उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश अब चिंता का विषय बन गई है.
- देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है. उत्तर भारत में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लगातार बादलों की आवाजाही बनी हुई है. पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बारिश का दौर तेज हो रहा है. दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रभाव से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, इससे लोगों को भीषण गर्मी और लू से राहत मिली है. हालांकि लगातार बारिश के कारण शहरी इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है.
- समुद्री इलाकों में भी स्थिति सामान्य नहीं है. बंगाल की खाड़ी में सक्रिय वेदर सिस्टम के कारण समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं. मौसम विभाग ने मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है. तेज हवाओं के कारण तटीय इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी आशंका है. वहीं पहाड़ी राज्यों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को मौसम अपडेट देखकर ही सफर करने की सलाह दी गई है.
दिल्ली-NCR में तेज बारिश के साथ आंधी देगी गर्मी से राहत
दिल्ली-एनसीआर में 4 जुलाई को भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के अनुसार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी, जिससे तापमान में गिरावट आएगी. अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. हालांकि तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना भी जताई गई है.
उत्तर प्रदेश में 90 KM की रफ्तार से तूफान का खतरा
उत्तर प्रदेश में मानसून सबसे आक्रामक रूप में दिखाई दे सकता है. मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और देवरिया समेत कई जिलों में भारी बारिश और 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. बिजली गिरने और जलभराव की आशंका भी बनी हुई है. लखनऊ में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है, लेकिन बारिश के बाद मौसम काफी सुहावना होने की उम्मीद है.
बिहार में बारिश और वज्रपात दोनों से सतर्क रहने की जरूरत
बिहार के पश्चिमी और उत्तरी जिलों में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश का अनुमान है. पटना, गया, वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और भागलपुर सहित कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश होगी. मौसम विभाग ने 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली हवा और वज्रपात की चेतावनी भी दी है. किसानों और खुले मैदान में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
झारखंड में तेज हवा और मूसलाधार बारिश का डबल अटैक
झारखंड में मानसून पूरी ताकत से सक्रिय है. रांची, बोकारो, दुमका, साहेबगंज, गिरिडीह, देवघर, जमशेदपुर और हजारीबाग समेत कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है. कुछ स्थानों पर 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. मौसम विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
पंजाब और हरियाणा में मानसून के सक्रिय होने के साथ मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है.
पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी का असर, कई जिलों में भारी बारिश
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल पर देखने को मिलेगा. कोलकाता, हावड़ा, मुर्शिदाबाद, जलपाईगुड़ी, कालिम्पोंग, कूचबिहार, मालदा और बीरभूम में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और मछुआरों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.
राजस्थान में पूर्वी इलाकों में मेघों का प्रहार, तेज हवाओं से बढ़ेगी चुनौती
मध्य प्रदेश में लो-प्रेशर सिस्टम का सबसे ज्यादा असर, कई जिलों में भारी बारिश
बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र का सीधा असर मध्य प्रदेश पर भी दिखाई देगा. शिवपुरी, सागर, रायसेन, विदिशा, कटनी, होशंगाबाद, खंडवा, मंदसौर, नीमच और आगर-मालवा सहित कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान है. मौसम विभाग ने 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है. लगातार बारिश से नदियों और छोटे बांधों का जलस्तर बढ़ सकता है. भोपाल में अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है.
पंजाब-हरियाणा में गर्मी पर ब्रेक, लेकिन आंधी बढ़ाएगी मुश्किलें
- पंजाब और हरियाणा में मानसून के सक्रिय होने के साथ मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है. पंजाब के लुधियाना, अमृतसर, बठिंडा, फरीदकोट, पठानकोट, जालंधर, संगरूर और गुरदासपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. वहीं हरियाणा के कई हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने 45 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है.
- बारिश से तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस तथा गर्मी से राहत मिलेगी. हालांकि तेज हवा के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने, पेड़ गिरने और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी.
राजस्थान में मानसून अब धीरे-धीरे पूरे प्रदेश पर अपनी पकड़ मजबूत करता दिखाई दे रहा है.
