छतरपुर के गौरिहार कृषि विभाग में पदस्थ कृषि विस्तार अधिकारी धर्मेंद्र सिंह राजपूत बताते हैं कि खरीफ फसल की बोवनी के लिए हर साल किसान भाइयों को मूंग-उड़द, अरहर, तिल, मूंगफली और सोयाबीन का बीज दिया जाता है. जिससे किसान भाइयों को मुफ्त में ही बीज मिल जाता है.
छतरपुर के गौरिहार कृषि विभाग में पदस्थ कृषि विस्तार अधिकारी धर्मेंद्र सिंह राजपूत बताते हैं कि खरीफ फसल की बोवनी के लिए हर साल किसान भाइयों को मूंग-उड़द, अरहर, तिल, मूंगफली और सोयाबीन का बीज दिया जाता है. जिससे किसान भाइयों को मुफ्त में ही बीज मिल जाता है.
4 किलो से 20 किलो बीज निःशुल्क
धर्मेंद्र बताते हैं कि किसान भाइयों को 2 से 3 योजनाओं के तहत बीज वितरित किया जाता है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन ( National Food Security) NFSM के तहत दलहनी फसलों का बीज वितरित किया जाता है. इसके लिए किसान भाइयों को NFSM पोर्टल में आवेदन करना होता है. किसान भाइयों को बीज की मिनी किट प्रदान की जाती है. इस मिनी किट में 4 किलो बीज निःशुल्क दिया जाता है. किसान भाइयों को 20 किग्रा बीज भी वितरित किया जाता है. हालांकि, इसके लिए किसान भाइयों के पास 1 हेक्टेयर भूमि होनी जरूरी है. साथ में फसलों के लिए दवाइयां भी शासन देता है. फिलहाल मूंगफली का एफपीओ का वितरण भी होने लगा है. धर्मेंद्र बताते हैं कि चयनित किसानों की लिस्ट और बैंक अकाउंट की जानकारी सत्यापित होने के बाद DBT के माध्यम से सब्सिडी की राशि सीधे अकाउंट में भेजी जाती है.
बीज के साथ मिलेंगी ये जैविक दवाएं
धर्मेंद्र बताते हैं कि किसानों को केवल बीज ही नहीं बल्कि फसल और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न जैविक उत्पाद भी उपलब्ध कराए जाते हैं.
अन्य कल्चर: आवश्यकता अनुसार एजोटोबैक्टर और एजोस्पिरिलम कल्चर
मिट्टी उपचार सामग्री: ट्राइकोडर्मा जैसी जैविक दवाएं, जो मिट्टी में लगने वाली फफूंद और दीमक जैसे कीटों से बचाव में प्रभावी मानी जाती हैं.
ये हैं जरूरी दस्तावेज
धर्मेंद्र बताते हैं कि किसान भाइयों के पास फार्मर आईडी, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर जरूरी है.
यदि आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या सहकारी समिति में जल्द से जल्द संपर्क करें क्योंकि बीजों का वितरण निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर “पहले आओ पहले पाओ” या लॉटरी पद्धति से किया जाता है
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