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-आग से बचाव के इंतजाम कागजों तक सीमित

शेरसिंह डागर

नूंह।

लखनऊ में हाल ही में कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर दिया। हादसे में कई छात्रों की जान चली गई, जबकि दर्जनों को अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगानी पड़ी। इस घटना ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के अनेक निजी स्कूल, कोचिंग सेंटर और शिक्षण संस्थान ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां आग लगने की स्थिति में छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है। कई संस्थानों में फायर सेफ्टी उपकरण केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं, जबकि कुछ जगहों पर फायर एनओसी लेने के बाद वर्षों तक सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा तक नहीं होती। हालत यह है जिले में 900 सरकारी स्कूल है जबकि 240 प्राइवेट स्कूल तथा 133 मदरसा चल रहे हैं इनके अलावा आईटीआई, पॉलिटेक्निक कॉलेज व निजी कोचिंग सेंटर भी हैं। निजी कोचिंग सेंटरों का कोई विवरण शिक्षा विभाग के पास नहीं है।

क्या कहते हैं नियम :

हरियाणा में अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रावधान मुख्य रूप से हरियाणा फायर एण्ड इमरजेंसी सर्विस एक्ट 2022 और राष्ट्रीय भवन संहिता के तहत लागू हैं। कानून का उद्देश्य भवनों में आग की रोकथाम और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है।

स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के लिए प्रमुख प्रावधान : फायर एनओसी अनिवार्य स्कूलों, अस्पतालों, होटल, व्यावसायिक भवनों तथा बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने वाले संस्थानों के लिए फायर एनओसी आवश्यक है। फायर विभाग यह सुनिश्चित करता है कि भवन में आग से बचाव के मानक पूरे किए गए हैं।

– पर्याप्त निकासी मार्ग प्रत्येक मंजिल पर सुरक्षित और स्पष्ट आपातकालीन निकास होना चाहिए। सीढ़ियां अवरोध मुक्त हों तथा आपदा के समय बड़ी संख्या में लोगों की निकासी संभव हो।

. अग्निशमन उपकरण भवन में पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, होज रील और पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।

. विद्युत सुरक्षा ओवरलोडिंग, खुले तार और असुरक्षित बिजली कनेक्शन आग लगने के प्रमुख कारण माने जाते हैं। संस्थानों को समय-समय पर विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराना आवश्यक है।

– मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में निकासी प्रक्रिया की जानकारी दी जानी चाहिए तथा नियमित मॉक ड्रिल आयोजित होनी चाहिए।

– फायर सेफ्टी सिस्टम का रखरखाव केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। उनकी नियमित जांच, रिफिलिंग और कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है।

जमीनी हकीकत क्या है?

जिले में संचालित कई कोचिंग सेंटर संकरी गलियों और कई मंजिला इमारतों में चल रहे हैं। इनमें से अनेक भवनों में न तो पर्याप्त निकासी मार्ग हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। कई जगह अग्निशमन यंत्र केवल दीवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं।

पूर्व में हरियाणा के रेवाड़ी में भी यह मुद्दा उठ चुका है, जहां शिकायत की गई थी कि कई कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुरूप अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे थे तथा भवनों में सुरक्षित निकासी मार्ग तक नहीं थे।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फायर एनओसी जारी होने के बाद नियमित निरीक्षण की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। कई संस्थान केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर प्रमाणपत्र हासिल कर लेते हैं, जबकि वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था अधूरी रहती है।

शिक्षा विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी :

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फायर विभाग पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, नगर परिषद और फायर विभाग को संयुक्त रूप से स्कूलों व कोचिंग सेंटरों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए।

तत्काल उठाए जाने वाले कदम :

जिले के सभी निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों का फायर सेफ्टी ऑडिट।

-फायर एनओसी और उसकी वैधता की सार्वजनिक जांच।

-आपातकालीन निकासी मार्गों का भौतिक सत्यापन।

-प्रत्येक संस्थान में वार्षिक मॉक ड्रिल अनिवार्य।

-अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच।

-नियमों का उल्लंघन करने वाले

संस्थानों पर दंडात्मक कार्रवाई।

बड़ा सवाल :

लखनऊ की घटना ने दिखा दिया कि लापरवाही की कीमत बच्चों की जिंदगी से चुकानी पड़ सकती है। यदि हरियाणा के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा मानकों की समय रहते समीक्षा नहीं हुई तो किसी भी हादसे के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग के पास केवल अफसोस जताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा या फिर अभी से सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविक पड़ताल शुरू करेगा?

सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के ढांचे पर एक नजर :

सरकारी स्कूल

प्राइमरी स्कूल – 499

मिडिल स्कूल – 257

हाई स्कूल – 07

सीनियर सेकेंडरी – 127

आरोही मॉडल स्कूल – 05

कस्तूरबा गांधी बालिका- 05

जिले में प्राइवेट स्कूल पर नजर :

प्राइमरी स्कूल – 19

मिडिल स्कूल – 103

हाई स्कूल – 55

सीनियर सेकेंडरी- 63

मदरसा। -133

प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने से पहले सभी मापदंड पूरे कराए जाते हैं। आगजनी से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र तथा अन्य उपकरण होने जरूरी है। एक जुलाई से स्कूल खुल रहे हैं, इन तमाम सेफ्टी पॉइंट्स को ध्यान में रखकर चेकिंग की जाएगी। गड़बड़ या नियमों के अनदेखी पर कार्रवाई होगी। इसलिए प्राइवेट स्कूल विशेष ध्यान दें। कोचिंग सेंटर उनके अंतर्गत नहीं आते, लेकिन उन्हें भी ध्यान रखना होगा।-राजेन्द्र शर्मा, डीईओ नूंह

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