञ में पहुंचीं माता सती का उनके पिता ने अपमान किया और भगवान शिव के लिए कटु वचन कहे। अपने पति का अपमान सह न सकने के कारण सती ने यज्ञ कुंड की अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया।

 

शिव जी का श्राप

जब भगवान शिव को इस घटना का पता चला, तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। महादेव की आज्ञा के बिना यज्ञ में जाने और अपने प्राण त्यागने के कारण, शिव जी ने सती को श्राप दिया कि उन्हें 10,000 वर्षों तक नंदन वन में ‘कोयल’/ कोकिला का रूप धारण करके रहना पड़ेगा।

 

कोयल रूप में तपस्या

श्राप के प्रभाव से माता सती ने 10,000 वर्षों तक कोयल के रूप में भगवान शिव की अनन्य भक्ति और तपस्या की।

 

पार्वती रूप में पुनर्जन्म

तपस्या पूर्ण होने पर उनका श्राप समाप्त हुआ और उन्होंने हिमालय राज के घर माता पार्वती के रूप में जन्म लिया। इसके बाद उन्होंने कठोर तप करके पुनः भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया।

 

कोकिला व्रत की मुख्य पूजा विधि

पवित्र स्नान: आषाढ़ पूर्णिमा के दिन तड़के उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान किया जाता है।

 

मूर्ति निर्माण: इस दिन मिट्टी या जड़ी-बूटियों से कोयल की आकृति बनाई जाती है।

 

पूजन एवं श्रृंगार: उस कोयल रूपी प्रतिमा को लाल वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप और श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है।

 

शिव-पार्वती पूजन: माता पार्वती के साथ-साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया जाता है।

 

कथा एवं आरती: व्रत की कथा सुनी जाती है और अंत में आरती करके प्रसाद वितरित किया जाता है।

 

व्रत का महत्व

जिस रूप में माता सती ने कोयल बनकर शिव जी की भक्ति की थी, उसी ‘कोकिला’ स्वरूप की याद में यह व्रत रखा जाता है। कोकिला व्रत के धार्मिक एवं व्यावहारिक महत्व के अनुसार माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पति-पत्नी के बीच कभी वियोग नहीं होता और दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। यह व्रत वाणी में मधुरता लाता है अर्थात् जैसे कोयल की बोली मीठी होती है, वैसे ही यह व्रत साधक के व्यवहार और वाणी में मिठास और सौम्यता लाता है। अज्ञानता या भूलवश हुए अपराधों का प्रायश्चित करने के लिए यह व्रत अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Vijaya Parvati Vrat 2026: विजया पार्वती व्रत कब से होगा प्रारंभ, क्या है इस व्रत का महत्व

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||