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अमरनाथ में बनने वाले पवित्र शिवलिंग का आकार 4 फीट रह गया है। 23 मई को BSF के जवानों ने जो तस्वीर जारी की थी, उसमें शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट था।
29 जून को प्रथम पूजा के दिन भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी। 3 जुलाई को सामने आई तस्वीर में हिमलिंग महज 4 फीट का दिखाई दे रहा है। इसकी चौड़ाई भी घट गई है।
यात्रा का शनिवार को दूसरा दिन है। पहले दिन 12 हजार यात्रियों ने अमरनाथ गुफा में दर्शन किए हैं। दूसरा जत्था आज पहुंचेगा, जबकि तीसरा जत्था भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो गया है।
पहले 2 तस्वीरें देखिए…
अमरनाथ की पवित्र गुफा में बने बर्फ का शिवलिंग के पहले दर्शन सुरक्षा में तैनात जवानों ने किए। वीडियो भी उन्होंने ने ही जारी किया था।
29 जून को जम्मू कश्मीर के LG मनोज सिन्हा ने पवित्र गुफा में प्रथम पूजा की थी। तस्वीर उसी दौरान ली गई थी।
आइस स्टैलेग्माइट हैं अमरनाथ के बाबा बर्फानी
अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में जमीन से खनिज जमा होकर स्टैलेग्माइट बनते हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा में छत से टपकने वाला पानी जमकर बर्फ का शिवलिंग बनाता है। इसका आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग होता है। यही इसकी सबसे अनोखी विशेषता है।
शिवलिंग इसलिए तेजी से घट रहा है क्योंकि गुफा में बढ़ती मानवीय और प्राकृतिक गतिविधियों से मौसम गर्म हो रहा है। ऊपर से टपकने वाला पानी पहले की तरह जम नहीं पा रहा है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने अमरनाथ यात्रियों को दिलाए 5 संकल्प
इधर, यात्रा के पहले दिन यात्रियों के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने एक पत्र लिखा है, जो शुक्रवार को यात्रियों को भी दिया गया। इसमें तीर्थयात्रा को महान सौभाग्य बताते हुए तीर्थयात्रियों से 5 संकल्प लेने को अपील की गई है।
- यात्रा मार्ग साफ रखेंगे। प्राकृतिक सुंदरता संरक्षित करेंगे।
- सुरक्षा निर्देशों, यात्रा सलाहों का पालन करेंगे।
- ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल के तहत जम्मू-कश्मीर के प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देंगे।
- यात्रा से लौटने के बाद एक पौधा लगाएंगे।
- यात्रा में एकता, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देंगे।
रजिस्ट्रेशन वाली डेट से पहले एंट्री नहीं
जम्मू प्रशासन ने कहा है कि रजिस्टर्ड तारीख से पहले पहुंचने वाले यात्रियों को यात्रा की इजाजत नहीं दी जाएगी। बिना रजिस्ट्रेशन आने वाले यात्रियों को तत्काल सुविधा देना संभव नहीं है।
यात्रा के 2 रूट, एक 48km लंबा लेकिन सरल, दूसरा 14km का लेकिन कठिन चढ़ाई
अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल से है। यात्रा 28 अगस्त को खत्म होगी।
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