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होमखेलक्रिकेटवैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे में ऐसा क्या किया जो इंग्लैंड में नहीं कर पाए?

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vaibhav sooryavanshi technique : इंग्लिश पिचों पर बाएं हाथ के ओपनर वैभव सूर्यवंशी शॉर्ट गेंदों के खिलाफ क्रीज में फंसे नजर आ रहे थे और गति के साथ लेंथ को भांपने में देरी कर रहे थे लेकिन ज़िम्बाब्वे में उनकी बल्लेबाजी में एक बिल्कुल नया और सुधरा हुआ दृष्टिकोण देखने को मिला. वैभव ने अपनी तकनीक में सुधार करते हुए बैकफुट पर वजन ट्रांसफर करना शुरू किया.

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जिम्बाब्वे दौरे से पहले वैभव सूर्यवंशी ने कैसे किया अपनी तकनीक में बदलाव?

नई दिल्ली. इंग्लैंड में जब पांचवें मैच में वैभव सूर्यवंशी को बताया गया कि वो इस मैच में नहीं खेल रहे है उसी समय से इस खब्बू बल्लेबाज ने तय कर लिया वो अब इस शॉर्ट-पिच गेंदो के भूत को और सिर पर चढ़ने नहीं देंगे. कुछ पहले राजस्तान रॉयल्स के बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने भी बताया था कि वो अपनी गलतियों का खुद ही आंकलन करते है और इंग्लैंड से जिम्बाब्वे पहुंचने के बीच जो भी समय वैभव को मिला उसमें उन्होंने अपने फुटवर्क और गेंद को छोड़ने पर खासा रिसर्च किया और फिर हरारे में जो हुआ वो पूरी दुनिया ने देखा.

वैभव सूर्यवंशी ने यह साबित कर दिया है कि उनके पास न सिर्फ बेहतरीन स्ट्रोकप्ले है, बल्कि एक मजबूत मानसिक कौशल भी है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने रहने के लिए सबसे जरूरी है. इंग्लैंड की मुश्किल परिस्थितियों में फंसा खिलाड़ी जब ज़िम्बाब्वे में आकर उसी कमजोरी को अपना हथियार बना लेता है, तो यह उनकी ‘सीखने की लालसा’ को सलाम करने का वक्त होता है. हरारे में दिखा वैभव का यह नया अवतार भारतीय क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य का एक शानदार ट्रेलर है.

फुटवर्क और मानसिक दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव

इंग्लिश पिचों पर बाएं हाथ के ओपनर वैभव सूर्यवंशी शॉर्ट गेंदों के खिलाफ क्रीज में फंसे नजर आ रहे थे और गति के साथ लेंथ को भांपने में देरी कर रहे थे लेकिन ज़िम्बाब्वे में उनकी बल्लेबाजी में एक बिल्कुल नया और सुधरा हुआ दृष्टिकोण देखने को मिला. वैभव ने अपनी तकनीक में सुधार करते हुए बैकफुट पर वजन ट्रांसफर करना शुरू किया. गति के खिलाफ समय हासिल करने के लिए वे क्रीज में थोड़ा गहरा खेलने लगे. पुल और हुक शॉट खेलते समय उनका सिर और शरीर का संतुलन इस बार बिल्कुल सटीक था.

मुजराबानी की पहली गेंद बदली हुई मानसिकता का सबूत

इस दौरे पर ज़िम्बाब्वे के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजराबानी के खिलाफ उनका सामना देखने लायक था. मुजराबानी की पहली ही तेजतर्रार शॉर्ट-पिच गेंद को जिस तरह वैभव ने पूरी सहजता के साथ छोड़ा (डक किया), वह यह बताने के लिए काफी था कि यह बल्लेबाज इंग्लैंड की गलतियों से कड़ा सबक सीखकर हरारे पहुंचा है. उस एक ‘लीव’ ने उनकी परिपक्वता को दर्शाया.उन्होंने जल्दबाजी दिखाने के बजाय गेंद की लेंथ और बाउंस को सम्मान दिया. यह इस बात का संकेत था कि वे केवल शॉट मारने नहीं, बल्कि क्रीज पर टिककर गेंदबाजों को थकाने के इरादे से उतरे हैं.

लेफ्ट-आर्म पेसर के खिलाफ क्लासिक छक्का

वैभव की इस बदली हुई बल्लेबाजी का सबसे शानदार पल तब आया, जब उन्होंने लेफ्ट-आर्म पेसर रिचर्ड नगरावा की शॉर्ट डिलीवरी पर मिडविकेट के ऊपर से एक दर्शनीय छक्का जड़ा. यह शॉट किसी ताकत के दम पर नहीं, बल्कि शुद्ध टाइमिंग और क्लास का नमूना था. उन्होंने खुद को गेंद की लाइन में लाया, रोल-ऑफ द रिस्ट (कलाई को मोड़ा) और गेंद को बाउंड्री के पार भेज दिया. यह छक्का केवल छह रनों के लिए नहीं था; यह उनके बढ़े हुए आत्मविश्वास और खेल को सीखने की अदम्य इच्छाशक्ति (विल टू लर्न) का सबसे बड़ा सबूत था.

गलती से सबक सबसे अहम 

क्रिकेट में प्रतिभा होना एक बात है, लेकिन अपनी गलतियों से सीखकर खुद को तुरंत ढाल लेना ही एक आम खिलाड़ी को चैंपियन बनाता है. भारतीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे की धरती पर कुछ ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है. कुछ ही समय पहले इंग्लैंड के दौरे पर जो वैभव शॉर्ट-पिच और तेज गति की गेंदों के सामने असहज नजर आ रहे थे, संघर्ष कर रहे थे, उन्होंने ज़िम्बाब्वे पहुंचते ही पासा पलट दिया. हरारे के मैदान पर उन्होंने विरोधी गेंदबाजों की शॉर्ट गेंदों को इस तरह धोया, मानो उन्होंने इंग्लैंड की विफलता को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाने का जरिया बना लिया हो.

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Rajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…

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