-वैध संपत्ति पर किसी का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, पात्र लोगों को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता: रविन्द्र कुमार मॉंदड़
-जनसुनवाई में पहुंची पीडि़ता की गुहार पर डीएम ने दिखाई तत्परता, तत्काल गठित की जांच टीम
-प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई के बाद नगर निगम मार्केट स्थित दुकान का दिलाया गया विधिवत कब्जा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिला प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण सामने आया है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ के निर्देशन में संचालित ‘गरीब का गृह प्रवेश’ अभियान के तहत महज 24 घंटे के भीतर एक पीड़ित महिला को उसकी वर्षों पुरानी आवंटित दुकान का कब्जा वापस दिलाकर प्रशासन ने न्याय की नई मिसाल पेश की है। इस कार्रवाई से न केवल पीडि़ता को बड़ी राहत मिली, बल्कि आमजन में भी प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद निवासी श्रीमती सुमन बत्रा ने 15 जून को आयोजित जनसुनवाई में जिलाधिकारी के समक्ष अपनी पीड़ा रखी थी। उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा वर्ष 1992 में उन्हें गांधी नगर स्थित साईं मंदिर के निकट नगर निगम मार्केट में दुकान संख्या-06 आवंटित की गई थी। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते दुकान का संचालन प्रभावित होने पर उन्होंने अस्थायी रूप से अपने सहयोगी को दुकान चलाने की जिम्मेदारी दी थी। आरोप है कि बाद में सहयोगी ने दुकान का कब्जा वापस नहीं किया और वह अपनी ही वैध संपत्ति के उपयोग से वंचित हो गईं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने तत्काल सिटी मजिस्ट्रेट, उप जिलाधिकारी सदर तथा पुलिस विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संबंधित अभिलेखों और तथ्यों की जांच की। जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई, जिसके बाद प्रशासन ने बिना विलंब आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर कार्रवाई शुरू कर दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों ने समन्वित कार्रवाई करते हुए 16 जून को पीडि़ता को उनकी आवंटित दुकान का विधिवत कब्जा दिला दिया। शिकायत प्राप्त होने के मात्र 24 घंटे के भीतर हुए इस निस्तारण को जिला प्रशासन की सक्रियता और जवाबदेही का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इस अवसर पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने स्पष्ट कहा कि जनपद में किसी भी पात्र व्यक्ति को उसकी वैध संपत्ति से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन ऐसे मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेकर जांच कर रहा है और जहां भी पीडि़तों के अधिकारों का हनन पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ‘गरीब का गृह प्रवेश’ अभियान केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि जरूरतमंद और पीडि़त नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। दुकान का कब्जा वापस मिलने के बाद श्रीमती सुमन बत्रा और उनके परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ और जिला प्रशासन का कोटि-कोटि धन्यवाद करते हुए कहा कि वर्षों से लंबित उनकी समस्या का समाधान इतनी तेजी से होगा, इसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी। परिवार ने प्रशासन की संवेदनशीलता और निष्पक्ष कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे आम नागरिकों के लिए राहत और भरोसे का बड़ा कदम बताया। जिले में चल रहे ‘गरीब का गृह प्रवेश’ अभियान के अंतर्गत अब तक अनेक जरूरतमंदों को उनकी वैध संपत्तियों पर पुन: अधिकार दिलाया जा चुका है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे प्रयासों से न केवल लोगों को न्याय मिल रहा है, बल्कि शासन की जनकल्याणकारी मंशा भी धरातल पर प्रभावी रूप से दिखाई दे रही है।
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