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होमताजा खबरwest bengalKolkataममता के जाते ही बंगाल को मिल गया 1 लाख करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट्स, सुवेंदु खुश

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Ashwini Vaishnaw Suvendu Adhikari Meeting : पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार रेलवे बोर्ड के आला अधिकारी लंबित मुद्दों को सुलझाने सीधे नवान्न पहुंचे हैं. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्य सचिवालय नवान्न में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की. साल 2026 के बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से अधिक की रुकी हुई रेल परियोजनाओं को रफ्तार मिलने जा रही है.

ममता के जाते ही बंगाल को मिल गया 1 लाख करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट्स, सुवेंदु खुशZoom

बंगाल को रेलवे ने दी बड़ी सौगात.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास में शनिवार को अहम दिन साबित हुआ. अब तक केंद्र सरकार के साथ असहयोग और राजनीतिक टकराव के लिए चर्चित रहे राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला. भारतीय रेल के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब पूरा का पूरा रेलवे बोर्ड सभी लंबित रेल परियोजनाओं और जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवादों को मौके पर ही निपटाने के लिए सीधे बंगाल की धरती पर उतर आया है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नवान्न सभाघर में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जो यह साफ संकेत देती है कि साल 2026 के सत्ता परिवर्तन ने राज्य और केंद्र के रिश्तों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है.

बैठक के बाद आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की जमकर तारीफ की और कहा कि बंगाल को वर्षों के कुशासन और विकास विरोधी राजनीति से मुक्ति मिल चुकी है. उन्होंने घोषणा की कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत वाली विभिन्न रेलवे और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं चल रही हैं, जो ममता बनर्जी सरकार के असहयोग और अदालती अड़ंगों के कारण कछुआ गति से चल रही थीं. अब उन सभी रुकावटों को दूर कर दिया गया है.

केंद्रीय रेल मंत्री ने सीएम सुवेंदु के साथ मुलाकात कर कोलकाता मेट्रो को लेकर एक बेहद बड़ा और महत्वाकांक्षी एलान किया.

कोलकाता मेट्रो का कायाकल्प

केंद्रीय रेल मंत्री ने कोलकाता मेट्रो को लेकर एक बेहद बड़ा और महत्वाकांक्षी एलान किया. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार कोलकाता मेट्रो नेटवर्क को पूरी तरह आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि यह देश का इकलौता ऐसा मेट्रो सिस्टम है जिसे सीधे भारतीय रेलवे संचालित करती है. आगामी पांच वर्षों के भीतर कोलकाता मेट्रो के बेड़े में 60 अत्याधुनिक और नेक्स्ट-जेनरेशन (Next-Generation) ट्रेनें शामिल की जाएंगी.

रेल मंत्री ने बंगाल को क्या-क्या दिया?

अश्विनी वैष्णव ने आंकड़ों के जरिए पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में 42 साल के शासन में महज 28 किलोमीटर मेट्रो लाइन का निर्माण हुआ था, जबकि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद पिछले कुछ वर्षों में ही 45 किलोमीटर से अधिक का नया मेट्रो नेटवर्क जोड़ दिया गया है. उन्होंने चिंगरीघाटा प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे पिछली सरकार विकास कार्यों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक चली गई थी.

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रेल मंत्री के साथ इस समन्वय को बंगाल के आम नागरिकों के लिए एक बड़ा वरदान बताया. (Photo made with AI)

अब ‘वार-वार’ नहीं, विकास की बारी

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रेल मंत्री के साथ इस समन्वय को बंगाल के आम नागरिकों के लिए एक बड़ा वरदान बताया. उन्होंने साफ कहा कि पहले की टीएमसी सरकार के समय केंद्र और राज्य के बीच हमेशा “युद्ध जैसी स्थिति” बनी रहती थी, जिसके कारण बंगाल का विकास पूरी तरह ठप हो गया था. सुवेंदु ने कहा- “जैसे हमारी सरकार ने कैबिनेट की पहली ही बैठक में देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा बल को तारबंदी के लिए जमीन सौंपने का ऐतिहासिक फैसला किया, ठीक उसी तरह हम रेलवे के सभी पेंडिंग प्रोजेक्ट्स के लिए भी तुरंत भूमि उपलब्ध कराएंगे. मैंने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे एक निश्चित समय-सीमा (Land Handover Calendar) तैयार करें ताकि रेलवे को प्रोजेक्ट्स पूरे करने में कोई देरी न हो. अब बंगाल का हर जिला रेल मानचित्र से जुड़ेगा.”

इस महाबैठक और रेलवे बोर्ड की नवान्न में मौजूदगी से एक बात पूरी तरह साफ हो गई है कि बंगाल अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुका है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच का यह तालमेल आने वाले दिनों में बंगाल की परिवहन व्यवस्था की पूरी तस्वीर बदलने की ताकत रखता है. विरोध और धरने की राजनीति के बीच, सरकार का यह कदम जनता को सीधे सुशासन और विकास का कड़ा संदेश दे रहा है.

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