बचपन का जुनून और JEE के टॉपर
कोलकाता में जन्मे राजेश गोपाकुमार को बचपन से ही यह जानने की उत्सुकता रहती थी कि दुनिया और ब्रह्मांड कैसे काम करते हैं. वे केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं पढ़ते थे, बल्कि स्कूल के सिलेबस से बाहर जाकर विज्ञान और गणित की कठिन किताबों में रमे रहते थे. इसी गहरी समझ के दम पर उन्होंने 1987 की IIT JEE परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया था.
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दुनिया को दी ‘गोपाकुमार-वाफा डुअलिटी’
पीएचडी के बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में काम करते हुए उन्होंने प्रसिद्ध स्ट्रिंग थ्योरिस्ट कमरुन वाफा के साथ मिलकर शोध किया. दोनों ने ‘गोपाकुमार-वाफा डुअलिटी’ और ‘गोपाकुमार-वाफा इनवेरिएंट्स’ जैसे क्रांतिकारी सिद्धांतों की खोज की. ये सिद्धांत आज क्वांटम थ्योरी और ग्रैविटी के बीच के संबंधों को समझने में बेहद अहम माने जाते हैं. दुनियाभर के बड़े-बड़े संस्थानों में शोधकर्ता इनके सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं.
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कई सम्मानों से नवाजे गए हैं राजेश गोपाकुमार
विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक पुरस्कार ‘शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार’ (2009) सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया. राजेश गोपाकुमार की कहानी उन स्टूडेंट्स के लिए बहुत बड़ी सीख है, जो केवल सैलरी पैकेज या ट्रेंड के आधार पर अपना करियर चुनते हैं. उनके जीवन से सीख मिलती है कि अगर आप अपने पसंदीदा विषय में गहराई से उतरते हैं तो सफलता और ग्लोबल पहचान आपके कदम जरूर चूमती है.
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