Shiv Sena UBT MPs Rebellion: उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नौ में से छह सांसदों की तरफ से अलग गुट बनाए जाने के बाद पार्टी इनके खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है. शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और अन्य भरोसमंद सांसद लोकसभा स्पीकर से मिलकर बागी सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की अपील करेंगे. इस अपील में 2017 में जेडीयू की अपील पर शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा समाप्त करने के फैसले को आधार बनाएगी. आइए जानते हैं क्या था शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने का मामला.
उद्धव ठाकरे की शिवसेना शरद यादव केस को आधार बनाकर बागी सांसदों की सदस्यता खत्म करवाने के प्रयास में है.
नई दिल्ली: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के करीब 6-7 सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की अटकलें जोरों पर है. इस बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने के भी प्रयास में जुट गई है. इसके लिए शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता खत्म करने वाले केस को आधार बनाने के प्रयास में है. उधर, बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह सांसदों ने अलग गुट बनाने की घोषणा कर दी. साथ ही कहा जा रहा है कि इस अलग गुट ने लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला से भी अंदर खाने मुलाकात कर ली है. बताया जा रहा है कि इस बागी गुट ने महाराष्ट्र उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को पत्र सौंपकर विलय की अर्जी लगाई है.
उद्धव ठाकरे के ये छह सांसद हुए बागी
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी से बगावत करने वाले सांसदों में शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे, आष्टीकर हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल, मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से सांसद संजय दीना पाटिल, परभणी से सांसद संजय हरिभाऊ जाधव, निंबालकर उस्मानाबाद से सांसद ओमप्रकाश राजे और यवतमाल से संजय देशमुख शामिल हैं.
टूट को रोकने के प्रयास में उद्धव की सेना
शिवसेना (UBT) में टूट को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने करीबी नेता और पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राज्यसभा सदस्य संजय राउत को मैदान में उतारा है. इन तीनों नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से बुधवार को मुलाकात की. देसाई ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक प्रतिवेदन सौंपकर उनसे शिवसेना (यूबीटी) से किसी भी गैरकानूनी दलबदल को रोकने का अनुरोध किया है.
उन्होंने कहा, ‘कानून के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने पर भी कोई समूह सीधे किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता. किसी समूह के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत होने पर केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है.’
देसाई ने कहा, ‘यह फैसला लोकसभा अध्यक्ष का होता है इसलिए अगर दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला कोई समूह किसी अन्य दल में विलय के लिए उनके पास पहुंचता है तो नियमों के तहत उस समूह को मान्यता नहीं दी जा सकती क्योंकि प्रावधानों के अनुसार केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है. छह सांसद होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता.’
पार्टी में टूट रोकने के लिए इन कदमों पर विचार कर रही है उद्धव की सेना
- बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना को लग रहा है कि वह अपनी पार्टी में टूट को नहीं रोक पाएंगे, इसलिए वह दूसरे विकल्प यानी बगावत करने वाले सांसदों को अयोग्य ठहराने का भी प्रयास करेंगे. इसके लिए उद्धव ठाकरे के करीबी नेताओं ने कुछ अंतिम प्रयास करने का फैसला लिया है जो इस प्रकार है-:
- शिवसेना (यूबीटी) के राज्य सभा सांसद संजय राउत के घर पर पार्टी की आधिकारिक पार्लियामेंट्री बोर्ड की मीटिंग बुलाई गई है. कहा जा रहा है कि इस मीटिंग से पहले संजय राउत अपने घर पर एक पार्टी के नेताओं के साथ एक प्राइवेट मीटिंग करेंगे जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी.
- बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस मीटिंग के दौरान सांसदों का भरोसा और विश्वास पुख्ता करने के लिए वहां आने वाले सभी सांसदों से फॉर्मल एफिडेविट पर साइन करा सकती है.
- तय किया जा सकता है कि पार्टी के बुलावे पर भी मीटिंग में शामिल नहीं होने वाले सांसदों के खिलाफ क्या लीगल ऐक्शन लिया जाए.
- बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे ने तय किया है कि वह अपने बागी सांसदों की सांसदी छीनने के लिए शरद यादव वाले फॉर्मूले की तरफ भी बढ़ सकते हैं. जेडीयू के खिलाफ बातें करने के चलते शरद यादव को मेंबरशिप एंटी-डिफेक्शन कानूनों के तहत राज्यसभा से अयोग्य ठहरा दिया गया था. पार्टी लोकसभा स्पीकर को एक फॉर्मल लेटर का ड्राफ्ट तैयार करने का प्लान बना रही है.