पहाड़ों पर लैंडस्लाइड का सबसे बड़ा खतरा
- उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश अब चिंता का विषय बन गई है. नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की संभावना है. चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही यात्रा करने को कहा गया है. देहरादून में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.
- हिमाचल प्रदेश में मंडी, कुल्लू, शिमला, चंबा, सिरमौर, सोलन और किन्नौर जैसे जिलों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है. कई स्थानों पर भूस्खलन और सड़कें बंद होने की आशंका है. 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवा भी चल सकती है. मनाली और आसपास के पर्यटन स्थलों पर जाने वाले पर्यटकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है.
- जम्मू-कश्मीर के जम्मू, उधमपुर, कठुआ, राजौरी, पुंछ, डोडा, गांदरबल और बारामूला सहित कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना है. लगातार वर्षा के कारण पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ सकता है. श्रीनगर में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है.
महाराष्ट्र के तटीय जिलों में रेड अलर्ट जैसी स्थिति
महाराष्ट्र में पालघर, ठाणे, मुंबई, रत्नागिरी, सतारा, कोल्हापुर, नागपुर, यवतमाल और गोंदिया सहित कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. अरब सागर से आने वाली नमी और सक्रिय मानसून के कारण तटीय क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश होने की संभावना है. कई जगहों पर 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. मुंबई में पूरे दिन रुक-रुक कर तेज बारिश होने का अनुमान है, जिससे लोकल ट्रेन और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है.
पूर्वोत्तर भारत में लगातार बरस रहे बादल, नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका
पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा में अगले कई दिनों तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है. कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है. मौसम विभाग ने बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की है. वहीं ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों पर भी बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र का प्रभाव लगातार बना रहेगा.
बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर एरिया आखिर क्या होता है?
लो-प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र वह स्थिति होती है, जहां वायुदाब आसपास के इलाकों की तुलना में कम हो जाता है. समुद्र से बड़ी मात्रा में नमी इसी क्षेत्र की ओर खिंचती है. यदि यह प्रणाली मजबूत होती है तो भारी बारिश, तेज हवाएं और कई बार चक्रवाती तूफान जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं. मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में बनने वाले ऐसे सिस्टम मध्य, पूर्वी और उत्तर भारत में व्यापक बारिश के सबसे बड़े कारण माने जाते हैं.
बारिश के दौरान बिजली गिरने से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
गरज-चमक के समय खुले मैदान, खेत, नदी या तालाब के किनारे और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़ा होने से बचना चाहिए. मोबाइल चार्जिंग, बिजली के उपकरणों और खुले बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें. यदि आप बाहर हैं तो किसी मजबूत इमारत या वाहन के अंदर शरण लें. मौसम विभाग की चेतावनी मिलने पर अनावश्यक यात्रा टालना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है.
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश सबसे ज्यादा खतरा क्यों पैदा करती है?
लगातार बारिश से पहाड़ों की मिट्टी कमजोर हो जाती है. इससे चट्टानें खिसकने और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं. कई बार सड़कें बंद हो जाती हैं और नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ जाता है. इसलिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में मानसून के दौरान यात्रा से पहले मौसम और प्रशासन की एडवाइजरी जरूर देखनी चाहिए.
क्या तेज मानसून का खेती पर हमेशा सकारात्मक असर पड़ता है?
नहीं. सामान्य और संतुलित बारिश खेती के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन अत्यधिक बारिश फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है. खेतों में जलभराव होने से धान, सब्जियों और दलहनी फसलों पर असर पड़ता है. वहीं तेज हवा और ओलावृष्टि से खड़ी फसलें गिर सकती हैं. इसलिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य की योजना बनानी चाहिए.
मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से क्यों लेना चाहिए?
मौसम विभाग सैटेलाइट, रडार और आधुनिक मौसम मॉडल के आधार पर पूर्वानुमान जारी करता है. रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट लोगों को संभावित खतरे के प्रति पहले से आगाह करने के लिए होते हैं. समय रहते सतर्क रहने से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. खासकर मछुआरों, किसानों, पर्वतीय यात्रियों और शहरों में रहने वाले लोगों के लिए ये चेतावनियां बेहद महत्वपूर्ण होती हैं.
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