Kanpur news: सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल की डॉ. आंचल दत्ता ने बताया कि कार्यशाला के लिए अस्पताल में चार से पांच विशेष मॉडल तैयार किए गए हैं. इन मॉडल्स पर देशभर से आए विशेषज्ञ इंडो वैस्कुलर तकनीक के हर चरण का प्रशिक्षण दे रहे हैं. इसमें एन्यूरिज्म का इलाज कैसे किया जाता है, स्ट्रोक के मरीजों में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और सर्जरी के दौरान किन तकनीकों का इस्तेमाल होता है, इसकी विस्तार से जानकारी दी जा रही है. इसका उद्देश्य डॉक्टरों को आधुनिक इलाज के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित करना है, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल सके.
10 साल पहले ज्यादा था खतरा, अब इलाज हुआ आसान
कार्यशाला में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि करीब 10 साल पहले ब्रेन की सर्जरी बेहद जोखिम भरी मानी जाती थी. मरीजों में पैरालिसिस और दूसरी गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक रहता था. लेकिन अब नेविगेशन, एंडोस्कोप और सबसे आधुनिक इंडो वैस्कुलर तकनीक की मदद से इलाज पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित हो गया है. इस तकनीक में मरीज के सिर को खोलने की जरूरत नहीं पड़ती. ठीक उसी तरह जैसे दिल की एंजियोग्राफी के जरिए ब्लॉकेज का पता लगाकर इलाज किया जाता है, वैसे ही ब्रेन की एंजियोग्राफी कर समस्या वाली जगह तक पहुंचा जाता है. जरूरत पड़ने पर खून के थक्के या एन्यूरिज्म का इलाज बेहद छोटे छेद के जरिए टाइटेनियम कॉइल जैसी आधुनिक तकनीक से किया जाता है.
मॉडल्स पर डॉक्टर सीख रहे नई तकनीक का हर पहलू
सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल की डॉ. आंचल दत्ता ने बताया कि कार्यशाला के लिए अस्पताल में चार से पांच विशेष मॉडल तैयार किए गए हैं. इन मॉडल्स पर देशभर से आए विशेषज्ञ इंडो वैस्कुलर तकनीक के हर चरण का प्रशिक्षण दे रहे हैं. इसमें एन्यूरिज्म का इलाज कैसे किया जाता है, स्ट्रोक के मरीजों में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और सर्जरी के दौरान किन तकनीकों का इस्तेमाल होता है, इसकी विस्तार से जानकारी दी जा रही है. इसका उद्देश्य डॉक्टरों को आधुनिक इलाज के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित करना है, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल सके.
जल्द सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में मिलेगी सुविधा
सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के प्रभारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही इंडो वैस्कुलर तकनीक से इलाज शुरू करने की तैयारी पूरी की जा रही है. इससे ब्रेन स्ट्रोक, एन्यूरिज्म और दूसरी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी. सबसे खास बात यह होगी कि मरीजों को अत्याधुनिक इलाज बहुत कम खर्च में उपलब्ध कराया जाएगा. इससे कानपुर और आसपास के जिलों के लोगों को बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और उन्हें अपने ही शहर में विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …
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