Image Slider

Last Updated:

British Era Buildings in Gorakhpur: धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में मशहूर गोरखपुर अपने सीने में ब्रिटिश काल का भी एक अनोखा इतिहास समेटे हुए है. यहां की ऐतिहासिक इमारतों, चर्च और सदियों पुराने शिक्षण संस्थानों में आज भी अंग्रेजी शासनकाल की वास्तुकला साफ झलकती है. सम्राट जॉर्ज पंचम के सम्मान में रखे गए कॉलेज के नाम से लेकर अंग्रेजों के ‘नील भवन’ और 150 साल पुराने भव्य चर्च तक, गोरखपुर की गलियों में इतिहास आज भी जिंदा है. आइए जानते हैं गोरखपुर में मौजूद ब्रिटिश दौर की इन खास विरासतों की पूरी कहानी.

गोरखपुर: जिले को आमतौर पर धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान वाले शहर के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस शहर की गलियों और ऐतिहासिक इमारतों में ब्रिटिश काल की कई ऐसी यादें भी मौजूद हैं जो आज भी इतिहास को जीवंत बनाए हुए हैं. शहर में कई शिक्षण संस्थान, चर्च और पुरानी इमारतें ऐसी हैं जिनकी नींव अंग्रेजी शासन के दौरान रखी गई थी और जिनकी वास्तुकला आज भी लोगों को आकर्षित करती है.

सेंट एंड्रयूज़ कॉलेज, अंग्रेजी वास्तुकला 
गोरखपुर में मौजूद ऐतिहासिक इमारतों के बारे में बताते हुए गोरखपुर यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में कार्यरत इतिहासकार प्रज्ञा चतुर्वेदी ने बताया कि गोरखपुर का प्रसिद्ध सेंट एंड्रयूज कॉलेज ब्रिटिश काल की शैक्षणिक विरासत का प्रमुख उदाहरण माना जाता है. कॉलेज की इमारतों की बनावट, ऊंची छतें, मेहराबदार बरामदे और विशाल परिसर अंग्रेजी शैली की झलक पेश करते हैं. इतिहासकारों के अनुसार इस संस्थान की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी और आज भी इसकी मूल संरचना काफी हद तक सुरक्षित है.

इस्लामिया कॉलेज के नाम से जुड़ा रोचक इतिहास
गोरखपुर शहर का इस्लामिया भी अपने इतिहास के लिए जाना जाता है. कॉलेज के पुराने अभिलेख और प्रिंसिपल मुख्तार अहमद बताते हैं कि, इसका नाम कभी मियां साहब जॉर्ज इस्लामिया कॉलेज हुआ करता था. बताया जाता है कि ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम के भारत आगमन के समय उनके सम्मान में यह नाम रखा गया था. समय के साथ नाम में बदलाव हुआ, लेकिन संस्थान की कई पुरानी इमारतें आज भी उस दौर की कहानी बयां करती हैं.

कभी था अंग्रेजों का नील भवन 
इस्लामिया कॉलेज परिसर और उसके आसपास कुछ ऐसी पुरानी इमारतों का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें स्थानीय लोग “नील भवन” के नाम से जानते हैं. माना जाता है कि, ब्रिटिश काल में इन भवनों का संबंध नील व्यापार से था. उस समय पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में नील की खेती और व्यापार अंग्रेजी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था.

150 साल पुराना चर्च भी है शान 
गोरखपुर में कई पुराने चर्च भी मौजूद हैं, जिनका इतिहास 19वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है. इन चर्चों की रंगीन कांच की खिड़कियां, वह घंटाघर और यूरोपीय शैली की वास्तुकला आज भी लोगों को आकर्षित करती है. क्रिसमस के दौरान इन चर्चों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और शहर की बहुसांस्कृतिक विरासत को महसूस करते हैं.

इतिहासकार बताते हैं कि 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जब रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, तब गोरखपुर प्रशासनिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन गया. अंग्रेजों ने यहां शिक्षा, परिवहन और प्रशासन से जुड़ी कई इमारतों का निर्माण कराया, यही वजह है कि आज भी शहर के कई हिस्सों में ब्रिटिश काल की वास्तुकला और संस्कृति की झलक आसानी से देखी जा सकती है.

About the Author

authorimg

Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||