Taliban Papaya Farming Tips: बिहार के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़ आधुनिक और मुनाफे वाली बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं. सारण जिले के तरैया प्रखंड के माधोपुर गांव में किसान राजीव प्रसाद ने रेड लेडी तालिबानी पपीते की खेती कर सबको हैरान कर दिया है. कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लेकर जैविक विधि (Organic) से उगाई गई इस फसल का फलन इतना तगड़ा है कि एक-एक पौधा फलों से लदा हुआ है. राजीव प्रसाद बताते हैं कि उद्यान विभाग से 40% सब्सिडी पर मिले ये पौधे महज 3 महीने में फल देने लगते हैं. एक पौधे पर मात्र 35 से 40 रुपये का खर्च आता है, जबकि उससे 80 किलो से लेकर 1.5 क्विंटल तक पपीता प्राप्त होता है. बाजार में इसे बेचकर एक पौधे से 2500 से 8000 रुपये तक की मोटी कमाई हो रही है. केमिकल मुक्त और पूरी तरह जैविक होने के कारण इन पपीतों की मांग बाजार में बहुत अधिक है. बाहर से आने वाले कार्बाइड युक्त फलों के मुकाबले छपरा की धरती पर उपजा यह पपीता स्वाद में अधिक मीठा और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है. सारण के किसानों के लिए यह तालिबानी वैरायटी अब तरक्की का नया रास्ता बन गई है.
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