अक्सर यह देखने को मिलता है कि अगर कोई फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में घिर जाए तो उसके बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करने की संभावना बढ़ जाती है. दर्शकों में इस बात की उत्सुकता बढ़ जाती है कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है कि विवाद हो रहा है. ऐसा ही हुआ था 1981 में आई एक फिल्म के साथ. विवाद इतना बढ़ा कि फिल्म बैन कर दी गई. प्रोड्यूसर ने कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटे. जब फिल्म रिलीज हुई तो तहलका मचा दिया. यह साल की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी.
फिल्म देखने के बाद अगर उससे जुड़े सवाल दर्शकों के मन-मस्तिष्क में बने रहे तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता. बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में बनी है जिनके क्लाइमैक्स ने दशकों को हिलाकर रख दिया. दर्शक जब थिएटर से बाहर निकले तो उनके मन में फिल्म से जुड़े कई सवाल आते रहे. ऐसे ही एक फिल्म 1981 में आई थी. नाम था ‘मेरी आवाज सुनो’. फिल्म रिलीज होने से पहले विवादों में आ गई थी. बैन भी कर दी गई थी. कोर्ट की परमिशन के बाद जब यह मूवी रिलीज हुई तो तहलका मचा दिया. कई शहरों में फिल्म ने 1975 की ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया था.
‘मेरी आवाज सुनो’ फिल्म 23 नवंबर 1981 को रिलीज हुई थी जिसका डायरेक्शन एसवी राजेंद्र सिंह ने किया था. प्रोड्यूसर जीए शेषगिरि राव थे. पद्मालय स्टूडियोज के बैनर तले फिल्म को रिलीज किया था. फिल्म में जीतेंद्र-हेमा मालिनी और परवीन बॉबी लीड रोल में थे. इसके अलावा शक्ति कपूर, रंजीत और कादेर खान निगेटिव रोल में थे. यह फिल्म 1981 की ही कन्नड़ मूवी अंत का रीमेक थी. इसका निर्देशन भी एसवी राजेंद्र सिंह ने किया था.
पहले इस फिल्म का टाइटल ‘आवाज’ था. फिल्म की कहानी एचके अनंताराव ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले एसवी राजेंद्र सिंह ने लिखा था. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. फिल्म के लास्ट सीन में बैकग्राउंड से एक सवाल ‘आदमी मजबूर है, अब इसकी आवाज कौन सुनेगा, ये फैसला अब आप कीजिए’ सुनाई देता है. फिल्म का लास्ट सीन रूटीन फिल्मों से बहुत अलग था.
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फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. म्यूजिक औसत ही था. यह फिल्म एसवी राजेंद्र सिंह की पहली हिंदी फिल्म थी. ‘मेरी आवाज सुनो’ फिल्म रिलीज होते ही बैन हो गई थी. दरअसल फिल्म रिलीज होते ही सरकार में हलचल मच गई. फिल्म में मंत्री, आईएएस और पुलिस अफसर को भ्रष्ट दिखाया गया था.
फिल्म को बैन कर दिए जाने से निर्माता कोर्ट पहुंच गए. कोर्ट ने फिल्म में कुछ बदलाव करने का ऑर्डर दिए. फिल्म में जिस जगह की कहानी दिखाई गई थी उसे ‘हिंदुस्तान’ से बदलकर ‘मुंडुस्तान’ कर दिया गया. कंट्रोवर्सी का फायदा फिल्म को हुआ. दर्शकों में जिज्ञासा बढ़ गई कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है.
फिल्म में जीतेंद्र को टॉर्चर करने का सीन बहुत फेमस हुआ. उसी सीन में हेमा मालिनी और उनके पेट में पल रहे बच्चे की डेथ दिखाई जाती है. रंजीत, कादर खान और शक्ति कपूर ने पर्दे पर बेरहम किरदार बहुत अच्छे से निभाए. अंत में सभी अपराधियों को मारकर जीतेंद्र जज के सामने पहुंचकर सरेंडर कर देते हैं.
फिल्म का सबसे असरदार गाना ‘अच्छा हुआ तुम मिल गए’ था जिसमें जीतेंद्र का रोल निभा रहीं तमन्ना यह गाना गाती हैं. फिल्म एक सवाल पर खत्म होती है. देश के लिए अपना सबकुछ कुर्बान करने वाले पुलिस अफसर के साथ क्या इंसाफ होना चाहिए, इस सवाल का जवाब दर्शकों पर छोड़ा गया.
फिल्म की शूटिंग के दौरान हेमा मालिनी प्रेग्नेंट थीं. फिल्म की कहानी में उन्हें प्रेग्नेंट महिला का किरदार निभाना था. ऐसे में डायरेक्टर ने उनके कई वाइड शॉट लिए. जीतेंद्र का डबल रोल था. एक रोल में वो ओवर एक्टिंग का शिकार हो गए. पुलिस अफसर का रोल जीतेंद्र ने बहुत ही शानदार ढंग से निभाया था. फिल्म का बजट 3 करोड़ रुपये के करीब था जबकि कलेक्शन 6.5 करोड़ रुपये था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तीसरी फिल्म थी.
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