saba karim blamed gautam gambhir: पूर्व सेलेक्टर सबा करीम ने कोच और कप्तान की भूमिका को भी बराबर जिम्मेदार ठहराया. उनके अनुसार, कोच कप्तान के साथ मिलकर रणनीति और प्लेइंग XI बनाते है और फिर कैप्टन मैदान पर फैसले लेने के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम का माहौल भी तय करता है.
पूर्व सेलेक्टर सबा करीम ने हेड कोच गौतम गंभीर को ठहराया हार के लिए जिममेदार
न्यूज 18 हिंदी को दिए खास इंटरव्यू में सबा करीम ने बिना लाग-लपेट के कहा कि भारतीय टीम एक ही “टेम्पलेट” पर खेलने की जिद में फंस गई है. उनका मानना है कि वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम मैनेजमेंट को यह भ्रम हो गया कि वही रणनीति हर हालात में काम करेगी लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हालात, पिच और विपक्ष के हिसाब से खुद को ढालना जरूरी होता है, और यहीं भारत पिछड़ता नजर आया.
वर्ल्ड कप जीते तो खुद को खुदा समझ बैठे
सबा करीम ने कहा, “आप हर देश में, हर परिस्थिति में एक जैसा क्रिकेट नहीं खेल सकते. अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो हार तय है. उनके इस बयान में हाल के विदेशी दौरों में भारत के खराब प्रदर्शन की झलक साफ दिखाई देती है, जहां टीम न तो बल्लेबाजी में निरंतरता दिखा पाई और न ही गेंदबाजी में धार. सबसे बड़ा सवाल उन्होंने टीम के अंदर की पारदर्शिता पर उठाया. करीम के मुताबिक, “समस्या सिर्फ रणनीति की नहीं है, बल्कि कम्युनिकेशन की भी है. सामने कुछ और कहा जाता है और पीठ पीछे कुछ और किया जाता है, और यही टीम के माहौल को बिगाड़ रहा है. यह बयान सीधे तौर पर टीम मैनेजमेंट के अंदरूनी तालमेल पर सवाल खड़ा करता है.
ड्रेसिंग-रूम का माहौल कोच- कप्तान के हाथ में
सबा करीम ने कोच और कप्तान की भूमिका को भी बराबर जिम्मेदार ठहराया. उनके अनुसार, कोच कप्तान के साथ मिलकर रणनीति और प्लेइंग XI बनाते है और फिर कैप्टन मैदान पर फैसले लेने के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम का माहौल भी तय करता है. अगर कप्तान और कोच एक ही दिशा में नहीं सोचते, तो इसका असर सीधे टीम के प्रदर्शन पर पड़ता है. भारतीय टीम का गिरता ग्राफ सिर्फ आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास में भी नजर आ रहा है. जहां पहले टीम मुश्किल परिस्थितियों से मैच निकालने के लिए जानी जाती थी, वहीं अब दबाव में टूटती हुई दिखती है. करीम का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि लंबे समय से चली आ रही गलतियों का नतीजा है.
आखिर में उन्होंने साफ कहा कि अगर भारतीय टीम को फिर से पटरी पर लौटना है, तो उसे अपने रवैये में बदलाव लाना होगा. एक ही फॉर्मूले पर टिके रहने के बजाय परिस्थितियों के हिसाब से खेलना और टीम के अंदर पारदर्शिता बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है वरना वर्ल्ड कप की जीत सिर्फ एक याद बनकर रह जाएगी और टीम का गिरता ग्राफ चिंता का विषय बना रहेगा.
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