<strong>Friday Santoshi Mata Vrat Puja Vidhi: </strong>हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन धन, सुख-समृद्धि और संतोष की देवी मानी जाने वाली मां संतोषी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतोषी माता को सुख, शांति, संतोष और वैभव की देवी माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/which-goddess-or-god-is-friday-dedicated-to-126052900016_1.html" target="_blank">शुक्रवार किस देवी या देवता का दिन होता है, क्या करना चाहिए इस दिन?</a></strong><br />
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वैसे तो माता की पूजा किसी भी दिन की जा सकती है, लेकिन शुक्रवार का दिन संतोषी माता की आराधना के लिए विशेष रूप से समर्पित है। मान्यता है कि जो व्यक्ति लगातार 16 शुक्रवार संतोषी माता का व्रत और पूजा पूरी श्रद्धा से करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
आइए जानते हैं शुक्रवार को मां संतोषी की पूजा विधि, नियम और इसके महत्व के बारे में।
1. संतोषी माता पूजा की सरल विधि
शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद नीचे दी गई विधि से पूजा करें:
<strong>चौकी की स्थापना:</strong> घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूजा घर में एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर संतोषी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
<strong>कलश स्थापना: </strong>माता के चित्र के सामने एक जल भरा पात्र या तांबे अथवा मिट्टी के कलश में जल भरकर रखें। कलश के ऊपर एक कटोरी में गुड़ और भुने हुए चने रखें।
<strong>दीप-धूप:</strong> माता के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं।
<strong>अक्षत और रोली:</strong> देवी मां को रोली, अक्षत, लाल फूल, और चुनरी अर्पित करें।
<strong>कथा और आरती: </strong>हाथ में थोड़ा सा गुड़ और चना लेकर संतोषी माता की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कथा समाप्त होने के बाद माता की आरती करें।
<strong>प्रसाद वितरण: </strong>पूजा समाप्त होने के बाद कलश के ऊपर रखे गुड़-चने का प्रसाद सभी में बांट दें और कलश के जल को पूरे घर में छिड़क दें। बचा हुआ जल तुलसी के पौधे में डाल दें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/friday-remedies-for-financial-prosperity-126020500007_1.html" target="_blank">शुक्रवार के खास 5 उपाय, धन संबंधी परेशानी करेंगे दूर</a></strong>
संतोषी माता व्रत का महत्व
मां संतोषी का नाम ही संतोष का प्रतीक है। जैसा कि माता का नाम है 'संतोषी', इस व्रत को करने से इंसान के भीतर लालच और असंतोष खत्म होता है और मानसिक शांति मिलती है। इस व्रत से घर में चल रहे गृह क्लेश, आर्थिक तंगी और विवाह में आ रही बाधाएं माता की कृपा से दूर हो जाती हैं। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, संतान की सुख-समृद्धि और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत विशेष रूप से रखती हैं।<br />
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ऐसा माना जाता है कि माता अपने भक्तों को धैर्य, संतुष्टि और सकारात्मक सोच का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। शुक्रवार के दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
<strong>विशेष टिप: </strong>इस दिन व्रत करने वालों के परिवारजन भोजन में कोई खट्टी चीज, अचार और खट्टा फल न ही खाएं और ना ही खट्टी चीजों को स्पर्श करें। सिर्फ गुड़ और चने का प्रसाद खाना चाहिए।
जय मां संतोषी!
मां संतोषी का शुक्रवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतोष, धैर्य और सकारात्मक सोच विकसित करने का एक आध्यात्मिक मार्ग है। श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया यह व्रत भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
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