देवगुरु बृहस्पति का शनि के पुष्य नक्षत्र में गोचर ज्योतिष की दुनिया की सबसे बड़ी और शुभ घटनाओं में से एक है। गुरु इस समय अपनी सबसे पावरफुल यानी उच्च की स्थिति कर्क राशि में हैं। चूंकि पुष्य को 'नक्षत्रों का राजा' माना जाता है, इसलिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन धन, सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का वरदान पाने का सबसे सुनहरा मौका है। अगर आप भी इस महागोचर का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं और अपने जीवन से पैसों की तंगी व बीमारियों को दूर भगाना चाहते हैं, तो इस दौरान ये 5 अचूक उपाय जरूर करें।
1. केसर या हल्दी का तिलक (सौभाग्य और मान-सम्मान के लिए)
गुरु ग्रह का सीधा संबंध पीले रंग और खुशहाली से है। इस गोचर के दौरान रोज सुबह स्नान करने के बाद अपने माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
<strong>फायदा: </strong>इससे आपकी कुंडली में गुरु मजबूत होंगे, समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और नकारात्मक ऊर्जा आपसे कोसों दूर रहेगी।
2. विष्णु सहस्रनाम का पाठ (धन की तंगी दूर करने के लिए)
पुष्य नक्षत्र के देवता खुद बृहस्पति हैं और भगवान विष्णु इसके प्रधान देव हैं। इस गोचर अवधि में रोज या हर गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranamam) का पाठ करें या उसे सुनें।
<strong>फायदा: </strong>अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ है या कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, तो इस उपाय से धन आगमन के नए रास्ते खुलेंगे।
3. 'पीली चीजों' का गुप्त दान (बरकत और सुख-समृद्धि के लिए)
इस दौरान किसी मंदिर में या किसी जरूरतमंद ब्राह्मण को पीले रंग की चीजें दान करें। दान में आप चने की दाल, केला, पीले वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें या हल्दी दे सकते हैं।
<strong>फायदा: </strong>शास्त्रों के अनुसार, गुरु के पुष्य नक्षत्र में रहने के दौरान किया गया पीली वस्तुओं का दान घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होने देता।
4. केले के वृक्ष का पूजन (करियर और विवाह बाधा के लिए)
हर गुरुवार को सुबह उठकर केले के वृक्ष (Banana Tree) की जड़ में जल अर्पित करें। जल में थोड़ी सी हल्दी, चने की दाल और गुड़ जरूर मिला लें। इसके बाद वहां शुद्ध घी का दीपक जलाकर गुरु के मंत्र "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का जाप करें।
<strong>फायदा: </strong>नौकरी और बिजनेस में आ रही रुकावटें खत्म होंगी और जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, उनके योग जल्दी बनेंगे।
5. गाय को गुड़-चना खिलाना (सेहत और आयु रक्षा के लिए)
अगर आप लंबे समय से सेहत से जुड़ी समस्याओं या पेट की बीमारियों से परेशान हैं, तो इस गोचर काल में नियमित रूप से (विशेषकर गुरुवार को) गीली चने की दाल और गुड़ अपने हाथों से गाय को खिलाएं। गाय की पीठ पर हाथ फेरकर उनका आशीर्वाद लें।
<strong>फायदा: </strong>गाय में साक्षात देवताओं का वास होता है। इस उपाय से शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं और सेहत का वरदान मिलता है।
खास टिप: इस गोचर के दौरान अपने घर के बड़े-बुजुर्गों, माता-पिता और गुरुओं का पैर छूकर आशीर्वाद लेना न भूलें। उनका सम्मान करने से देवगुरु बृहस्पति बिना किसी उपाय के ही शुभ फल देने लगते हैं!
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