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-किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन
-किडनी दाताओं, रोगमुक्त मरीजों और चिकित्सकों का सम्मान
-मुफ्त जांच शिविर और विशेषज्ञों ने दी किडनी रोग से बचाव की अहम जानकारी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर इंदिरापुरम स्थित यशोदा मेडिसिटी अस्पताल ने किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और किडनी रोगों के उन्नत उपचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।  ‘रीनल केयर और किडनी प्रत्यारोपण में उन्नति’ विषय पर गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में किडनी रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर किडनी के दीर्घकालिक रोग से पीडि़त मरीजों के लिए समर्पित प्रत्यारोपण क्लिनिक का भी उद्घाटन किया गया, जहां एक ही स्थान पर रोगियों को व्यापक देखभाल और आधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन उपस्थित रहे। उनके साथ अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक, विशिष्ट अतिथि, किडनी दाता, प्रत्यारोपण प्राप्त मरीज और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत विश्व किडनी दिवस की इस वर्ष की थीम  ‘सबके लिए किडनी स्वास्थ्य: लोगों की देखभाल और पृथ्वी की सुरक्षा’ पर विचार-विमर्श के साथ हुई।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि किडनी स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण से भी जुड़ा हुआ विषय है। स्वच्छ पर्यावरण, संतुलित जीवनशैली और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के माध्यम से किडनी रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अस्पताल के विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में किडनी से जुड़े रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें सबसे प्रमुख दीर्घकालिक किडनी रोग है। यदि इस रोग की समय रहते पहचान हो जाए और उचित उपचार शुरू किया जाए तो मरीज को गंभीर स्थिति तक पहुंचने से बचाया जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, उन्नत डायलिसिस व्यवस्था और किडनी प्रत्यारोपण जैसी सुविधाओं ने किडनी रोगियों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। यशोदा मेडिसिटी के चिकित्सकों ने बताया कि मरीजों को बेहतर परिणाम देने के लिए समर्पित प्रत्यारोपण क्लिनिक की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम रोगियों की पूरी चिकित्सा यात्रा में मार्गदर्शन और उपचार उपलब्ध कराएगी।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा किडनी दाताओं, प्रत्यारोपण के बाद स्वस्थ जीवन जी रहे मरीजों और किडनी रोग से जूझ रहे लोगों का सम्मान भी रहा। इस दौरान कई मरीजों और उनके परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए। इन कहानियों ने यह दर्शाया कि किडनी प्रत्यारोपण और आधुनिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से जीवन को नया अवसर मिल सकता है। किडनी दाताओं की निस्वार्थ भावना की सराहना करते हुए चिकित्सकों ने कहा कि अंगदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है, जिससे किसी व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है। कार्यक्रम में यशोदा मेडिसिटी की विशेषज्ञ चिकित्सक टीम ने भी किडनी रोगों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। विशेषज्ञों में डॉ. मीनू बाजपेयी, डॉ. एल. के. झा, डॉ. वैभव सक्सेना, डॉ. अमित कुमार गुप्ता, डॉ. कुलदीप अग्रवाल, डॉ. प्रजीत मजूमदार, डॉ. इंद्रजीत जी. मोमिन, डॉ. प्रणव त्यागी और डॉ. संगीता शामिल रहे।

इन सभी विशेषज्ञों ने किडनी रोग के कारणों, इसके लक्षणों, समय पर जांच के महत्व और उपचार की नई पद्धतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार किडनी रोग के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने किडनी प्रत्यारोपण से जुड़ी कई आम भ्रांतियों को भी दूर किया। उन्होंने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद भी व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है, बशर्ते वह चिकित्सकीय सलाह का पालन करे और नियमित जांच कराता रहे। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों में होने वाले किडनी रोगों के उपचार में भी अब काफी प्रगति हुई है और समय पर उपचार मिलने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें लोगों को मुफ्त किडनी जांच और परामर्श की सुविधा प्रदान की गई। इस शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और विशेषज्ञ चिकित्सकों से अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर सलाह प्राप्त की। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस प्रकार के शिविर लोगों को जागरूक बनाने के साथ-साथ किडनी रोगों की समय रहते पहचान में भी मददगार साबित होते हैं। यशोदा समूह के अस्पतालों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. पी. एन. अरोड़ा ने इस अवसर पर कहा कि किडनी स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जागरूकता, समय पर जांच और उचित उपचार बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि यशोदा मेडिसिटी में अस्पताल की पूरी टीम किडनी रोगियों को बेहतर उपचार और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका लक्ष्य ऐसी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है जो मरीजों को हर चरण में सहारा दें और उन्हें बेहतर जीवन की ओर अग्रसर करें।

वहीं यशोदा समूह के अस्पतालों की प्रबंध निदेशक डॉ. उपासना अरोड़ा ने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण और डायलिसिस के क्षेत्र में हुई प्रगति ने किडनी रोगियों के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। जो कभी असंभव प्रतीत होता था, आज वह नई आशा और जीवन का दूसरा अवसर बन गया है। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाना, अंगदाताओं का सम्मान करना और किडनी रोग से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करना बेहद जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक मरीजों को जीवनरक्षक उपचार का लाभ मिल सके। कार्यक्रम के समापन पर अस्पताल प्रबंधन ने यह संदेश दिया कि किडनी स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित व्यायाम, रक्तचाप और मधुमेह पर नियंत्रण तथा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। यशोदा मेडिसिटी ने इस आयोजन के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि मरीज-केंद्रित चिकित्सा सेवाओं, जागरूकता और आधुनिक उपचार सुविधाओं के जरिए किडनी रोगियों को बेहतर और सुरक्षित जीवन प्रदान करना ही उनका प्रमुख उद्देश्य है।

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