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नीट परीक्षा की वजह से सरकार ने टेलीग्राम एप पर बैन लगा रखा है. इस पर द‍िल्‍ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. टेलीग्राम की ओर से दावा क‍िया जा रहा है क‍ि उन्‍हें सरकार की ओर से इमरजेंसी र‍िक्‍वेस्‍ट म‍िली थी, लेकिन यह इमरजेंसी थी या नहीं, इसका फैसला अथॉर‍िटी करेगी. उसका वक्‍त हमें म‍िलना चाह‍िए था. इसके बाद सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि बैन का फैसला क्यों लिया गया. केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है. इसमें आरोप लगाया गया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल कई तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए तेजी से हो रहा है. इनमें लीक हुए परीक्षा के पेपर फैलाना, साइबर धोखाधड़ी, ड्रग्स की तस्करी, चरमपंथी कंटेंट, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा मटीरियल, कॉपीराइट पायरेसी और वित्तीय घोटाले शामिल हैं. टेलीग्राम की ओर से दायर इस याचिका पर जस्टिस तेजस करिया की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई कर रही है. जान‍िए कोर्ट रूम में क्‍या क्‍या हो रहा.

दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा… कोर्ट ने पक्षकारों से आज शाम 7 बजे तक लिखित जवाब दाखिल करने को कहा.

सरकार ने कोर्ट में क्‍या क्‍या बताया

केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि टेलीग्राम आतंकवादी गतिविधियों के लिए सबसे सुविधाजनक प्लेटफॉर्म बन गया है.
टेलीग्राम पर ‘NEET Mafia’ नाम से एक चैनल संचालित हो रहा है, जिसके करीब 18,000 सब्सक्राइबर हैं.
अटॉर्नी जनरल बोले- यह ‘फ्रेंकनस्टाइन’ बन चुका है
केंद्र सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि टेलीग्राम आतंकवादी गतिविधियों के लिए सबसे सुविधाजनक प्लेटफॉर्म बन गया है. सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त निगरानी और जवाबदेही की कमी के कारण सुरक्षा एजेंसियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र का टेलीग्राम पर हमला, अटॉर्नी जनरल बोले- यह ‘फ्रेंकनस्टाइन’ बन चुका है…टेलीग्राम से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कड़ा रुख अपनाया।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत में कहा कि संबंधित आदेश अपने आप में पूर्ण और पर्याप्त है तथा उसे किसी अतिरिक्त व्याख्या की आवश्यकता नहीं है. सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जो इंटरमीडियरी अपनी कानूनी और वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर सकता, वह प्रपोर्सनल‍िटी का दावा नहीं कर सकता. उन्होंने टेलीग्राम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक फ्रेंकनस्टाइन (Frankenstein) बन चुका है.

केंद्र सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि टेलीग्राम पर ‘NEET Mafia’ नाम से एक चैनल संचालित हो रहा है, जिसके करीब 18,000 सब्सक्राइबर हैं. सरकार का कहना है कि ऐसे चैनलों के माध्यम से अवैध गतिविधियों, पेपर लीक और गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को बढ़ावा मिलता है. सरकार ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा कि यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने मंच के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.

सरकार ने टेलीग्राम को नया डार्क वेब बताया है और दावा किया है कि इसके प्राइवेसी फीचर्स की वजह से एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है. यह भी आरोप लगाया गया है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मैलवेयर फैलाने, साइबर हमलों में मदद करने, चोरी का डेटा शेयर करने, मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को बढ़ावा देने और बॉट्स व चैनल्स के जरिए नागरिकों की निजी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाने के लिए किया जा रहा है.

र‍िव्‍यू कमेटी ने सुन ली हैं टेलीग्राम की दलीलें

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली एक रिव्यू कमेटी ने टेलीग्राम के अधिकारियों की बात सुनी और उनकी दलीलें दर्ज कीं. टेलीग्राम ने तर्क दिया कि कानून में इस तरह के अंतर का कोई प्रावधान नहीं है. कोर्ट ने टेलीग्राम के इस दावे पर ध्यान दिया कि अगर आधार ही खत्म हो जाए, तो आदेश कायम नहीं रह सकता, और कहा कि दोनों पहलुओं पर विचार किया जाएगा. टेलीग्राम ने केंद्र के आदेश में कानूनी खामियों का भी आरोप लगाया, जबकि कमेटी ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देशों को बरकरार रखने की सिफारिश की थी.

टेलीग्राम के वकील का क्‍या दावा

टेलीग्राम के वकील ध्रुव मेहता ने कहा कि सरकार ने हमसे कुछ चीजें हटाने के लिए कहा. कोर्ट ने कहा कि जो आपने दिखाई हैं… आपको IT एक्ट की धारा 79 के तहत जरूरी सावधानी बरतनी होगी क्योंकि आप एक मध्यस्थ हैं. धारा 79 एक स्वतंत्र दायित्व है, इसका IT एक्ट की धारा 69A से कोई लेना-देना नहीं है. हाईकोर्ट ने कहा कि आइए, 69A के तहत मिली शक्तियों और क्या उनका सही तरीके से इस्तेमाल किया गया है, इस पर ध्यान दें.

हाईकोर्ट ने क्‍या क्‍या बताया

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश को बरकरार रखा जाए या रद्द किया जाए, यह हर मामले के तथ्यों और हालात पर निर्भर करेगा. कोर्ट ने टेलीग्राम की इस दलील पर भी ध्यान दिया कि कोई इमरजेंसी वाली स्थिति नहीं थी और सरकार सिर्फ़ कुछ खास मैसेज को ब्लॉक कर सकती है, न कि पूरे ऐप को. कोर्ट ने टेलीग्राम की इस बात को भी दर्ज किया कि पूरे प्लेटफ़ॉर्म पर रोक लगाने के बजाय आपत्तिजनक कंटेंट को अलग-अलग ब्लॉक किया जा सकता है. कोर्ट ने आगे कहा कि इमरजेंसी में ब्लॉक करने की प्रक्रिया में तीन चरण होते हैं नियुक्त अधिकारी, सचिव और समिति और इस प्रक्रिया का पालन किए जाने का सबूत देना ज़रूरी है.

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