<strong>Vastu Tips for Plants: </strong>घर की सुंदरता बढ़ाने वाले पेड़-पौधे सिर्फ हरियाली ही नहीं देते, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार वे आपके जीवन पर भी सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। माना जाता है कि यदि सही दिशा में उचित वृक्ष और पौधे लगाए जाएं तो घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वास होता है, जबकि गलत दिशा में लगाए गए पेड़ आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का कारण बन सकते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि किस दिशा में कौन सा पौधा शुभ माना गया है और किन वृक्षों को घर के आसपास लगाने से बचना चाहिए।
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आइए जानते हैं पौधारोपण से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम, जो आपके घर की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।</h3>
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1. पौधारोपण का शुभ समय</h3>
वास्तु और ज्योतिष के अनुसार उत्तरा, स्वाति, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र पौधारोपण के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। यदि आपको अपना जन्म नक्षत्र ज्ञात है तो उसी के अनुसार पौधा लगाना अधिक लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा शुक्ल पक्ष में पौधारोपण करना श्रेष्ठ रहता है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर कृष्ण पक्ष की सप्तमी तक का समय वृक्षारोपण के लिए अनुकूल माना गया है।
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2. मुख्य द्वार के सामने न लगाएं बड़े पेड़</h3>
घर के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने कोई भी पौधा या वृक्ष नहीं लगाना चाहिए। बड़े वृक्षों को मुख्य द्वार की ऊंचाई से कम से कम तीन गुना दूरी पर लगाना बेहतर माना गया है। साथ ही सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच वृक्ष की छाया घर पर नहीं पड़नी चाहिए। घर के उत्तर और पूर्व भाग में हमेशा छोटे और कम ऊंचाई वाले पौधे लगाने की सलाह दी जाती है।
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3. पौधों के रोपण और स्थानांतरण का नियम</h3>
विशेषज्ञों के अनुसार किसी पौधे को सीधे जमीन में लगाने के बजाय पहले गमले में विकसित करना बेहतर होता है। इससे उसकी जड़ें मजबूत बनती हैं और विकास भी अच्छा होता है। यदि किसी कारणवश किसी वृक्ष को हटाना आवश्यक हो, तो माघ या भाद्रपद माह को उपयुक्त माना गया है। साथ ही एक वृक्ष हटाने पर नया पौधा लगाने का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
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4. ग्रहों से जुड़ा है वृक्षों का संबंध</h3>
वास्तु मान्यताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के वृक्षों पर अलग-अलग ग्रहों का प्रभाव माना गया है। मजबूत और ऊंचे वृक्ष सूर्य से जुड़े होते हैं, जबकि दुग्धयुक्त वृक्षों पर चंद्रमा का प्रभाव माना जाता है। बेल और लताओं पर शुक्र और चंद्र का प्रभाव रहता है। झाड़ियों पर राहु-केतु तथा सूखे और कमजोर वृक्षों पर शनि का प्रभाव माना गया है। फलदार वृक्ष बृहस्पति और बिना फल वाले वृक्ष बुध से संबंधित माने जाते हैं।
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5. दिशाओं और ग्रहों का संबंध</h3>
वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा सूर्य, उत्तर दिशा बृहस्पति, दक्षिण दिशा मंगल और पश्चिम दिशा शनि से संबंधित मानी जाती है। इसी आधार पर वृक्षों और पौधों के चयन की सलाह दी जाती है।
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6. पूर्व दिशा में कौन से पौधे लगाएं?</h3>
पूर्व दिशा को सूर्य की दिशा माना जाता है। इस दिशा में तुलसी, गुलाब, चमेली, बेला, चंपा और दुर्वा जैसे पौधे लगाना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे धन, सुख और संतान से जुड़े शुभ फल प्राप्त होते हैं। वहीं पीपल और बड़े फलदार वृक्षों को इस दिशा में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।
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7. पश्चिम दिशा के लिए वास्तु नियम</h3>
पश्चिम दिशा में पीपल का वृक्ष शुभ माना गया है, जबकि कांटेदार पौधे शत्रुता और तनाव बढ़ाने वाले माने जाते हैं। इस दिशा में नारियल और अशोक जैसे ऊंचे वृक्ष लगाना लाभकारी बताया गया है।
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8. उत्तर दिशा में कौन से पौधे शुभ हैं?</h3>
उत्तर दिशा में तुलसी, केला, कैथ और पाकड़ जैसे पौधे शुभ फल देने वाले माने गए हैं। माना जाता है कि ये घर में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं। हालांकि इस दिशा में नींबू और गूलर के वृक्ष लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।
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9. ईशान कोण का महत्व</h3>
ईशान कोण को सबसे पवित्र दिशा माना जाता है। यहां तुलसी, आंवला, औषधीय पौधे, बेल और हल्के फूलों वाले पौधे लगाना शुभ माना गया है। यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता को बढ़ाने वाली मानी जाती है।
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10. दक्षिण दिशा में कौन से वृक्ष लगाएं?</h3>
दक्षिण दिशा में नीम, अशोक, नारियल, खैर और गुलाब के पौधे शुभ माने गए हैं। वास्तु मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा में नीम का वृक्ष लगाने से रोग और संकटों से राहत मिलती है। वहीं कांटेदार पौधों और दुग्धयुक्त वृक्षों से बचने की सलाह दी जाती है।
वास्तु शास्त्र की मान्यता के अनुसार सही दिशा में लगाए गए वृक्ष सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, जबकि गलत स्थान पर लगे पेड़-पौधे जीवन में आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं।
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