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Dhan Ki Kheti Tips: धान की पारंपरिक खेती में पानी की भारी किल्लत और लगातार बढ़ती लागत से परेशान किसान अब धान की सीधी बुवाई तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं. लेकिन इस विधि से बंपर पैदावार लेने का असली राज इसके सही खाद प्रबंधन में छिपा है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. एन.पी. गुप्ता के अनुसार, बुवाई के समय दिया गया संतुलित पोषण न केवल बीजों का बेहतर जमाव करता है बल्कि पौधों की जड़ों को मजबूत बनाकर कल्ले बढ़ाने में भी मदद करता है. यहां जानिए सीधी बुवाई के समय खाद की कितनी मात्रा रखनी चाहिए, जिससे लागत कम हो, खरपतवार पर नियंत्रण रहे और मुनाफा दोगुना हो सके.
शाहजहांपुर: धान की पारंपरिक खेती में पानी और भारी लागत को देखते हुए, आजकल किसान सीधी बुवाई की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. हालांकि, सीधी बुवाई से बंपर पैदावार लेने के लिए सही समय पर सटीक उर्वरक प्रबंधन होना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. सही मात्रा में पोषक तत्व मिलने से पौधों की शुरुआती बढ़त तेज होती है, जिससे खरपतवारों का प्रकोप कम हो जाता है. मिट्टी की सेहत दुरुस्त रखने और कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए धान की सीधी बुवाई के समय संतुलित खाद देना बेहद जरूरी माना गया है. इसलिए जरूरी है कि किस बुवाई के वक्त संतुलित मात्रा में उर्वरक दें.
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धान की सीधी बुवाई का फ़ायदा
धान की सीधी बुवाई में पौधों को सीधे खेत में उगाया जाता है, जिससे उनके शुरुआती विकास के लिए फास्फोरस और पोटाश की मुख्य भूमिका होती है. बुवाई के समय दी गई खाद से बीजों का जमाव एकसमान होता है. फास्फोरस मिलने से पौधों की जड़ें मिट्टी में गहराई तक फैलती हैं, जिससे वो पोषक तत्वों और नमी को बेहतर तरीके से सोख पाती हैं और विपरीत मौसम में भी फसल खड़ी रहती है.
कल्लों की संख्या में होगी बढ़ोतरी
संतुलित नाइट्रोजन और पोटाश का शुरुआती डोज मिलने से पौधों में कल्ले निकलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. सीधी बुवाई वाले धान में जितने अधिक और मजबूत कल्ले होंगे, बालियों की संख्या भी उतनी ही ज्यादा होगी. नाइट्रोजन जहां पौधों की हरियाली और वानस्पतिक विकास को बढ़ाती है, वहीं पोटाश पौधों के तनों को मजबूती देकर उन्हें रोगों और कीटों के हमले से बचाने की आंतरिक क्षमता प्रदान करता है.
सीधी बुवाई में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शुरुआती दिनों में उगने वाले खरपतवार (Weeds) होते हैं. जब बुवाई के समय सही मात्रा में उर्वरक दिए जाते हैं, तो धान के पौधे तेजी से बढ़ते हैं और खेत की जमीन को जल्दी ढक लेते हैं. पौधों की इस तेज ग्रोथ के कारण खरपतवारों को पनपने के लिए पर्याप्त धूप और जगह नहीं मिल पाती, जिससे उनका विकास स्वतः ही धीमा हो जाता है.
संसाधनों की बचत और उच्च मुनाफा
सटीक उर्वरक प्रबंधन से न केवल खाद की बर्बादी रुकती है, बल्कि प्रति एकड़ उत्पादन लागत में भी कमी आती है. जब फसल को उसकी जरूरत के हिसाब से संतुलित पोषण मिलता है, तो दानों का भराव अच्छा होता है और उपज की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है. ऐसे में कम पानी और कम श्रम वाली सीधी बुवाई तकनीक में सही खाद प्रबंधन से किसान अपनी आय को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें
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