पीलीभीत की रहने वाली विनीता की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने अपने प्रयास करने के बाद उन्हें ‘ब्रेन डेड’ बता दिया, जिसके बाद घरवाले पूरी तरह टूट चुके थे. जब कोई उम्मीद नहीं बची, तो उन्हें एम्बुलेंस से वापस घर ले जाया जा रहा था. तभी रास्ते में हाईवे पर एक गहरा गड्ढा आया. एम्बुलेंस का पहिया जैसे ही उस गड्ढे में गिरा, गाड़ी को एक झटका लगा. इस झटके के साथ ही विनीता के शरीर में हलचल हुई और उनकी रुकी हुई सांसें वापस आ गईं.
पीलीभीतः सड़क के गड्ढे अक्सर लोगों के लिए मुसीबत बनते हैं और हादसों का कारण भी. लेकिन यूपी के बरेली-हरिद्वार हाईवे का एक गड्ढा इन दिनों पूरे देश में सुर्खियों में है. जिस सड़क की बदहाली को लेकर लोग अक्सर प्रशासन को कोसते हैं, आज वही सड़क सोशल मीडिया पर एक महिला के लिए ‘वरदान’ बताई जा रही है. दरअसल, इसी हाईवे के एक गड्ढे ने ब्रेन डेड घोषित हो चुकी विनीता नाम की महिला को नया जीवन दे दिया है.
विनीता की सांसे आ गई वापस
दरअसल, पीलीभीत की रहने वाली विनीता की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने अपने प्रयास करने के बाद उन्हें ‘ब्रेन डेड’ बता दिया, जिसके बाद घरवाले पूरी तरह टूट चुके थे. जब कोई उम्मीद नहीं बची, तो उन्हें एम्बुलेंस से वापस घर ले जाया जा रहा था. तभी रास्ते में हाईवे पर एक गहरा गड्ढा आया. एम्बुलेंस का पहिया जैसे ही उस गड्ढे में गिरा, गाड़ी को एक झटका लगा. इस झटके के साथ ही विनीता के शरीर में हलचल हुई और उनकी रुकी हुई सांसें वापस आ गईं. लोकल 18 की टीम ने जब इस हाईवे का जायजा लिया, तो वहां ऐसे सैकड़ों छोटे-बड़े गड्ढे मिले.
गढ्ढा बना जीवनदान
विनीता के इस मामले के बाद अब स्थानीय लोगों और राहगीरों के बीच यह बड़ी चर्चा छिड़ गई है कि इन गड्ढों को आखिर क्या माना जाए? कुछ लोग इसे एक बड़े चमत्कार की तरह देख रहे हैं और कह रहे हैं कि इस गड्ढे ने विनीता को जीवनदान दिया है. वहीं, दूसरी ओर सड़क से गुजरने वाले ड्राइवरों का कहना है कि रोज के सफर में ये गड्ढे काफी खतरनाक साबित होते हैं. कुल मिलाकर यह मामला विज्ञान और इत्तेफाक के बीच का एक अनोखा उदाहरण बन गया है. विनीता के लिए तो वह गड्ढा किसी फरिश्ते जैसा साबित हुआ, जिसने उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया. लेकिन आम जनता के लिए ये गड्ढे आज भी एक बड़ी समस्या बने हुए हैं. अब इन गड्ढों को जानलेवा कहा जाए या जान बचाने वाला, यह सवाल हर किसी की जुबान पर है. फिलहाल तो यह हाईवे और यहां का यह खास गड्ढा पूरे इंटरनेट पर छाया हुआ है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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