Mohammed Rafi Evergreen Hit Song: संगीतकार ने जिस गाने को रिकॉर्डिंग के वक्त कबाड़ बता दिया हो, वह सुपरहिट हो जाए, तो यह बड़े अचंभे की बात है. मगर ऐसा चमत्कार फिल्म ‘कुंवारा बाप’ के एक गाने के साथ हुआ था. इसे रिकॉर्ड करते वक्त मोहम्मद रफी भी असहज महसूस कर रहे थे, मगर उन्होंने दिग्गज एक्टर महमूद की बात मानी और उसे किन्नरों के साथ वैसा गाया, जैसा असर वह देखना चाहते थे. जब यह गाना रिलीज हुआ, तो घर-घर खूब बजा.
नई दिल्ली: अगर मोहम्मद रफी ने ‘कुंवारा बाप’ के इस गाने को न गाया होता, तो शायद आज हम उस पर बात न कर रहे होते. संगीतकार राजेश रोशन ने रिकॉर्डिंग के बाद अपने ही गाने की तुलना कबाड़ से कर दी थी. उस गाने का सुपरहिट होना वाकई में किसी चमत्कार से कम नहीं था.
1974 में महमूद की फिल्म ‘कुंवारा बाप’ आई थी, जिसमें कुल चार गाने रखे गए थे. गानों को संगीत में पिरोने का जिम्मा राजेश रोशन को मिला था. हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, उसे मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था. अगर आपने फिल्म देखी है, तो आपको बच्चे के जन्म के बाद का सीन याद होगा, जिसमें घर पर किन्नर आते हैं और नाच-गाना करते हैं. यह गाना एक डांसर पर फिल्माया गया, जिसका किरदार महमूद के पिता मुमताज अली ने निभाया था. उस कैरेक्टर पर मोहम्मद रफी की आवाज रिकॉर्ड होनी थी.
गाने की रिकॉर्डिंग फाइनल हुई. जब मोहम्मद रफी रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो पहुंचे, तो वहां का माहौल देखा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें पता चला कि उन्हें किन्नरों के साथ गाना है. रफी साहब जैसे सिंगर जो कभी माइक्रोफोन के सामने कभी असहज नहीं हुए, वह किन्नरों के साथ गाने पर असहज होने लगे.
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महमूद रफी साहब की परेशानी समझ गए. वे उनके पास गए और गुजारिश करके बोले कि आप इस गीत को ऐसे गाये, जैसे बाकी गानों को गाया है. रफी साहब ने आखिरकार इसे रिकॉर्ड किया, मगर राजेश रोशन रिकॉर्डिंग से संतुष्ट नहीं थे.
राजेश रोशन रिकॉर्डिंग के बाद चले तो गए, मगर उन्हें लगता रहा कि यह कबाड़ गीत रिकॉर्ड हुआ है. उन्हें किन्नरों के साथ मोहम्मद रफी को गवाना अजीब लग रहा था. कहां वह सोच रहे थे कि यह गाना सुपर डुपर हिट होगा, मगर हुआ इसके एकदम उलट. राजेश रोशन की दुविधा के बारे में जब महमूद को पता चला, तो उन्होंने फोन घुमाया और अपनी बात समझाते हुए कहा कि देखो राजू, यह गाना सुपर डुपर हिट रहेगा, जब मैं इसे पिक्चराइज करूंगा.
महमूद साहब को सब पता था. उन्होंने जो गीत की सिचुएशन बनाई थी, उसे उसी के हिसाब से रिकॉर्ड किया. आखिर, यह उनके दिमाग की उपज थी. उन्हें पता था कि गाने में कैसे परफेक्शन आएगा. मगर संगीतकार का माहौल अलग होता है. मोहम्मद रफी जैसे लीजेंड परेशान हो गए थे. (फोटो साभार: IMDb)
मगर महमूद पूरी तरह से संतुष्ट थे. उन्हें यकीन था कि यह सुपरहिट रहेगा. मजरूह सुल्तानपुरी ने गाने की पंक्तियां लिखी थीं – ‘सज रही गली मेरी मां.’ फिल्म जब रिलीज हुई, तो लोगों ने उस गाने का सीन देखा और समझा. फिल्म के सभी गाने अच्छे थे, मगर इस गाने का कोई मुकाबला नहीं था. गाना सुनने के लिए इस लिंक पर जाएं- https://www.youtube.com/watch?v=sqWI5S3QU0U (फोटो साभार: IMDb)
संगीतकार राजेश रोशन को यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा कोई गीत भी सुपरहिट हो सकता है, मगर महमूद की कलाकारी काम कर गई. वे राजेश रोशन के काम से काफी प्रभावित हुए. वे आरडी बर्मन से अपनी फिल्मों का संगीत बनवाते थे, मगर इसके बाद राजेश रोशन उनके प्रिय बन गए. (फोटो साभार: IMDb)
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