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Kanpur Kidney Racket: कानपुर के चर्चित किडनी रैकेट केस में अब ईडी की एंट्री हो गई. ईडी अब मनी लॉन्ड्रिंग के तहत करोड़ों की काली कमाई और सम्पत्तियों की जांच करेगी. ईडी के चार अधिकारियों ने इस प्रकरण में पुलिस कमिश्नर कानपुर से भी मुलाक़ात की है.

कानपुर किडनी रैकेट में ED की एंट्री, करोड़ों की काली कमाई की जांच शुरू Zoom

कानपुर किडनी रैकेट केस में ईडी की एंट्री

कानपुर. कानपुर में किडनी खरीदने-बेचने और अवैध ढंग से ट्रांसप्लांट करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो गई है. ईडी गिरोह में शामिल आरोपितों के आर्थिक स्रोतों के अलावा यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध ट्रांसप्लांट से कमाए पैसा को कहां खपाया. दरअसल, ईडी को लगता है कि इस गिरोह ने दर्जनों किडनी ट्रांसप्लांट कर करोड़ों रुपए कमाए. वहीं सूत्रों का कहना है कि ED ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है.

शहर के केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में मुजफ्फरनगर की पारुल का 29 मार्च की रात किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. पारुल के लिए बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने किडनी बेची थी. प्रकरण का पर्दाफाश पुलिस ने 30 मार्च को किया था. अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, आरोही अस्पताल के संचालक राजेश, मेडलाइफ के संचालक रामप्रकाश, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेन्द्र सिंह, दलाल शिवम अग्रवाल को जेल भेजा गया था.

चार आरोपी अभी भी फरार

बाद में गाजियाबाद के ओटी मैनेजर राजेश, हापुड़ निवासी ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह राघव, बागपत निवासी परवेज सैफी, उसके बाद गाजियाबाद निवासी और खुद को डॉक्टर बताने वाले रोहित तिवारी, सैफुद्दीन और अखिलेश तिवारी को पकड़ा गया था. मुदस्सर अली सिद्दीकी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. पुलिस अब तक 13 लोगों को जेल भेज चुकी है, जबकि चार अभी फरार हैं. यह भी सामने आया है कि गिरोह मेरठ से संचालित था. मेरठ निवासी डॉ. अफजाल व डॉ. वैभव इसे संचालित कर रहे थे.

ईडी अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर से की मुलाकात

पुलिस आयुक्त ने बताया कि ईडी के अधिकारी का फोन आया था, जिसके बाद चार अधिकारी उनसे मिले हैं. ईडी ने गिरफ्तार आरोपितों का पूरा ब्योरा लिया है. आरोपितों के बैंक खातों और पैनकार्ड के जरिए ईडी इस गिरोह के आर्थिक ढांचे का पता लगाने की कोशिश कर रही है. गौरतलब है कि एक किडनी ट्रांसप्लांट में गिरोह के पास 50 से 70 लाख रुपये की रकम वसूलते थे. ऐसी संभावना है कि गिरोह ने दर्जनों किडनी ट्रांसप्लांट कराई हैं. यह रकम करोड़ों में है. इसे देखते हुए ही ईडी सक्रिय हुई है. आरोपितों द्वारा संपत्तियों की खरीद फरोख्त के अलावा ईडी गिरोह की आर्थिक चेन खंगालेगी. पुलिस अब गिरोह के राजदार डॉ. अफजाल, डॉ. वैभव और अनुराग उर्फ अमित व प्रयागराज निवासी नवीन पांडेय की तलाश में जुटी है.वहीं सूत्रों की माने तो ED ने प्रवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें

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