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अहमदाबाद प्लेन क्रैश की भयानक याद आज एकमात्र ज‍िंदा बचे व‍िश्‍वास कुमार रमेश के जेहन में ताजा है. अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का फ्लाइट AI 171 उड़ान भरते ही कुछ ही पलों में क्रैश हो गया था. उस वक्त विमान में 242 यात्री सवार थे. इनमें रमेश को छोड़कर छोड़कर सभी की जान चली गई थी.

अहमदाबाद विमान हादसा: एक साल बाद कैसे हैं एकमात्र बचे विश्वास रमेश?  Zoom

अहमदाबाद प्‍लेन क्रैश, कैसे हैं एकमात्र बचे रमेश.

’12 जून 2025 की भयानक दोपहर आज भी मेरी आंखों के सामने है. उस हादसे में मैं भले ही बच गया लेकिन मेरा भाई, मेरा आधा हिस्सा चला गया. ये मेरे लिए बेहद पीड़ादायक है.’ ये बातें अहमदाबाद हादसे में एकमात्र बचे यात्री विश्वास कुमार रमेश ने उस घटना के एक साल पूरा होने पर कहीं. रमेश आज भी अपने भाई को याद कर दुखी होते हैं. वे कहते हैं कि इस हादसे में बहुतों ने बहुत कुछ खोया.

बता दें कि अहमदाबाद प्लेन क्रैश की भयानक याद आज भी उनके जेहन में ताजा है. अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का फ्लाइट AI 171 उड़ान भरते ही कुछ ही पलों में क्रैश हो गया था. उस वक्त विमान में 242 यात्री सवार थे. इनमें रमेश को छोड़कर छोड़कर सभी की जान चली गई थी.

विमान दोनों इंजनों के फेल हो जाने के कारण अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास ही एक मेडिकल कॉलेज के परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. आग की लपटें आसमान तक उठने लगीं. ज्यादातर यात्री घटनास्थल पर ही अपनी जान गंवा बैठे लेकिन 39 वर्षीय विश्वास कुमार रमेश चमत्कारिक तरीके से बच गए. वे इमरजेंसी गेट के पास बैठे थे, जिसकी वजह से हादसे के तुरंत बाद वे तेजी से बाहर निकलने में सफल रहे.

विश्वास ने बताया कि वे अपने छोटे भाई अंजय के साथ लंदन वापस जा रहे थे. हादसे में उनके भाई की जान चली गई. विश्वास अब भी उस पल को याद करके कांप जाते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया, “मेरे लिए यह सबसे बड़ा सदमा है कि मेरा भाई मेरी आंखों के सामने चला गया. मैं बच गया, लेकिन मेरा एक हिस्सा उस दिन उसी विमान में रह गया.”

हादसे के एक साल बाद भी विश्वास कुमार रमेश तीन बड़ी परेशानियों से जूझ रहे हैं. शारीरिक दर्द, मानसिक आघात और आर्थिक परेशानी. उनके शरीर में अब भी चोटों के निशान हैं और दर्द बना रहता है. मानसिक रूप से वे इतने प्रभावित हैं कि बाहर निकलने या सामान्य जीवन जीने में दिक्कत होती है. उनका बेटा अब स्कूल जाने लगा है, लेकिन विश्वास उसे स्कूल छोड़ने या शॉपिंग के लिए बाहर ले जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते.

वे कहते हैं, “हर रात मुझे अपने भाई की याद आती है. मैं ब्रिटिश नागरिक हूं, लेकिन अब लंदन जाने का मन नहीं करता.” परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की कोशिश करते हैं, लेकिन पुरानी यादें उन्हें परेशान करती रहती हैं.

विश्वास को इस मुश्किल समय में कुछ मदद मिल रही है. बिजनेस कंसल्टेंट संजीव पटेल और उनके मेंटर उन्हें कानूनी और मेडिकल सहायता उपलब्ध करा रहे हैं. फिर भी, हादसे की याद उन्हें हर पल सताती है.

यह हादसा न सिर्फ विश्वास की जिंदगी, बल्कि पूरे परिवार को बदल गया. एक तरफ जहां पूरा देश इस हादसे को याद करके दुखी है, वहीं विश्वास जैसे सर्वाइवर रोज नई जंग लड़ रहे हैं. समय के साथ घाव भरते जरूर हैं, लेकिन कुछ जख्म कभी पूरी तरह नहीं भर पाते.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

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