- इस लेटर के ज़रिए, पार्टी आधिकारिक रूप से सिफारिश करना चाहती है कि लोकसभा स्पीकर गैरहाजकर सांसदों की पार्लियामेंट्री मेंबरशिप डिसक्वालिफाई और कैंसल कर दें.
- ये सारे प्रयास कानून संगत हो इसलिए उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने मीटिंग में पार्टी के लीगल एडवाइजर को भी ऑनलाइन या ऑफलाइन शामिल रहने को कहा है.
जेडीयू की अपील पर कैसे गई थी शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता?
- याद करा दें, साल 2017 के दिसंबर की बात है. जब जेडीयू की सिफारिश पर तत्कालीन उपराष्ट्रपति और राज्यसभा स्पीकर वेंकैया नायडू ने शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता समाप्त कर दी थी. दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने बीजेपी से अलग अकेले चुनाव में उतरने का फैसला किया था. चुनाव में जेडीयू को करारी हार मिली थी, उनकी पार्टी के केवल दो सांसद जीते थे. इसके बाद नीतीश कुमार ने आत्मग्लानि स्वीकारते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी थी. 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने सबको चौंकाते हुए अपने धुर विरोधी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा. महागठबंधन को बिहार की जनता ने प्रचंड बहुमत दिया.
- नई सरकार में उपमुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे तेजस्वी यादव का नाम पुराने भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया. इसके बाद करीब डेढ़ साल सरकार चलाने के बाद 6 जुलाई 2017 को नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग हो गए और दोबारा बीजेपी के साथ सरकार बना ली.
- जेडीयू के संस्थापक सदस्यों में एक शरद यादव को नीतीश कुमार का यह फैसला पसंद नहीं आया. पार्टी के अंदर और मीडिया में भी शरद यादव ने महागठबंधन से नीतीश कुमार के अलग होने के फैसले पर सवाल उठा दिए. शरद यादव के इन बयानों का पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता अली अनवर ने भी समर्थन किया था. इन दोनों नेताओं के इन बयानों पर तत्कालीन बिहार सीएम नीतीश कुमार बेहद नाराज हो गए. बताया जाता है कि उन्होंने तुरंत जेडीयू के तत्कालीन अध्यक्ष आरसीपी सिंह को तलब किया और उन्होंने शदर यादव और अली अनवर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने को कहा.
- जेडीयू के तत्कालीन अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने भी तत्परता दिखाते हुए पहले शरद यादव के करीबी 21 नेताओं को जेडीयू से निकाल दिया. इसके बाद जेडीयू एक प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन राज्यसभा के सभापति वेंकैवेंकैया नायडू से मुलाकात कर शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता को रद्द करने की मांग की थी. अपील में कहा गया कि दोनों नेता पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं और इसी वजह से उन दोनों की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए.
- जेडीयू की अपील पर राज्यसभा के ऑर्डर में कहा गया कि शरद यादव ने अपनी मर्जी से जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता छोड़ दी थी. जेडीयू ने ही उन्हें राज्यसभा भेजा था. इसलिए उन्हें डिसक्वालिफाई (अयोग्य) किया गया है. जेडीयू के एक और सदस्य अली अनवर को भी शरद यादव की बात मानने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए डिसक्वालिफाई कर दिया गया.
- राज्यसभा के इस फैसले के कुछ ही घंटे बाद मीडिया के सामने आए जेडीयू के तत्कालीन प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि शरद यादव का एक्शन डिसक्वालिफिकेशन (अयोग्यता) के लिए एक सही केस बनाता है. पार्टी ने कहा कि वह राज्यसभा चेयरमैन से अपील की गई थी और दावों को सपोर्ट करने के लिए प्रोग्राम में शदव यादव के भाषण अटैच किए गए थे.
- इस बीच, शरद यादव ने दावा किया कि वह असली जेडीयू हैं और गुजरात में आने वाले चुनाव कांग्रेस के साथ अलायंस में लड़ेंगे. लेकिन पार्टी के चुनाव चिन्ह तीर के लिए उनकी अपील को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया था.
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अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें
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