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नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वोट चोरी के बाद अब देश में सीट चोरी का खेल चल रहा है. कांग्रेस ने देश में बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक संकट और नीट (NEET) व सीबीएसई (CBSE) परीक्षा विवादों को लेकर सरकार की घेरेबंदी की है. इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सियासी गलियारों में तैर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के मर्जर (विलय) की खबरों को केसी वेणुगोपाल ने सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह आधारहीन और महज एक अफवाह करार दिया है. कांग्रेस ने साफ किया है कि दोनों दल आगामी चुनौतियों का मुकाबला एक साथ मिलकर कैसे करेंगे, चर्चा सिर्फ इस बात पर हुई है, विलय पर नहीं.

कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 मुख्य बातें

• TMC-कांग्रेस मर्जर सिर्फ अफवाह: केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और टीएमसी के विलय की खबरें पूरी तरह आधारहीन हैं. जयराम रमेश ने भी मीडिया पर चुटकी लेते हुए कहा कि अफवाहें आप फैलाते हैं और सवाल हमसे पूछते हैं.

• 28 जून से देशव्यापी आंदोलन: देश में व्याप्त आर्थिक संकट, बेरोजगारी और छात्र मुद्दों को लेकर कांग्रेस 28 से 30 जून के बीच एक बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रही है, जो अगले दो से तीन महीने तक ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर चलेगा.

• राहुल गांधी भी होंगे शामिल: इस बड़े देशव्यापी प्रदर्शन और आंदोलन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी खुद जमीन पर उतरेंगे और जनता के बीच जाकर उनका दर्द सुनेंगे.

• इंडो-अमेरिका डील का विरोध: जयराम रमेश ने दावा किया कि 22 जून को होने वाली इंडो-अमेरिका डील से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हिमाचल और बिहार के कपास, सोया, मक्का और सेब उत्पादक किसानों पर बेहद बुरा असर पड़ने वाला है, जिसे पार्टी मुद्दा बनाएगी.

• नामांकन रद्द होने पर उठाए सवाल: बैठक में मध्य प्रदेश और झारखंड के राजनीतिक हालात पर चिंता जताई गई. केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बिना उचित नोटिस के रद्द कर दिया गया, जिस पर चुनाव आयोग (EC) ने अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया है.

इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की योजना
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस ने आगामी महीनों के लिए अपनी राजनीतिक दिशा तय कर दी है. पहली बात तो यह कि पार्टी ने टीएमसी के साथ विलय की अटकलों को खारिज करके यह संदेश दिया है कि वह क्षेत्रीय दलों के सामने अपनी स्वतंत्र पहचान खोने को तैयार नहीं है बल्कि वह विपक्षी एकजुटता (I.N.D.I.A. ब्लॉक) के तहत ‘सह-अस्तित्व’ की नीति पर काम करेगी.

इंडो-अमेरिका डील पर फोकस
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू आंदोलन की टाइमिंग है. जून के अंत में शुरू होने वाला आंदोलन न केवल आंतरिक मुद्दों (बेरोजगारी, नीट विवाद) को छुएगा बल्कि इंडो-अमेरिका डील जैसे वैश्विक व्यापारिक समझौतों को किसानों के आर्थिक हितों से जोड़कर सरकार को बैकफुट पर लाने की रणनीति है. जयराम रमेश का यह बयान कि गृह मंत्री इस लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं पा सकते, यह दर्शाता है कि कांग्रेस संसद के भीतर और बाहर सरकार को गठबंधन के दौर में पूरी तरह आक्रामक होकर घेरने का मन बना चुकी है. डबल इंजन सरकार को लोकतंत्र खत्म करने वाला इंजन बताना इसी धारदार रणनीति का हिस्सा है.

सवाल-जवाब
क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस का आपस में विलय होने जा रहा है?
नहीं, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इसे पूरी तरह अफवाह और आधारहीन बताया है. उन्होंने साफ किया कि दोनों पार्टियों के बीच विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है, बल्कि आगे एक साथ मिलकर कैसे लड़ना है, सिर्फ इस रणनीति पर बात हुई है.
कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन के मुख्य मुद्दे क्या हैं और यह कब से शुरू होगा?
यह आंदोलन 28 से 30 जून के बीच शुरू होगा और दो-तीन महीने चलेगा. इसके मुख्य मुद्दे देश का आर्थिक संकट, बढ़ती बेरोजगारी, नीट (NEET) और सीबीएसई (CBSE) परीक्षाओं में गड़बड़ी, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और 22 जून को होने वाली इंडो-अमेरिका डील से किसानों को होने वाला नुकसान हैं.

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