-25 जून को श्रद्धा और संयम के साथ करें निर्जला एकादशी व्रत, भगवान विष्णु की आराधना से खुलेंगे सुख-समृद्धि के द्वार
-दान, जप, स्नान और सात्विक जीवन का है विशेष महत्व, नियमों के पालन से मिलेगा अक्षय पुण्य
-तुलसी, चावल और दिन में निद्रा को लेकर बरतें विशेष सावधानी, भूलवश भी न करें ये गलतियां
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। इस वर्ष यह पावन व्रत 25 जून को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे वर्ष सभी एकादशी व्रत नहीं रख पाते, यदि वे केवल निर्जला एकादशी का विधि-विधान से पालन करें तो उन्हें वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है और इसके माध्यम से सुख, समृद्धि, आरोग्य तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। श्री शिव हनुमत धाम कष्ट निवारण धाम एवं श्री पार्थ कृष्णम ज्योतिष, वास्तु एवं कर्मकांड केंद्र, ग्रीन सिटी बी-2, छपरौला के अध्यक्ष आचार्य पंडित श्री मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया कि निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा, दान और भगवान विष्णु के प्रति पूर्ण समर्पण का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि इस दिन श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक किया गया व्रत जीवन के अनेक कष्टों का निवारण करता है तथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आचार्य मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून की रात्रि 8:09 बजे प्रारंभ होकर 25 जून की रात्रि 9:14 बजे तक रहेगी। व्रत और पूजन के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:05 बजे से 4:45 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त 11:56 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त इस दिन प्रात: 5:25 बजे से शाम 4:29 बजे तक रवि योग का भी विशेष संयोग बन रहा है, जिसे पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। उन्होंने बताया कि व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए। पूजा में धूप, दीप, पुष्प, पीले फल, पीले मिष्ठान तथा तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। भगवान विष्णु को तुलसी युक्त खीर का भोग लगाने के बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप तथा भगवान की आरती करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो श्रद्धालु मौन रहकर मंत्र जाप करें, जिससे साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि निर्जला एकादशी पर जल, मटका, छाता, फल, अन्न, वस्त्र तथा जरूरतमंदों को शीतल पेय पदार्थों का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही भगवान विष्णु को तुलसी की माला और बांसुरी अर्पित करने से भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को इस दिन कुछ विशेष सावधानियां बरतने की भी सलाह दी। उनके अनुसार निर्जला एकादशी के दिन चावल का सेवन पूर्णत: वर्जित माना गया है। साथ ही लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा तथा अन्य तामसिक पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। क्रोध, झूठ, कटु वचन, विवाद और किसी भी प्रकार के अपमानजनक व्यवहार से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसी प्रवृत्तियां व्रत के पुण्य को प्रभावित करती हैं। आचार्य मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है।
इसलिए एकादशी के दिन तुलसी के पौधे पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही तुलसी के पत्ते तोडऩे चाहिए। यदि पूजा के लिए तुलसी दल की आवश्यकता हो तो उसे एक दिन पूर्व ही तोड़ लेना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो जमीन पर गिरे स्वच्छ पत्तों को धोकर पूजा में उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्जला एकादशी के दिन दिन में सोना भी वर्जित माना गया है। श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक समय भगवान विष्णु के ध्यान, भजन, सत्संग, मंत्र जाप और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में व्यतीत करना चाहिए। यदि अवसर मिले तो किसी पवित्र नदी या तीर्थस्थल पर स्नान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। आचार्य पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री ने कहा कि निर्जला एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और भगवान के प्रति समर्पण का महापर्व है। जो श्रद्धालु श्रद्धा, नियम और पूर्ण विश्वास के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है तथा भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा सदैव बनी रहती है।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



