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क्या आपने कभी सोचा है कि साल का एक दिन ऐसा भी आता है जब सूरज डूबने का नाम ही नहीं लेता और रातें पलक झपकते ही बीत जाती हैं? जी हां, 21 जून वही तारीख है, जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में 'ग्रीष्म अयनकाल' (Summer Solstice) या ग्रीष्मकालीन अयनान्त कहा जाता है। इस दिन की शुरुआत और अंत का समय कुछ ऐसा होता है।

 
  • सूर्योदय: सुबह 05:24 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 07:22 बजे
 

क्यों होता है यह खगोलीय चमत्कार?

21 जून को दिन का इतना लंबा और रात का सबसे छोटा होना कोई जादुई घटना नहीं, बल्कि हमारी पृथ्वी की अनोखी चाल का परिणाम है। इसके पीछे मुख्य रूप से दो वैज्ञानिक कारण काम करते हैं:


 

1. पृथ्वी का तिरछा मिजाज (Axial Tilt)

हमारी पृथ्वी अंतरिक्ष में बिल्कुल सीधी खड़ी होकर नहीं घूमती। यह अपनी कक्षा के तल से लगभग 23.5° (23 डिग्री 26 मिनट) झुकी हुई है। पृथ्वी का यही झुकाव दुनिया में मौसम बदलने और दिन-रात की अवधि में अंतर आने की मुख्य वजह है।


 

2. सूर्य से उत्तरी गोलार्ध की नजदीकी

अपनी वार्षिक परिक्रमा के दौरान, 21 जून के आसपास पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) सूर्य की तरफ सबसे ज्यादा झुका होता है। इस समय सूर्य की किरणें सीधे कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर लंबवत (vertical) पड़ती हैं। चूंकि कर्क रेखा भारत के बीच से गुजरती है, इसलिए हमारे यहाँ इसका सीधा असर दिखता है।


 

3. आसमान में सूरज का लंबा सफर

इस दौरान सूर्य आकाश में अपने उच्चतम बिंदु पर होता है और पूरब से पश्चिम की ओर जाते समय एक बहुत लंबा चाप (arc) बनाता है। सीधी किरणें और लंबा रास्ता होने के कारण सूरज ज्यादा समय तक क्षितिज के ऊपर टिका रहता है। यही वजह है कि भारत सहित उत्तरी गोलार्ध के देशों में इस दिन धूप का समय लगभग 13.5 से 14 घंटे तक का होता है।


 

भूगोल का खेल: एक तरफ दिन, दूसरी तरफ रात

पृथ्वी के इस झुकाव का असर दुनिया के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग तरीके से देखने को मिलता है:


उत्तरी छोर पर 'आधी रात का सूरज': भूमध्य रेखा से आप जितना उत्तर की ओर (जैसे आर्कटिक वृत्त के पास) जाएंगे, दिन उतने ही लंबे होते जाएंगे। वहां कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां 24 घंटे सूर्य गायब ही नहीं होता, जिसे 'मिडनाइट सन' (Midnight Sun) कहते हैं।


<strong>दक्षिणी गोलार्ध का विपरीत हाल: </strong>ठीक इसी समय, पृथ्वी का दक्षिणी हिस्सा (Southern Hemisphere) सूर्य से दूर झुका होता है। इसलिए 21 जून को वहां &#039;शीतकालीन संक्रांति&#039; (Winter Solstice) होती है, यानी वहां साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है।


 

जून बनाम दिसंबर: भ्रम दूर करने का आसान तरीका

अयनकाल साल में दो बार आता है। किसी भी भ्रम से बचने के लिए वैज्ञानिक इन्हें जून अयनकाल (उत्तरी) और दिसंबर अयनकाल (दक्षिणी) के नाम से बुलाते हैं:


<strong>जून अयनकाल (20 या 21 जून): </strong>इस समय भारत, यूके, यूएसए, कनाडा, रूस और चीन जैसे देशों में भीषण गर्मी होती है और यह साल का सबसे लंबा दिन होता है। इसके विपरीत ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, चिली, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में इस समय कड़ाके की ठंड होती है और यह साल का सबसे छोटा दिन होता है।


<strong>दिसंबर अयनकाल (21 या 22 दिसंबर): </strong>इस समय स्थिति पूरी तरह उलट जाती है। भारत सहित उत्तरी देशों में कड़ाके की ठंड के साथ साल का सबसे छोटा दिन होता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में गर्मी की शुरुआत के साथ साल का सबसे लंबा दिन होता है।


 

भारतीय ज्योतिष विज्ञान का दृष्टिकोण

सनातन और हिंदू ज्योतिष विज्ञान में इस खगोलीय घटना का एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है:


<strong>उष्णकटिबंधीय दक्षिणायन: </strong>ज्योतिष में ग्रीष्म अयनकाल को उष्णकटिबंधीय दक्षिणायन के रूप में पहचाना जाता है।

असुरकाल की शुरुआत: माना जाता है कि निरयण दक्षिणायन का आरंभ 'कर्क संक्रांति' से होता है। इसी दिन से सूर्य देव दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू करते हैं और 'असुरकाल' का प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस काल को नए या शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। 

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