Bharathiraja Bollywood Films: तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्देशक और एक्टर भारतीराजा के निधन के साथ भारतीय सिनेमा का एक स्वर्णिम अध्याय खत्म हो गया. ग्रामीण भारत की कहानियों को बड़े पर्दे पर जीवंत करने वाले भारतीराजा ने सिर्फ तमिल फिल्मों में ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड में भी अपनी अलग पहचान बनाई. हालांकि, उन्होंने हिंदी में गिनी-चुनी फिल्में निर्देशित कीं, लेकिन उनकी हर फिल्म किसी न किसी वजह से चर्चा में रही. खास बात यह है कि उनकी अधिकांश हिंदी फिल्में उनकी ही सुपरहिट दक्षिण भारतीय फिल्मों की रीमेक थीं.
नई दिल्ली. तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार भारतीराजा ने सिर्फ दक्षिण भारत में ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी. उन्होंने हिंदी सिनेमा में भले ही गिनी-चुनी फिल्में निर्देशित कीं, लेकिन हर बार अपनी कहानी कहने की शैली से दर्शकों को चौंका दिया. उनकी फिल्मों में सितारों की चमक से ज्यादा दमदार कहानी और भावनाओं की गहराई दिखाई देती थी. एक तरफ उन्होंने एक उभरती एक्ट्रेस को हिंदी फिल्मों में लॉन्च किया तो दूसरी ओर रोमांस के बादशाह माने जाने वाले सुपरस्टार को ऐसे किरदार में पेश किया कि दर्शक उन्हें देखकर सिहर उठे. गांव, प्रेम, रिश्तों और इंसानी मनोविज्ञान को पर्दे पर उतारने की उनकी कला ने उन्हें बाकी निर्देशकों से अलग बनाया.
सिनेमा जगत में भारतीराजा को प्यार से ‘इयक्कुनर इमयम’ यानी ‘निर्देशकों का हिमालय’ कहा जाता था. भारतीराजा को मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय सिनेमा, विशेषकर तमिल फिल्मों में क्रांति लाने के लिए जाना जाता है. उन्होंने फिल्मों को स्टूडियो के बंद सेट से निकालकर तमिलनाडु के असली गांवों, खेतों और मिट्टी के बीच स्थापित किया. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि तमिल सिनेमा में अपनी धाक जमाने वाले इस मास्टरमेकर का बॉलीवुड से भी बेहद गहरा और दिलचस्प नाता रहा था.
बॉलीवुड में दिग्गज डारेक्टर भारतीराजा की पहली फिल्म 1979 में आई फिल्म ‘सोलवा सावन’ थी. यह उनकी तमिल ब्लॉकबस्टर 16 वयतिनिले की रीमेक थी. फिल्म में अमोल पालेकर और श्रीदेवी मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. खास बात यह रही कि इसी फिल्म से श्रीदेवी ने हिंदी सिनेमा में बतौर एक्ट्रेस कदम रखा. यह फिल्म तमिल इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई. इसी ऐतिहासिक सफलता को हिंदी में दोहराने के लिए भारतीराजा ने साल 1979 में ‘सोलवा सावन’ का निर्माण किया था. हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन बाद में श्रीदेवी भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी महिला सुपरस्टार बन गईं.
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1979 के बाद एक बार फिर साल 1981 में भारतीराजा बॉलीवुड में आए. वह एक बेहद डार्क और साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म लेकर आए, जिसका नाम है ‘रेड रोज’. इस फिल्म के लिए भारतीराजा ने उस दौर के सबसे रोमांटिक और पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को चुना. राजेश खन्ना की जो छवि स्क्रीन पर हमेशा ‘रोमांटिक हीरो’ की थी, उसे भारतीराजा ने पूरी तरह से बदल दिया.
राजेश खन्ना ने फिल्म में एक साइको किलर का खूंखार और डार्क किरदार निभाया, जिसे देखकर दर्शक हैरान रह गए थे. फिल्म में उनके साथ पूनम ढिल्लों मुख्य भूमिका में थीं. भले ही यह फिल्म अपने समय से काफी आगे थी और बॉक्स ऑफिस पर औसत रही, लेकिन राजेश खन्ना के अभिनय के मामले में इसे आज भी उनकी बेहतरीन कल्ट फिल्मों में गिना जाता है. ये फिल्म 1978 में आई तमिल फिल्म ‘सिगप्पु रोजक्कल’ की रीमेक थी. ‘सिगप्पु रोजक्कल’ में कमल हासन ने एक ऐसे विक्षिप्त हत्यारे का किरदार निभाया था, जो महिलाओं से नफरत करता है और उनकी हत्या कर देता है.
भारतीराजा की तीसरी हिंदी फिल्म लवर्स थी, जिसमें कुमार गौरव और पद्मिनी कोल्हापुरे नजर आए थे. यह उनकी तमिल फिल्म ‘अलैगल ओयैवतिल्लै’ और तेलुगु फिल्म ‘सीठकोका’ चिलाका पर आधारित थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही और इसे नेशनल अवॉर्ड भी मिला. इसी कहानी को भारतीराजा 1983 में बॉलीवुड लेकर आए और फिल्म का नाम रखा ‘लवर्स’.
‘लवर्स’ में उस दौर के चॉकलेट बॉय कुमार गौरव और बेहद खूबसूरत एक्ट्रेस पद्मिनी कोल्हापुरे मुख्य भूमिकाओं में थे. यह एक बेहद भावुक और संगीतमय प्रेम कहानी थी, जिसने उस समय के युवाओं को अपनी तरफ काफी आकर्षित किया. इस फिल्म के जरिए भारतीराजा ने दिखाया कि वे केवल डार्क थ्रिलर या ग्रामीण पृष्ठभूमि ही नहीं, बल्कि शुद्ध और मासूम शहरी प्रेम कहानियों को भी उतनी ही शिद्दत से पर्दे पर उतार सकते हैं.
भारतीराजा की चौथी बॉलीावुड फिल्म थी ‘सवेरे वाली गाड़ी’ ये फिल्म तमिल फिल्म ‘किझाक्के पोगम रेल’ का रीमेक थी. ये तमिल की हिट फिल्म थी. ग्रामीण पृष्ठभूमि की प्रेम कहानी को हिंदी दर्शकों के स्वाद के अनुसार ढालते हुए भारतीराजा ने साल 1985 में ‘सवेरे वाली गाड़ी’ का निर्देशन किया. इस फिल्म में बॉलीवुड के ‘एक्शन किंग’ सनी देओल और एक बार फिर भारतीराजा की पसंदीदा एक्ट्रेस पूनम ढिल्लों मुख्य किरदारों में नजर आए. सनी देओल, जिन्हें अमूमन मारधाड़ और एंग्री यंग मैन के रूप में देखा जाता था, उन्हें भारतीराजा ने एक बेहद सीधे, गांव के सीधे-साधे और प्रेमी लड़के के रूप में पेश किया. राहुल देव बर्मन (आर.डी. बर्मन) के बेहतरीन संगीत और गांव की खूबसूरत लोकेशंस के कारण इस फिल्म को दर्शकों का काफी प्यार मिला.
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