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होमताजा खबरधर्मकांवड़ उठाने पर जाने से पहले और बाद कांवड़िये को इन नियमों का पालन करना जरूरी

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Saaranpur News: गंगाजल उठाते वक्त भी कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना कांवड़ियों को जरूरी होता है. साथ ही यात्रा के दौरान भी कुछ सावधानियां कावड़ियों को रखनी होती है, जिससे कि उनकी कांवड़ खंडित ना हो. आइए पंडित जी से उन्हीं सावधानियों के बारे में जानते हैं.

सहारनपुर: कांवड़ यात्रा शुरू हो चुकी है और कांवड़ यात्रा को लेकर कांवड़िए कई तरह की लापरवाही करते हैं, जिसके कारण कांवड़ खंडित हो जाती है और उनकी यात्रा सफल नही हो पाती. अगर शिव भक्तों को अपनी कांवड़ यात्रा को पवित्र रूप से पूरा करना हैं, तो आज इस खबर में हम आपको बताएंगे कि कावड़ियों को कांवड़ उठाने से पहले और उठाने के बाद किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जिससे उनकी यात्रा पवित्र तरीके से पूरी हो सके.

जल उठाने से लेकर चढ़ाने तक सारे नियम
सबसे पहले बात आती है शुद्ध आचरण से कांवड़ यात्रा की जाती है. करोड़ों की संख्या में शिव भक्त कांवड़ यात्रा और गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार की ओर रुख करते हैं. वहां पर स्नान करते हैं और स्नान करने के बाद गंगाजल उठाकर अपने गंतव्य की ओर निकल पड़ते हैं. लेकिन गंगाजल उठाते वक्त भी कुछ नियम होते हैं, जिनको करना जरूरी होता है.

साथ ही यात्रा के दौरान भी कुछ सावधानियां कावड़ियों को रखनी होती है, जिससे कि उनकी कांवड़ खंडित ना हो. कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ खाने-पीने की चीजों का भी कांवड़ियों को विशेष रूप से ध्यान रखना होता है. उनमें क्या कुछ चीज शामिल होती है, उसको बता रहे हैं पंडित सोमप्रकाश शास्त्री.

शुभ मुहूर्त में ही घर से निकलना जरुरी
आचार्य सोमप्रकाश शास्त्री ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि सबसे पहले तो जब श्रावण मास प्रारंभ होता है, तो एक मुहूर्त के निमित्त ही शुद्ध आचरण से घर से निकला जाता है. कोशिश तो यह रखिए कि आप अपने साथ में बहुत कम सामान रखें और शुद्ध लग्न में आप घर से निकलिए. अब यहां पर कुछ बातें विशेष आती हैं. कुछ व्यक्ति हरिद्वार से कांवड़ उठाते हैं, कुछ गोमुख से, कोई गंगोत्री से उठाते हैं और कोई बद्रीनाथ जी से भी उठाते हैं. वह अपने-अपने समय के अनुसार उस जल की परिधि को नाप करके चलते हैं. सबसे पहले हरिद्वार की ही बात करें, तो हरिद्वार से जब कांवड़िया जल लेकर चलते हैं, प्रातः काल स्नान करके 4:00 के आसपास अपनी पूजा, संध्या, वंदन करके और अपने कांवड़ में जल भरकर उस कांवड़ की पूजा करके शिव में मान करके व्यक्ति चलता है.

इन खाने की चीजों का रखना होता है ध्यान
पंडित जी ने कहा कि अब बात आती है मार्ग में क्या कुछ ध्यान रखना चाहिए. सबसे बड़ी बात तो यह है कि कांवड़िए को किसी का दिया हुआ अन्न नहीं खाना चाहिए. मैं मानता हूं शिविर लगाते हैं, वह प्रसाद के लिए है, लेकिन कांवड़ियां कोशिश करें कि उसे अवॉयड करें. अपने धन से ही उस कांवड़ यात्रा में भोजन को ग्रहण करें. दूसरी बात अगर एक साथ एक व्यक्ति और होगा, तो कांवड़िया शुद्ध आचरण से अच्छे से चल पाएगा. अगर कही मलमूत्र लगता है तो उस कांवड़िये को स्नान करना होता है. स्नान करने के पश्चात वह फिर कांवड़िया जल को लेकर चलता है और अपने स्थान पर पहुंचता है.

जल चढ़ाने के समय बहुत से कांवड़िये जल्दीबाजी में जल चढ़ाते हैं. मैं कहता हूं लग्न निकलता है, तो ढाई घंटे का आप प्रयास करिए कि आपका जो जल है, वह शुद्ध तरीके से चढ़े. उसको आप धीरे-धीरे भगवान शिव को अर्पण करें. ऐसा ना हो जल को फेंक दिया और कार्य को पूर्ण किया.

नशीली चीजों से रहें दूर
साथ ही विशेष बात ये है कि इसमें मद्यपान, धूम्रपान, बीड़ी, सिगरेट आदि करना निषेध है. बहुत से कांवड़िये कहते हैं कि अरे भगवान शिव ने तो भांग धतूरा ग्रहण किया था, लेकिन आप भगवान शिव नहीं हो, आप भगवान शिव भक्त हो. आप भगवान शिव का प्रसाद लेकर चले हो. कांवड़ स्वरूप में तो जो इस प्रकार के कर्म जो सिगरेट पीता हो या भांग खाता हो, इस सबको छोड़कर चलें तो ज्यादा अच्छा होगा. इससे भक्त भगवान शिव के समीप ज्यादा रहता है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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