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गोंडा में महिला किसान गिरिजा देवी बताती है कि एसआरआई विधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कम उम्र की पौध का रोपण किया जाता है. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाती है, जिससे उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और पोषण मिलता है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनकी बढ़वार भी अच्छी होती है. गिरिजा देवी का कहना है कि इस विधि से नर्सरी तैयार करने के बाद खेत में रोपाई करने पर पौधे तेजी से विकसित होते हैं.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को भी अपना रहे हैं. इसी कड़ी में एक महिला किसान एसआरआई (सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन) विधि से धान की नर्सरी तैयार कर रही है. इस तकनीक को धान की खेती के लिए काफी लाभदायक माना जाता है, क्योंकि इसमें कम बीज, कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहती है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील महिला किसान गिरिजा देवी ने बताया कि पहले वह सामान्य तरीके से धान की नर्सरी तैयार करते थे. जिसमें अधिक बीज और ज्यादा खर्च लगता था. लेकिन कृषि विभाग और पानी संस्थान की सलाह पर उन्होंने एसआरआई विधि अपनाई. इस तकनीक से नर्सरी तैयार करने में बीज की मात्रा काफी कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है.
कम उम्र के पौधों का किया जाता है रोपण
गिरिजा देवी बताती है कि एसआरआई विधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कम उम्र की पौध का रोपण किया जाता है. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाती है, जिससे उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और पोषण मिलता है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनकी बढ़वार भी अच्छी होती है. गिरिजा देवी का कहना है कि इस विधि से नर्सरी तैयार करने के बाद खेत में रोपाई करने पर पौधे तेजी से विकसित होते हैं. साथ ही पानी की जरूरत भी पारंपरिक खेती की तुलना में कम पड़ती है. इससे सिंचाई पर होने वाला खर्च भी घट जाता है.
गिरिजा देवी के अनुसार एसआरआई तकनीक धान उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है. इस विधि में कम बीज का उपयोग होने के बावजूद अधिक संख्या में कल्ले निकलते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है. इसके अलावा खेत में खरपतवार प्रबंधन और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग भी संभव हो पाता है. बढ़ती खेती लागत के बीच एसआरआई विधि किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है. इससे न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि पानी और संसाधनों की भी बचत होती है. यदि अन्य किसान भी इस तकनीक को अपनाएं तो धान की खेती अधिक लाभदायक बन सकती है. कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण एसआरआई विधि धीरे-धीरे किसानों के बीच लोकप्रिय होती जा रही है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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