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Sikar Hindi News: सीकर नगर परिषद ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक अभिनव पहल शुरू की है. इस योजना के तहत मंदिरों और धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूलों के कचरे का पुनर्चक्रण कर धूपबत्ती और अगरबत्ती का निर्माण किया जाएगा. आमतौर पर पूजा के बाद फेंके जाने वाले फूल पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनते हैं, लेकिन अब इन्हें उपयोगी उत्पादों में बदलकर “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को साकार किया जाएगा. इस पहल से न केवल कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. नगर परिषद का मानना है कि इससे शहर में स्वच्छता बेहतर होगी और लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी.

Sikar News: सीकर नगर परिषद ने शहर में बढ़ रही फूलों के कचरे की समस्या के समाधान के लिए एक नई और पर्यावरण अनुकूल पहल शुरू की है. अब बाजारों और फूल मंडियों से निकलने वाले फूलों के कचरे का उपयोग धूप और अगरबत्ती बनाने में किया जाएगा. इस योजना से जहां कचरे का बेहतर निस्तारण होगा, वहीं इससे उपयोगी उत्पाद तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा.

नगर परिषद ने शहरी क्षेत्र से फूलों का कचरा एकत्रित करने के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था की है. यह वाहन प्रतिदिन शाम के समय बाजारों और फूल मंडियों से बचे हुए फूलों और अन्य जैविक कचरे को एकत्र कर कचरा निस्तारण प्लांट तक पहुंचाता है. इससे सार्वजनिक स्थानों पर फैले कचरे की समस्या कम होगी और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

परिषद ने इस परियोजना के लिए करीब 1.50 लाख रुपये की लागत से धूप निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है. अधिकारियों के अनुसार धूप बनाने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है और जल्द ही इसका नियमित उत्पादन शुरू होगा. इस पहल से कचरे को संसाधन में बदलने का उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे अन्य निकायों को भी प्रेरणा मिल सकती है.

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नगर परिषद का अगला लक्ष्य फूलों के कचरे से अगरबत्ती तैयार करना है. अधिकारियों ने बताया कि इसी महीने के दौरान अगरबत्ती निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा. इससे फूलों के कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा और नगर परिषद को अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने में भी सहायता मिल सकती है.

विभाग के अनुसार फूलों का कचरा लंबे समय से एक बड़ी समस्या बना हुआ था. विशेष रूप से फूल मंडियों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में फूल खराब हो जाते हैं या उपयोग के बाद फेंक दिए जाते हैं। ऐसे कचरे के कारण दुर्गंध, गंदगी और अन्य स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। नई योजना इन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

नानी गांव स्थित प्लांट में इस परियोजना को संचालित किया जाएगा स्थानीय लोगों का कहना है कि घंटाघर स्थित फूल मंडी में दूर-दराज क्षेत्रों से व्यापारी और ग्राहक बड़ी मात्रा में फूलों की खरीदारी करने आते हैं. मंडी सुबह से लेकर लगभग 10 से 11 बजे तक सक्रिय रहती है, लेकिन उसके बाद बड़ी मात्रा में फूलों का कचरा वहीं पड़ा रह जाता है, जिससे आसपास का वातावरण प्रभावित होता है.

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने बताया कि फूलों के कचरे के कारण आवारा पशु भी बड़ी संख्या में मंडी क्षेत्र में पहुंच जाते हैं. कुछ व्यापारी स्वयं कचरा हटाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. नगर परिषद के जेईएन सुरेन्द्र गोदारा ने बताया कि अब फूलों का कचरा नियमित रूप से प्लांट तक पहुंचाया जाएगा और उससे धूप बनाई जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि घंटाघर की फूल मंडी में जाम की समस्या को देखते हुए व्यापारियों को आवश्यक नियमों की पालना के लिए पाबंद किया जाएगा, ताकि स्वच्छता और यातायात व्यवस्था दोनों बेहतर बन सकें.

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